Pyasi BHABHI kI TRAIN ME chudai

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ने कहा, “रख लेने दो. रखिए भाई साब.”ैने उस औरत के व्यवहार से खुश हो बॅग रखा और खड़ा खड़ा सफ़र करने लगा. वा तीनो मेरे सामने की ऊपर वाली बर्त पर थी. ट्रेन चली तो कुछ राहत हुई. तभी वह औरत जो करीब 25-26 की होगी मुझे देखने लगी तो मैं भी उसे देखने लगा. वह लोग अच्छे
घराने के लग रहे थे. जिस बर्त को पकड़े था उसी पर वह बैठी थी. तभी मुझे अपने हाथ पर उसका हाथ महसूस हुआ तो मैने हाथ अलग किया तो वहाँ भी उसका हाथ मेरे हाथ पर लगा. मैने हाथ हटा लिया तो वा मुझे देखती आगे सरक्ति बोली, “भाई साब आपको कहाँ जाना है?” “जी भोपाल.”
“अरे भोपाल तो हम भी जा रहे हैं. किसके वहाँ जाना है आपको?”उसने झुक कर कहा तो उसका ऊपर का पूरा हिस्सा नज़र आया.मैं उसको देखते अपनी नयी जॉब के बारे मे बताने लगा. मेरी बात

सुनते उसने अपने होंठो को दातो से दबाते अपने ब्लाउस को उभारा तो मैं सनसना गया. वह मुझे देखते हुए बोली, “भाई साब नाम क्या
है आपका?”
“जी राज शर्मा.”
“अच्छा मेरा नाम माया है.”

अब वह सीधी बैठ मुझे देखती और अपने साथ की लड़कियों से ख़ुसर ुसर करती अपनी सारी को अपने उभारो पर बार बार सही कर रही थी. उसकी माँग मे सिंदूर था पर लड़किया कुँवारी थी और 18-19 की
थी. तभी उसने मेरे हाथ को दबा मुझसे कहा, “आइए भाई साब ऊपर बैठ जाइए.”
“ज्ज जी ठीक है आप बैठिए.” मैं समझ गया वह मुझे लिफ्ट दे रही है.
“कोई बात नही आप तो अपने ही शहर चल रहे हैं. फिर रात भरा सफ़र है, खड़े खड़े नही होगा. ये दोनो मेरी ननद हैं. मेरे
पति बॉम्बे मैं हैं.” यह कहती वह आगे झुकी तो मेरी नज़रे उसके
ब्लाउस से चिपक गयी.

ोनो जवानिया अधनंगी दिखी. उसकी नंगी चूचियों को देख मैं
बहकने लगा. अभी मैं कुँवारा था इसलिए कुछ सकुचाहत हो रही
थी उससे सटने मैं. तभी वह सामान उठा अपनी ननद को देती

बोली, “लो एक तरफ रखो.”

इस पर उस लड़की ने मुझे ध्यान से देखा और बॅग एक ओर रख जगह बनाई तो उस औरत ने अपनी बगल मे जगह बनाते कहा, “आइए भाई

साब.”

“ज्ज्ज.ज्जई आप बैठिए.”

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“आइए भी.” और हाथ को दबा करेंट दौड़ाया.उसके बिहेव से बदन मे सनसनी हुई. मैं समझ गया कि यह सफ़र का मज़ा देगी. उसके ब्लाउस के उभारों को देखता शूस उतारनेलगा. उस जवान औरत ने मुझे बिठाने के लिए अपनी कमसिन ननद कोएक ओर खिसकाया तो वा दोनो मुझे गौर से देखने लगी. दोनो फ्रॉक मे थी पर उनकी भाभी सारी मे थी. बड़ी ननद 19 की लग रही थी. ऊपर चढ़ा तो कम जगह की वजह से मैं उस औरत से सॅट गया.मैं अभी सिकुड कर बैठा था. ट्रेन तेज़ी से चल रही थी और हम सब चुप थे.कुछ देर बाद उसने पुच्छा, “आप नौकरी पर अकेले जा रहे हैं?”

“ज्जई नयी नयी जॉब है.”

“बाल बच्चे बाद मे लाएँगे?”

“अभी मेरी शादी नही हुई है.” उसके उभारो को देखते गुदगुदाते

मन से कहा.“तो अब जल्दी शादी करेंगे.” उसने मुझे देखते कहा.“नही अभी एक दो साल नही करेंगे. अभी तो नौकरी मिली है.” मेरा

लंड अपने आप कसता जा रहा था.

“यह ठीक रहेगा. पहले कमाई फिर लुगाई.”

 

“ज्जजई.”

“आराम से बैठिए वहाँ तो आपको सरकारी क्वॉर्टर मिलेगा.”

“जी नही किराए का लेना पड़ेगा.”

इसपर वह अपनी बगल मे बैठी बड़ी वाली से बोली, “मीना तुमको बैठने मे दिक्कत हो रही है?”

“नही भाभी, अपने पास भी तो किराए का कमरा है. इनको अपने साथ

रख लो.” और झुक कर जो मेरी ओर देखा तो फ्रॉक मे उभरे उसके

अनार देखकर तड़प गया.मैं जल्दी से मौके का फयडा उठाते बोला, “आपके पास मकान है?”

“मकान तो है पर और मेरी आँखों मैं अपनी नशीली आँखें डाल

होंटो को दबाया तो मैं समझा कि उसे कैसे किरायेदार की ज़रूरत है.

 

“जी मुझे कमरा चाहिए, किराया जो कहेंगी दूँगा.”

इसपर वा अपनी बाई रान मॉड्कर बोली, “कही इंतज़ाम ना हो तो

आईएगा.”

 

“मुझे वहाँ कौन जानता है.” मैने बेचैनी से कहा.

 

“असल मे भाई साब किराए की बात नही है. हमारे पास दो सयानी

सयानी ननद हैं. अंदर का कमरा है. रखना तो है पर सोच

समझकर रखना होगा. ऐसा आदमी जो परिवार के साथ घुल मिलकर

रहे.”

 

“मुझसे आपको कोई शिकायत नही होगी.”

 

इसपर उसने मुझे अजीब सी नज़रो से देखा और अपनी बड़ी ननद से

बोली, “ज़रा तिर्छि होकर बैठो, बीना को उधर खिस्काओ मैं तो फँस

गयी हूँ.”मुझे हम उमर जवान औरत मज़ेदार लग रही थी. पॅंट टाइट हो गयी

थी. उसके कहने पर छोटी वाली खिसकी तो वह अपनी पीठ बड़ी ननद की चूचियों से सटकर बैठती मेरी ओर घूमकर बैठी और

बोली, “भाई साब आप ज़रा ठीक से उधर होकर बैठिए.”

 

मैं उसके बताए तरीके से बैठा तो हम दोनो का चेहरा आपने सामने

हुआ. मैं पैर फैलाकर बैठा था और वह अपनी बड़ी ननद की गोद

मे लेटी सी मेरी ओर मुँह किए बैठी थी. इस तरह से बड़ी वाली का

चेहरा मेरी ओर और चूचियाँ भाभी की पीठ मे धँसी थी. दोनो

लड़किया बार बार मेरी ओर देख रही थी. मैं भी दोनो को देख मस्त

हो रहा था. मुझे वह औरत चुलबुली और दोनो ननद चालू लगी.

 

मेरे मन मैं भी लालच पैदा हो गया. वह इस तरह से बैठी चुप

रही तो मैने कहा, “आप लोगो को परेशानी हो रही है.”

 

“नही नही आराम से बैठी हूँ. सोच रही हूँ कि आपको कमरा दे ही

दूं. मेरी ननद का भी मन है.”

 

“जी बहुत अच्छा रहेगा, जो किराया कहेंगी दूँगा.”

 

इस पर उसने मुझे घायल करने वाले अंदाज़ से देखा फिर सारी के पल्लू

को ब्लाउस के दोनो उभारो पर ठीक किया और पल्लू के अंदर हाथ ले

जाकर मेरी ओर देखती अपने ब्लाउस के बटन को खोलने लगी. दिख

नही रहा था पर अहसास हो रहा था कि वह ब्लाउस के बटन खोल

रही है. मेरी जवानी मे आग लग गयी और लंड पॅंट मे मचलने

लगा. मैं उसकी बटन खोल रही उंगलियों को देख रहा था. वह ब्रा

नही पहने थी. बटन खोलने के बाद उसने सारी का आँचल ज़रा

नीचे सरकया तो ऊपर की तरफ से उसकी बड़ी-बड़ी बेल सी चूचियाँ

दिखी तो लंड मे पानी आ गया. उसने ब्लाउस के बटन खोल धीरे-

धीरे दोनो चूचियों को नंगा कर दिया फिर दोनो हाथो को मेरे

हाथो पर रखा तो मैने खुश हो उसकी उंगली दबाई. उसने बुरा ना

माना और मेरे हाथ को पकड़ अपने आँचल के नीचे लाई और अपनी

चूचियों पर रख दिया. मुझे लगा कि उसकी चूचियों मे दुनिया

भर का मज़ा भरा है. हाथ रखते ही मैने उसकी चूचियों को

हल्के से दबाया तो वा धीमी आवाज़ मे बोली, “कोई बात नही मज़ा

लीजिए.”

 

 

मैने कभी सोचा भी नही था कि मुझे इस तरह का मज़ा भी मिलेगा.

मैं उसके उभारो को दबा-दबा कर मज़ा लेने लगा और अपने आप को

जन्नत मे पहुँचा कर चलती ट्रेन के इस गोलडेन चान्स का फायेदा

उठाने लगा. जवान चूचियाँ थी. वह आराम से बैठी अपनी जवान

बड़ी चूचियों को मुझसे दब्वा रही थी. उसकी ननद एकटक मेरी

हरकत को खामोशी से देख रही थी. मैं उसकी पपीते सी गदराई

चूचियों को हाथ मे लेने के साथ ही जवानी के जोश से भर

गया था. मेरा लंड लोहे का रोड हो गया था. जब मैं दबाने लगा तो

वह ठीक से बैठकर मज़ा लेने लगी. मैने देखा कि उसकी बड़ी वाली

ननद आँचल के ऊपर नज़र जमाए ध्यान से भाभी की चूचियों

को देख रही थी. उसकी उमर तो कुछ ख़ास नही थी पर चूचियाँ

काफ़ी बड़ी-बड़ी थी और एक हाथ मे समा नही रही थी. चलती

ट्रेन मे जन्नत थी.

 

तभी वह मस्त आँखो से मुझे देखती मुस्कराती बोली, “ज़रा घुंडी

को भी भाई साहब.”

 

इस पर मैं लंड को झटका दे जवानी के इस गोलडेन चान्स को पा उसके

दोनो लंबे निपल को मसल्ने लगा. निपल खड़े और लंबे थे मैं

उसकी मस्तानी आँखो मे डूब सा गया था. मैं चुप चाप मज़ा ले

रहा था कि उसकी बड़ी वाली ननद अपनी चूचियों को उसकी पीठ मे

दबाती अपने होंठो को कस्ति बोली, “ओह्ह भाभी .”

 

“ज़रा रूको बस 2 मिनट.”

 

तभी मैं उसके निपल को उंगली के बीच दबा भैंस के थन की

तरह दूहने लगा तो वह चूतड़ उठाती सी-सी करती बोली, “हाए भाई

साहब बहुत अच्छा ऐसे ही करो. हाए तुम तो कुंवारे नही लगते,

चूचियों को दबाना आता है.”

 

मुझे वासना का मज़ा लाल कर गया और मैं घुंडीयों को दबा-दबा

खींचने लगा. उसकी ननद प्यार से भाभी को मज़ा लेते देखती अपने

गोरे-गोरे गाल लाल कर रही थी. उसके जैसे लंबे निपल पहली बार

पकड़ा था. तभी वह अपनी दोनो टॅंगो को सिकोर मेरे हाथ को अपनी

चूचियों से हटाती बोली, “हाए अब बस भाई साहब.”

 

मैं उसकी बात सुन घबरा सा गया और बोला, “हाए थोड़ा और.”

 

इस पर उसका चेहरा खिल गया और मेरे उभरे लंड को पॅंट पर से

दबाती बोली, “ठीक है आपके इस यार को भी मज़ा दूँगी. आओ मीना

थोड़ा तुम भी दब्वा लो भाई साहब से. अभी भाई साहब का घोड़ा हिन-

हिना रहा है.” और इतना कह वह अपनी 19 साल की जवान हो गयी

कश्मीरी सेब सी चूचियों वाली ननद मीना को आगे अपनी जगह पर

कर खुद उसके पिछे जाने लगी. मीना अभी लड़की थी पर उसकी

चूचियाँ भी उमर से ज़्यादा बड़ी थी. वह खुद भाभी के आगे आई

और अपने बड़े-बड़े संतरे सी चूचियों को फ्रॉक मे उभार मुझे

तड़पाती सामने बैठी और बेचैनी के साथ बिना शरम और हिचक

के बोली, “हाए भाभी मेरी चुस्वा दो.”

अब मुझे यकीन हो गया था कि ननद और भाभी सभी चालू हैं और

मेरी जवानी को देख कर ललचा गयी हैं. मैं काफ़ी लंबा चौड़ा और

उमर 26 साल थी. मैं जवान औरत के साथ सयानी हो रही लड़कियो

को पा अपने लक पर खुश था. मेरा लंड तेज़ी से झटके ले रहा

था. उसने अपनी जवान ननद को क़ायदे से बिठाया फिर उसकी चूचियों

पर हाथ रख बोली, “घर चलकर आराम से पिलाना. क्यों भाई साहब

मकान चाहिए?”

 

“ज..जी जो किराया कहेंगी दूँगा.”

 

“किराया नही देना होगा बस मुझे और मेरी दोनो प्यारी-प्यारी नंदो

को जवान कीजिए. हम लोग केवल मर्द किरायेदार रखते हैं. लीजिए

थोड़ा मीना की भी दबा लीजिए.” और अपने हाथ से मेरे हाथ को

पकड़ अपनी ननद की चूचियों पर रखा.
मैं बड़ी के बाद हाथ मे आने वाली छोटी चूचियों को पा

एकदम से कसमसा गया. मैं फ्रॉक पर से मीना की चूचियों को प्यार

से मसल्ने लगा. कभी सपने मे भी इस तरह का मज़ा नही लिया

था. तभी वह औरत मस्त अंदाज़ से बोली, “ज़रा कस-कस कर दबाइए

ना तभी तो मेरी प्यारी ननद को मज़ा आएगा.”

 

उसकी बात सुन उसकी ननद मीना बोली, “हाए भाभी मज़ा आ रहा है.”

 

“जल्दी से ले लो मज़ा, भाई साहब को थोड़ा बीना की भी चखना है.”

बीना सबसे छोटी और 18 साल की थी. मैं मीना की दबा रहा था.

निपल फ्रॉक मे उभरे हुए थे और इसकी चूचियों को दबाने से तो और

भी मज़ा आ रहा था. तभी वह मुझसे बोली, “भाई साहब.”

 

“हां.” “हमारे यहाँ किरायेदार बनकर रहिए तो चोदन और भोजन

दोनो का इंतज़ाम हो जाएगा.

 

उसकी बात सुन मैं कसमसा गया. वह इस तरह की गंदी बाते करती

मुझे देख रही थी. मीना भी अपनी भाभी की तरह चूचियों को

उभार कर मसलवा रही थी. मीना के होंठ कसे थे और आँख बंद

थी. उसको देख उसकी भाभी बोली, “निपल मस्लो हाए अब यह जाने

वाली है.”

 

मैं उसके इशारे को समझ निपल को फ्रॉक के कपड़े से पकड़ मसल्ने

लगा तो छ्छोकरी अपनी रानो को कस्ति सिसकारी ले मुझे पागल बनाने

लगी. 10-12 बार मैं ही उसकी चूत भी भाभी की चूत की तरह

नमकीन पानी को चढ्ढि मे टपकाने लगी.

 

चूत के पानी से अपनी चढ्ढि गीली कर वह लंबी लंबी साँसे लेती

कॅटिली नज़रो से मुझे देखते पिछे जाने लगी तो उसकी मस्त भाभी

मेरे लंड को पकड़ती बोली, “हाए तुम्हारा तो अभी भी नही निकला.”

इस पर मैने उसकी चूचियों को पकड़ दीवानगी के साथ कहा, “इसे

इसकी खुराक दो तब निकलेगा.”

 

वह चालाक औरत मेरी मर्दानगी को नाप रही थी. जवान ननद की

चूचियों को मसल मैं उस औरत का गुलाम बन गया था. यकीन था

कि वह अपने साथ ही अपनी जवान ननदों का मज़ा भी दिलवाएगी. उसने

लंड पकड़ा और मैने ब्लाउस के ऊपर से चूचियों को पकड़ा तो लगा

की अपने आप को भूल गया हूँ.

 

तभी उसके आगे उसकी सबसे छोटी ननद बीना अपनी 18 साल की गदराई

जवानी लेकर बैठी तो वह मुस्कान के साथ लंड को दबाती बोली, “लो

भाई साहब थोड़ा इसको भी.”

 

मैं गदगद हो गया. उमर के हिसाब से 18 साल की लौंडिया की भी

काफ़ी बड़ी थी. बड़ी बहन की तरह यह भी चढ्ढि और फ्रॉक मे

थी. चूचियाँ उभर रही थी और टमाटर सी थी. इसकी तो आराम से

एक हाथ मे आने वाली थी. बड़ी वाली ननद की तरह इसे भी अपनी

गोद मे बिठाती उसके टमाटरो पर हाथ फेरती बोली, “लो मसलो भाई

साहब अभी तुम्हारा डाउन हो जाएगा.”

 

 

 

तभी मुझे छोटी वाली की गोरी-गोरी रानो के बीच की चढ्ढि दिख

गयी. मैं एक हाथ को बेताबी के साथ उसकी जवान हो रही

चूचियों पर लगा मस्त हो खूबसूरत जवान औरत को देखते दूसरे

हाथ को लड़की की चूत की ओर सरकाते बोला, “हाए थोड़ा नीचे का

भी तभी तो डाउन होगा.”

 

“घर चलकर आराम से लेना पूरा मज़ा. अभी बस ज़रा दबा दो.”

 

जब मैने छोटी वाली बीना की चूचियों को दबाया तो उसने भी अपनी

बड़ी बहन की तरह दोनो चूचियों को आगे उभार दिया. मैं छोटी

वाली के कच्चे अनार सी दोनो चूचियों को मसलता मस्ती की सीमा

को पार करने लगा.

 

तभी उसकी भाभी ने हाथ आगे कर मेरे लंड को पॅंट के ऊपर से

पकड़ा और मस्त सुपरे को दबाती बोली, “हमारे पास तुमको जन्नत का

मज़ा मिलेगा. मज़ा लो अब निकलेगा.”

 

उसकी इस हरकत से खुश हो लंड को झटके देता छोटी चूचियों को

मसल्ने लगा. वह भी अपनी बड़ी बहन की तरह खुश लग रही थी.

तभी मेरा लंड पॅंट मे झड़ने लगा तो मैने कच-कचा कर बीना

की चूचियों को कसकर पकड़ लिया और तब तक पकड़े रहा जब तक

मेरा लंड झारकर ठंडा नही हो गया. लंड बुरी तरह झाड़ा था.

पूरी पॅंटी भीग गयी थी. उसने मेरे हाथ को बीना की चूचियों से

हटा उसे पिछे किया और खुद आगे आ मुझसे चिपक कर बैठी.

झड़ने के बाद मैं शरमा रहा था पर हर साइज़ की तितलिया एक साथ

पाकर मज़ा आया था. वह मुझसे चिपकी थी और उसकी दोनो ननद चुप

बैठी हमे देख रही थी.

 

10 मिनट बाद मेरी कमर मे हाथ डाल मुस्कान के साथ

बोली, “मज़ा आया?”

 

जवाब देने मे मैं शरमाया तो वह और चिपकती बोली, “क्यों शर्मा रहे

हो? मैं अच्छी नही लग रही क्या?”

 

“ज..जी आप तो बहुत खूबसूरत हैं, बहुत मज़ा दिया आपने.”

 

“अभी तो कुछ नही, जब किरायेदार बनकर हमारे साथ रहोगे तब

देखना. कसम से तुम्हारी जवानी ने लूट लिया. तुम तो हम तीनो को एक

बार मे ही ठंडा कर दोगे. मेरी ननदे पसंद आई?”

 

 

“ज..जी बहुत.”

 

“छोटी वाली बीना की भी चखवा दूँगी. अब क्या शरम आराम से मेरी

कमर मे हाथ डाल कर बैठो. कोई नही देख रहा है, सब सो रहे

हैं.”

 

उस औरत ने ठंडा करके दुबारा मेरी जवानी को छेड़ना शुरू कर

दिया. मैने धीरे से उसकी कमर मे हाथ डाला तो वह गाल से गाल

सटा कर बोली, “हमारे घर मे रहोगे तो हर चीज़ की आराम रहेगी.

घर मे केवल सास है. हमको बहुत मानती है. अभी सिर्फ़ 45 की

है पर लगती 35 की है. उसको भी तुम्हारी खुराक दिलवाकर जवान

करवा दूँगी तो वह भी हम लोगो के साथ मौज मस्ती करेगी. मैं

अपने पति से खुश नही हूँ. वह बॉम्बे मे है और उसका एकदम

मरियल सा है. अभी मुझे कोई बच्चा भी नही हुआ है.”

 

“ज..जी आपकी शादी को तो बहुत दिन हो गये होंगे?”

 

“कहाँ अभी तो साल भर भी नही हुआ है. दोनो लौंडिया मेरे हाथ

मे हैं, जिसकी कहोगे उसकी दिलवा दूँगी.”

 

जब उसने ननद के साथ-साथ सास को भी चुदवाने की बात की तो

मैं मज़े से भर ठंडे हो गये लंड को फिर से खड़ा करने लगा और

उसकी कमर को कस दोनो चूचियों पर हाथ रख दिया. वह

बोली, “घर पर कोई नही है. राजा मेरी कसम सच-सच बताओ कितनी

बार चोदा है अब तक?” अब तुम कहने को भाय्या और मेरे लिए सैंया

हो.”

 

उसके इस खुले क्वेस्चन पर बदन की ठंडक गायब हो गयी. मेरे

लूज लंड मे टेन्षन आया. मुझे अनोखा लग लग रहा था कि वह

मेरे जैसे अंजान के साथ इस तरह कर रही है जैसे कोई मस्तानी

रंडी अपने पुराने और मनपसंद कस्टमर के साथ कर रही हो और

वह भी घर पर नही बल्कि चलती ट्रेन मे. रात आधी निकल

चुकी थी. भीड़ के कारण सभी एक दूसरे पर लदे सो रहे थे.

ऊपर जो हो रहा था उसे केवल उसकी दोनो नन्दे ही देख सकती थी जो

अपनी-अपनी चूचियाँ मसलवा कर अपनी-अपनी चढ्ढि गीली करने के बाद

चुप थी. उसके खुले सवाल पर मेरी जवानी बौखला गयी और मैने

उसके दमकते चेहरे पर नज़र जमा थोड़ा झेन्प्ते हुए उसे देखा तो

वह चूची को उभार कर कमर को हाथ से दबाती

बोली, “अब क्या झिझक, मेरे साथ जन्नत की सैर करते चलो. बताओ

कितनी को चोदा है?”

 

इस पर मैं उसकी पपीते सी चूचियों को दबाते बोला, “हाए कितनी

अच्छी हो. अब मैं शादी नही करूँगा. आप मुझे किरायेदार बनाकर

रखिए.”

 

इस पर वह मस्ती से भर बोली, “पहले जवाब दो कितनी को चोदा है?”

वह गाल को मेरे मुँह के पास ला बात कर रही थी जिससे बदन

सनसना रहा था.

 

ट्रेन के हसीन मज़े को लूटते बोला, “बस एक-दो को.”

 

“मेरी तरह जवान थी?”

 

“हां पर सब बेकार, हाए भाभी आप कितनी प्यारी हैं.” और ब्लाउस

के ऊपर से उसकी चुचियो को मसला.

 

मुझे उस औरत के पास जो मज़ा मिल रहा था उसके आगे सब मज़े

फीके थे. वह दोनो ननदों की ओर देख कमर के हाथ को झटके से

अलग कर मेरे गाल मसल बोली, “अब हम लोगो से शरमाओ नही. हम लोगो

को पाकर सब भूल जाओगे. खूब मज़ा लो.”

 

इस पर मैं उसके ब्लाउस मे उभरे निपल को पकड़ तड़प कर

बोला, “हाए कितनी खूबसूरत हैं आपकी.”

 

 

 

“अब हमारे साथ मज़ा लेते चलो. ट्रेन तो सुबह पहुँचेगी. तुम

बहुत भोले हो, मेरा दिल आ गया तुम्हारे भोलेपन पर. दो के साथ

मज़ा ले चुके हो.”

 

“जी दोनो बेकार थी. हाए कितनी प्यारी घुंडी हैं आपकी.”

 

“मेरा कहा मनोगे तो जन्नत मिलेगी. छोटी वाली ननद की तो तेल

लगाने वाली है. उसकी भी चखाउन्गि पर जब मुझे अपनी जवानी का

मज़ा दोगे.”

 

“हाए भाभी मेरा सब कुछ आपका है, जो कहेंगी करूँगा बस मुझे

अपना किरायेदार बना लो.” और दोनो निपल को मसल्ने लगा.

 

वह मुझसे बोली, “हाए छोड़ो मैं जैसे कहती हूँ वैसे करो. उन

औरतो को चोदा ही था या ऐश भी किया था?”

 

“हाए उनका नाम मत लीजिए.”

 

“देखो राज शर्मा मेरी जवानी को वही समहाल सकता है जो मेरे साथ

अययशी करे. तुम केवल टाँग उठाकर चोदने वाले हो. हम लोग

खुलकर मज़ा लेने वाले को ही किरायेदार रखते हैं.”

 

“जी मुझे मंज़ूर है.”

 

“ठीक है घबराओ नही रास्ते भर ऐश करते घर ले चलेंगे.

बोलो मेरी सास को चोदोगे?”

“जी.”

 

“और मुझे?”

 

“आपको भी.”

 

“और मेरी दोनो मस्तानी ननदों को?”

 

“उनको भी.”

 

 

 

वह जादूगरनी थी. उसने मुझे अपने पास आने का इशारा किया. पास

गया और उसके इशारे पर उसकी चूचियों पर हाथ फेरा तो वह मेरा

हाथ पकड़ अपनी चूचियों पर दबाती बोली, “आज कोई मिला है. दोनो

हाथ से मेरी कमर दबाओ.” मैं कमर को दबाने लगा तो वह

बोली, “कमर दबाते हुए सारी खोलो. तुम्हारी जवानी की प्यास इसी

ट्रेन मे बुझा दूँगी. अभी चुदवाउंगी तुमसे.”
अब तो वह बहुत ही मज़ा दे रही थी. खुल कर बोलने से हलचल सी

मची थी. सारी खोलकर चुदवाने की बात की तो लंड तेज़ी से खड़ा

हुआ. उसकी कमर से बँधी सारी खोलने लगा तो वह मेरे गाल मसल्ति

बोली, “बोलो सारी खोलने मे मज़ा आ रहा है?”

 

“हाए बहुत भाभी.” और सारी अलग कर उसके पेटिकोट पर हाथ रखा

तो जवानी झूम गयी.

 

वह सारी को अपनी बड़ी ननद को देती बोली, “मीना मेरी सारी को लपेट

कर कोने मैं रख दो.”

 

भाभी की बात सुन उसकी ननद ने मुस्कराते हुए मुझे देखा और अपनी

भाभी की सारी को अपने हाथ मे ले लिया. वह मॅचिंग का पेटिकोट

और ब्लाउस पहने थी. अब वह और भी खूबसूरत लग रही थी. मेरा

लंड तो इतने मे ही दुबारा झटके लेने लगा था. उसका चिकना पेट

बहुत कसा-कसा दिख रहा था. वह बोली, “उन औरतो को कैसे चोदा

था?”

 

“जी लिटा कर.”

 

“एक बार मे पूरा पेल दिया था इसको?” लंड को पकड़ बोली तो मैं

तड़प कर बोला, “जी 4-5 बार मे गया था.”

 

“इसका मतलब जवान थी.”

 

“जी भाभी पर मज़ा नही आया था. हाए आपके साथ बहुत मज़ा आ

रहा है.”

 

हाथ लगते ही लंड एकदम तन गया था. वह सुपारे को मसल्ति

खुलकर बोल रही थी, “ तुम्हारा बहुत मोटा और लंबा है. मैं तो

ललचा गयी हूँ. मज़ा लो मेरे साथ. मेरे चूतड़ को सहलाओ. एक बात

बताओ?”

 

“क्या भाभी.”

 

“बताओ अगर मेरे साथ मेरी दोनो ननदे भी चुदासि हों तो तुम

पहले किसकी चोदोगे?”

 

“जी आपकी भाभी.”

 

“शाबास, बहुत अच्छा. तुम सबके सामने मुझमे ही दिलचस्पी दिखाना,

मेरी सास के सामने यही ज़ाहिर करना कि अगर मैं इशारा करूँगी

तभी तुम उनपर सवार होगे.”

 

“जी भाभी हाए क्या चूतड़ हैं.”

 

अब मेरे ऊपर उस छिनाल औरत का नशा सवार था. सारी उतरवाने से

समझ गया था कि सफ़र मे ही प्यास बुझेगी. वा बोली, “मेरी सास

45 की हैं पर अभी भी तुम जैसे जवान को खोजती हैं. देखो हमारे

घर मे मर्द नही हैं पर सबके पास चूत हैं. सबको तुमको ही

चोदना है. चोद लोगे ना?”

 

“जी भाभी.”

 

“किसी चूत मे डाल कर सोए हो कभी?”

 

“नही भाभी.”

 

“यह मज़ा मेरे पास ही मिलेगा. दूसरा सबसे ज़्यादा मज़ा यह पाओगे कि

हम सब तुम्हारी लौंडिया बनकर चुदवायेन्गे. सबकी चूत बिना झाँत

के कमसिन लौंडिया सी मिलेगी. घर मैं सभी तुम्हारे साथ चढ्ढि

और ब्रा मे रहेंगे.” “जी.”

 

वह मेरे सामने घुटने के बल बैठी मस्ती के साथ मुझे ऐसी

रंगीन दुनिया दिखा रही थी जिसके बारे मे सोचा भी नही था. वह

दबी और धीमी आवाज़ मे बाते कर रही थी और मुझे अपना गुलाम

बना रही थी. मेरे हाथ साए (पेटिकोट के ऊपर से उसके मांसल

गुदाज़ चूतड़ की दरार मे चल रहे थे. भले जवान था और

चोद कर मज़ा ले चुका था पर इसके सामने मेरी हालत बच्चे सी

थी. जो कह रही थी वह कर रहा था. अब लंड पूरा तना खड़ा था

और सुपरा पॅंट फाड़ने को तैय्यार था. इस मज़े को पा ट्रेन की

भीड़-भाड़ की परवाह भी नही रही थी. मैं भी उसकी तरह मज़ा

लेने लगा था. पेटिकोट मे वा बहुत प्यारी लग रही थी. मुझे

अपनी गुदाज़ चिकनी गान्ड सहलाने का इशारा कर वह मस्त कर चुकी थी.

एक पल चुप रहने के बाद वह मेरे लंड के सुपारे को दबाती

बोली, “समझ गये?””जी भाभी.”

 

“मुझे ऐश कराते ले चलोगे?”

 

“हां भाभी.” मैं उसके इशारे पर चल रहा था.

 

वह मेरे चौड़े सीने पर हाथ फेरते बोली, “मेरी छोटी ननद बीना

अभी एकदम कोरी है, मैं तेल लगाकर उसका मज़ा दिलवा दूँगी.”

 

“जो कहिएगा करूँगा, हाए बड़ी वाली ने किसी से करवाया है क्या?”

 

“हां एक बार एक को ले गयी थी घर तो 2-3 बार चुदवाया था पर

उसका भी तुम्हारे आगे बेकार था. तुम्हारा तगड़ा है इसलिए मीना की चूत मे

भी कसा-कसा जाएगा. तुम सीधे हो मैं तुमको सब सिखा दूँगी. मेरी

तरह सास की भी चिकनी है.”

 

मैं उसकी बात सुन एक हाथ उसकी चूची से हटा उसकी चिपकी रानो

के बीच ला तड़प कर चूची को कसकर दबाता बोला, “इसे दिखाइए

भाभी.”

 

मेरी इस हरकत पर वह खुश होकर बोली, “दिखाउन्गि. आज से मेरी

जवानी तुम्हारी हो गयी है. एक बार मज़ा लेकर पानी और निकाल दो

तब चोदने का मज़ा आएगा.”

 

उसकी बात सुन मैं उसके चिकने पेट पर हाथ फिरा धीरे से बोला, “एक

बार झाड़ तो गया है.”

 

“एक बार और झाड़ लो तो चोदने का मज़ा आएगा. बहुत दिनो से किसी

को चोदा नही है शायद?”

 

“हां भाभी.”

 

“फिर अपने हाथ से ब्लाउस खोलो और मुझसे चूचियों का मज़ा लूटना

सीखो. खोलो और मेरी जवानी का मज़ा लो.”

 

मैने अपने हाथ से उसके ब्लाउस को खोला और मांसल बड़ी-बड़ी और

लंबी घुंडी वाली चूचियों को नंगी देख लंड का वोल्टेज हाइ हो

गया. वह बोली, “दोनो पर धीरे-धीरे हाथ फेरो.” मैं उसकी गदराई

जवान चूचियों पर हाथ फेरने लगा तो वह बोली, “पहले धीरे-

धीरे सहलाओ फिर मस्लो उसके बाद घुंडी मस्लो और फिर घुंदियो को

दुहो जैसे भैंस का थन दूहा जाता है तब मज़ा आएगा.”

 

“जी भाभी.” और मैं पूरी चूचियों पर हाथ फेर जवानी के

सबसे बेहतरीन मज़े को लेने लगा.

 

वह मज़ा लेते मुझे बता रही थी कि यह सबके साथ करना है. अब जो

उसकी चूचियों के साथ उसकी बताई ट्रिक का लास्ट वर्क यानी

घुंदियो को दूह रहा था तो वा बोली, “घर चलकर इसको तेल लगाकर

दुहना. इससे चूचियों की घुंडी लंबी होती है और दोनो को मज़ा

मिलता है.”

 

“हाए भाभी आपके निपल बहुत प्यारे हैं.” दोनो नंगी चूचियों

को घूरते कहा तो वा जन्नत की सैर करती लंड को पकड़

बोली, “अभी इसका तुमने किसी से ठीक से मज़ा नही लिया है. बताओ

इसको सबसे ज़्यादा मज़ा कब आता है.”

 

“जी चूत मे डालने पर.”

 

 

 

“धत्त. इसको तब मज़ा आएगा जब बड़ी वाली ननद की चूत मे

डालकर उसे गोद मे बिठाओ और छोटी वाली की चूचियों को दबाकर

मज़ा लो. एक साथ जब दो चूत वाली होती हैं तब ज़्यादा मज़ा आता

है.”

 

“जी. हाए कैसे होगा भाभी यह.”

 

उसकी बात से प्यास बढ़ी तो वह बोली, “मैं करवाउंगी ना. अब

चूचियों को हाथ से खेल चुके हो बोलो अब क्या करोगे?”

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“जी चूत को सहलाकर डाल दूँगा.” मैने मस्त होकर कहा. मेरी बात

सुन वह मज़े से भर अपनी जवान चूचियों को मेरे गाल से सटा

बोली, “पागल, अभी तो चूचियों का असली मज़ा लिया ही नही.” और

तिर्छी होकर अपने निपल को मेरे होंठो पर रख बोली, “लो इसको

चूसो तब मज़ा आएगा.”

 

मैने निपल को मुँह मे लेकर चूसा तो लगा कि लंड पॅंट को फाड़

देगा. चूसते ही मेरी आँख अपने आप बंद हो गयी. वह एक हाथ मेरी

कमर मे डाल कर दूसरे हाथ से अपनी चुचि पकड़ उसकी घुंडी

चूसा रही थी. उसने 5 मिनट तक इसी तरह मुझे दोनो घुंडी चुसाइ

फिर मस्ती के साथ दाई चुचि को आधी मुँह मे डालकर मेरे दोनो

पैरो के बीच आ मेरे हाथ को अपनी रानो के बीच करती

बोली, “हाथ से चूत सहलाओ और चुचि पियो.” मैने चिकनी रानो के

बीच हथेली को उसकी जवान चूत पर रखा तो लगा लंड फ़ौरन पानी

फेंक देगा. मैं चूत को सहलाते हुए चूचियों को बड़ी-बड़ी से

पीने लगा. वह दोनो चूचियों को बदल-बदल कर मुँह मे पेलती

पिला रही थी और मैं चूचियों और चूत का मज़ा लेने लगा. माया

की चूत पर एक बाल भी नही था. चूत बहुत कसी और गरम लग

रही थी. मैं चूचियों को पीते हुए उसकी चूत की फाँक मे

उंगली पेलने लगा.

 

कुछ देर बाद उसने कहा, “निकला तुम्हारा पानी?”

 

“नही भाभी.”

 

“हाए तुम्हारा तो आराम से एक साथ दो को चोदने वाला है. बस करो

अब.”

 

“हाए थोड़ा और.” पहली बार जवान औरत की चूचियों को मुँह से

पीकर पागल हो गया था. माया की चूचियों को पीने का मज़ा निराला

था. वह उसी तरह चूत मे उंगली करवाते फिर दोनो चूचियों को

पिलाने लगी. अब तो लंड एकदम लोहा हो गया था. मैं मदहोश हो

औरत के बदन का मीठा रस चूचियों से पीता मज़ा ले रहा था.

करीब 2 मिनट तक उसी तरह से पिलाया फिर चूचियों को अलग कर

मेरे सामने चूतड़ के बल बैठ लंबी-लंबी साँस लेते बोली, “इसको

निकालो.”

मैने धीरे से पॅंट की ज़िप खोल मस्त हेवी लंड को उसके सामने हाथ

से पकड़ बाहर किया तो तो वा मेरे काले और लाल सुपारे वाले लंड

पर हाथ फेरने लगी. मैने मज़े से भर कहा, “हाए माया.”

 

तभी उसकी बड़ी वाली ननद मीना पिछे से उसके कंधे पर मुँह रख

मेरे फँफनाए लंड को प्यार से देखती बोली, “हाए भाभी इनका कितना

प्यारा है. आप करवाएँगी तो 16 साल की लड़की की तरह हो जाओगी.”

“हां मीना इसका तुम्हारे भाय्या से जस्ट डबल है. जाने कब से

खड़ा है. चाहती तो दो औरते आराम से उतर जाती.”
“भाभी मेरी तो देखते ही मचल गयी, आप तो करवाएँगी ही, इनका

सुपारा तो चूसने लायक है.”

 

यह कहते हुए उसने मेरे सुपरे को दबा मस्त कर दिया. ननद को अपने

दमदार लंड को झुक कर देखते और तारीफ करते सुन मैं और मस्त

हुआ.

“चूसने वाला सुपारा है इनका मीना.”

 

“हां भाभी बहुत मस्त है. यह रहेंगे तो मज़ा आ जाएगा.”

 

“एक बार और झाड़ जाता तो मज़ा आ जाता.”

 

“कहो तो चूस ले भाभी?”

 

“कैसे चूसूगी यहाँ?”

 

“इनको अपनी गोदी मे लिटा लो तो हम चूस ले. मेरी प्यारी भाभी

प्लीज़. देखते ही प्यार हो गया.”

 

मीना भी मेरे लंड को देख मज़ा लेने को ललचा गयी थी. मैं दोनो

की बात सुन मज़े से भरता जा रहा था. तभी उसने मेरे लंड को

मुट्ठी मे दबाते पूछा, “कभी चुस्वाया है इसको?”

 

“हाए नही.”

 

“अपना चूतड़ मेरी गोद मे रख कर तिर्छे होकर लेटो.”

 

मैने फ़ौरन चूतड़ को माया की गुदाज़ रानो पर रख दीवार का सहारा

ले रेनबो सा हुआ तो मीना झुक कर मेरे लंड के पास अपना मुँह

लाई तो उसकी भाभी जड़ के पास से मेरे मूसल से लंड को पकड़

अपनी 19 साल की ननद से बोली, “चूचियों पर रगड़ कर मज़ा लेने

वाला सुपारा है.”

 

“हां भाभी कितना बड़ा है.”

 

“चूसना नही, नीचे जो कट है उसको चॅटो. झड़ने वाला है.”

 

इसपर मीना ने जैसे ही अपनी जीभ को मेरे मस्त लाल और गरम सुपारे

पर लगाया तो मुझे लगा जैसे लंड किसी जवान चूत मे घुस गया

हो. मैने सिसकारी के साथ बदन को कड़ा किया तो माया बोली, “स्श्ह मत

करो. मेरी ननद को चाटने दो. तुम्हारा लंड चूत मे डलवाकर

रात भर सोने वाला है.”

 

वह चाटने लगी और मैं लंड चटवा बार-बार गन्गना कर गरम-

गरम साँस छोड़ने लगा. वह सुपरे पर जीभ झटके के साथ

चलाती थी तो चोदने सा मज़ा आता था.

 

“क्यों कैसा मज़ा है?”

 

“हाए बहुत मज़ा आ रहा है.”

 

“चूत चोदने सा?”

 

“हां हाए अब निकलेगा.” तभी उसने अपनी ननद से कहा, “हाए मीना

जैसे उस आदमी का खड़ा किया था वैसे इसको भी करो.”

 

अपनी भाभी की बात सुन मीना सुपारे को होंठो के बीच ले ऊपर-

नीचे करने लगी तो मैं मस्ती से भर तड़पने लगा. वह होंठो को

चूत की तरह लंड पर चिपका मुँह से चूत चोदने सा मज़ा दे मुझे

पागल कर रही थी.

 

करीब 20-25 बार ही किया था कि मैं सह ना सका और लंड को उसके

मुँह से बाहर कर झटके के साथ सीधा हुआ और सफेद लार माया के

रेशमी पेटिकोट पर गिराने लगा. माया ने पूछा, “मीना तेरा पानी

निकला?”

 

“हाँ भाभी मेरा तो चाटने मे ही निकल गया था.”

 

“एक काम करो मीना.”

 

“क्या भाभी?”

 

“अब भाई साहब को ज़रा मेरी चूत चटवओ. चटवाओगि तभी खड़ा

होगा. दोबारा झाड़ा है ना.” और प्यार से मेरे लंड को अपने पेटिकोट

से पोछ कर अपनी ननद के सहारे उसी जगह पर टाँग फैलाकर

लेटी.

 

ग़ज़ब का मज़ा था. पहली बार झड़ने पर जहाँ मेरा लंड सिकुरकर

छ्होटा हुआ था वही इस बार पेटिकोट से पूछ्ते ही फिर से मस्ताने

लगा था. उसकी खूबसूरत 19 साल की ननद ने मेरी ओर देखते अपने

आप को इधर-उधर करके अपनी भाभी के बदन को अपनी गोद मे लिया.

अब उसकी राने आपस मे सटी थी. माया पालती मार कर रानो को

फैला जवान ननद की गोद मे लेट गयी. तभी भाभी को गोद मे

लिए मीना प्यार से अपनी भाभी की चिकनी जवान चूत को हाथ से

सहलाती बोली, “लो चॅटो मेरी भाभी की चूत को.”

 

मैं इस पोज़ मे उसकी रंगीन भाभी की बटर सी चूत को देखते

मज़े से भर गया. मेरा झाड़ सिकुरा लंड फ़ौरन खड़ा होने लगा तो

मैने झुक कर उस मस्तानी औरत की चूत को कुत्ते की तरह सूँघा

तो चूत की मदहोश कर देने वाली खुश्बू से मेरी जवानी मचल

गयी. तभी ननद ने भाभी की चूत के चिकने उभारदार फाँक को

दो उंगली से फैलाकर कहा, “लो चॅटो.”

 

मैं चूत के अंदर के गुलबीपन को देखकर एकदम से सनसना गया

और जीभ को चिकनी चूत पर लगा आसमान मे उड़ने लगा. 19 साल

की लड़की जिस तरह खुलेपन के साथ अपनी भाभी की चूत को खोलकर

मुझे चटा रही थी उससे मैं समझ गया कि यह सब जानती है. 2

मिनट ही चाता और मेरा लंड तीसरी बार लोहा हो गया. मेरे प्यासे

लंड को मुठ्ठी मे दबा मीना अपनी भाभी से बोली, “भाभी खड़ा हो

गया है. चोदने लायक है.”

 

इतना सुन माया उठी और मुझे दीवार का सहारा लेकर बिठाया और

खोंते से खड़े लंड को हाथ से पकड़ चूतड़ की ओर से चूत के

जलते छेद पर जमाती बोली, “ तुम इसी तरह बैठे रहना मैं अभी

चुद्वा लेती हूँ.”

 

उस समय उसकी ननद मीना प्यार से अपनी भाभी के पेटिकोट को चूतड़

की ओर से उठाए मस्त भाभी की कलाकारी को देख रही थी. चूत के

छेद पर सुपरा लगा वह रुकी तो मीना मेरे दोनो हाथो को अपनी

भाभी की चूचियों पर लाती बोली, “भाभी की दबाओ.”

 

मैं उसकी चूचियों को दबाने लगा तो माया अपने मांसल चूतड़ का

भार मेरे लंड पर देने लगी जिससे मेरा लंड उसकी चूत के गरम

छेद मे धीरे-धीरे सरकने लगा. चूत मे घुसते लंड का मज़ा

मुझे जन्नत का नज़ारा देने लगा. मैं मस्त था. वह चूत को लंड

पर दबाती लंड को चूत मे ले रही थी और पास बैठी उसकी दोनो

ननदे मस्ती से भरी अपनी भाभी की चुदति चूत को देख रही थी.

मैं चूत मे डालकर पागल सा हो गया था. अब वह अपनी गंद को

ऊपर-नीचे करके सक्क-सक्क चुद्वा रही थी.

 

मैं प्यार से चलती ट्रेन मे चुदवाने के इस स्टाइल पर दीवाना हो

उसको चोदने लगा और दोनो लड़कियाँ अपनी भाभी की चुदाई देखने ल Hindi fuck story 

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Updated: November 4, 2017 — 3:27 pm

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