मई और मेरी सेक्सी मौसी

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रजत चाचा और गीता चाची को अमेरिका गये दो महने भी नहीं हुए थे और लीना की चूत कुलबुलाने लगी. क्या चुदैल तबियत पाई है मेरी रानी ने, इसीलिये तो उसपर मैं मरता हूं.

“क्यों वो दीपक मौसाजी के बारे में बोल रही थीं ना गीता चाची! चलना नहीं है क्या उनके यहां?”

“हां जान, जब कहो चलते हैं. वैसे तुमको बताने ही वाला था, आभा मौसी का सुबह ही फोन आया था, तुम नहा रही थीं तब कि अनिल बेटे, गांव आओ बहू को लेकर, हमने तो उसको देखा भी नहीं.”

लीना मुस्करा कर बोली “तब तो और देर मत करो, इसको कहते हैं संजोग, यहां हम उनकी बात कर रहे थे और उन्होंने बुलावा भेज दिया. कहीं गीता चाची ने तो उनको नहीं बताया यहां हमने क्या गुल खिलाये उनके साथ”

“क्या पता. वैसे डार्लिंग, गीता चाची ने भी बस संकेत ही दिया था कि मौसा मौसी के यहां हो आओ, उसका मतलब यह नहीं है कि वहां भी वैसी ही रास लीला करने मिलेगी जैसी हमने रजत चाचा और गीता चाची के साथ की. और सच में आभा मौसी को लगा होगा कि हम उनके यहां गांव आयें”

“जो भी हो, बस चलो. वहां देखेंगे क्या होता है” लीना मुझे आंख मार कर बोली.

मैं समझ गया, वहां कुछ हो न हो, लीना अपनी पूरी कोशिश करेगी ये मुझे मालूम था. “ठीक है रानी, अगले ही महने चलते हैं. मैं रिज़र्वेशन का देखता हूं”

दीपक मौसाजी के यहां जाने के पहले वाले दिन मैंने लीना को उनके बारे में बताया. हमारा उनका दूर का रिश्ता है. उनकी पत्नी आभा मौसी, मेरी मां के ही गांव की थीं. मेरी मां से उनकी उमर दो तीन साल बड़ी थी. याने अब सैंतालीस अड़तालीस के आसपास होगी.

“पर दीपक मौसाजी तो चालीस के नीचे ही हैं, शायद छत्तीस सैंतीस साल के. फ़िर ये क्या चक्कर है? उनकी पत्नी उनसे दस साल बड़ी है?” लीना ने पूछा.

“असल में दीपक मौसाजी के बड़े भाई से आभा मौसी की शादी हुई थी. वे जवानी में ही गुजर गये. गांव में रिवाज है कि ऐसे में कभी देवर के साथ शादी कर देते हैं. सो आभा मौसी की शादी अपने देवर से कर दी गयी. बड़ी मजेदार बात है, जब शादी हुई तो मौसी थीं तीस की और दीपक मौसाजी बीस के नीचे ही थे. दीपक मौसाजी अपनी भाभी पर बड़े फ़िदा थे, जबकि वो बड़ी तेज तर्रार थीं, सुना है कि उनसे जब अपनी भाभी से शादी के लिये पूछा गया तो उन्होंने तुरंत हां कर दी. लोग कहते हैं कि उनका पहले से ही लफ़ड़ा चलता था, वैसे गांव में ये अक्सर होता है. खैर शादी कर ली तो अच्छा हुआ. लफ़ड़े नहीं हुए आगे. वैसे दीपक मौसाजी बड़े फ़िदा हैं आभा मौसी पर, बिना उनसे पूछे कोई काम नहीं करते, एकदम जोरू के गुलाम हैं”

“होना भी चाहिये.” लीना तुनक कर बोली “अगर जोरू स्वर्ग की सैर कराती हो तो गुलाम ही बन कर रहना चाहिये उसका”

“जैसा मैं हूं रानी” मैं मुस्करा कर बोला.
लीना ने पलक झपका कर कहा “वैसे बड़ी तेज लगती हैं आभा मौसी. अब तो उमर के साथ और तीखी हो गयी होंगी. अगर दीपक मौसाजी को इतना काबू में रखती हैं तो फ़िर वहां क्या मजा आयेगा! दीपक मौसाजी को फंसाने का कोई चांस नहीं मिलेगा मुझे” लीना जरा नाराज सा हो कर बोली.

“डार्लिंग, चाहो तो कैंसल कर देते हैं. उनके बारे में मुझे ज्यादा मालूम नहीं है” मैंने कहा.

लीना एक मिनिट सोचती रही फ़िर बोली “नहीं कैंसल मत करो, गीता मौसी झूट नहीं बोलेंगी. मुझे आंख मारी थी उन्होंने जब ये कहा था कि दीपक मौसाजी के यहां हो आओ. जरूर मजा आयेगा वहां”

हम ट्रेन से दीपक मौसाजी के गांव पहुंचे. वे खुद स्टेशन पर हमें लेने आये. दीपक मौसाजी मझले कद के छरहरे बदन के थे पर बदन कसा हुआ था. कुरता पजामा पहने थे. काफ़ी गोरे चिट्टे हैंडसम आदमी थे. उनके साथ में दो नौकर भी थे, रघू और रज्जू. उन्होंने सामान उठाया. दोनों एकदम जवान थे, करीब करीब छोकरे ही थे, बीस इक्कीस के रहे होंगे. रघू छरहरे बदन का चिकना सा नौजवान था. रज्जू थोड़ा पहलवान किस्म का ऊंचा पूरा गबरू जवान था.

उन सब को देखकर लीना का मूड ठीक हो गया. मेरी ओर देखकर आंख मारी. मैं समझ गया कि मौसाजी, रघू और रज्जू को देखकर उसकी बुर गीली होने लगी होगी. क्या चुदैल है मेरी लीना! अच्छे मर्दों को देखकर ही उसकी चूत कुलबुलाने लगती है.

हम घर पहुंचे तो आभा मौसी दरवाजे पर खड़ी थीं. साथ में बीस एक साल उम्र की एक नौकरानी भी थी. मौसी ने हमारा स्वागत किया. “आ बहू, बहुत अच्छा किया कि तुम लोग आ गये. मैं तो कब से कह रही थी तेरे मौसाजी से कि शादी में नहीं गये तो कम से कम अनिल और बहू को घर तो बुलाओ. मैंने गीता से भी कहा था जब तीन चार महने पहले मिली थी.”

“अच्छा, गीता मौसी आयी थी क्या यहां?” मैंने पूछा.

“हां, वैसे वो कई बार आती है, इस बार भी अकेली ही आई थी. हफ़्ते भर रही. तब तेरे मौसाजी रज्जू के साथ बाहर गये थे, शहर में. राधा और रघू यहीं थे. ये है राधा, रघू की घरवाली. रज्जू की बहन है. रघू और रज्जू खेती का काम देखते हैं, राधा बिटिया घर का काम संभालती है” मैं मौसी की ओर देख रहा था. उमर हो चली थी फ़िर भी मौसी अच्छे खाये पिये बदन की थीं. सफ़ेद बालों की एक दो लटें दिखने लगी थीं. पूरी साड़ी बदन में लपेटी थी और आधा घूंघट भी लिया हुआ था इसलिये उनके बदन का अंदाजा लगाना मुश्किल था. वैसे कलाइयां एकदम गोरी चिकनी थीं.

राधा दुबले पतले छरहरे बदन की सांवली छोकरी थी, एकदक तीखी छुरी. मेरी ओर और लीना की ओर नजर चुराकर देख रही थी. हम घर के अंदर आये तो वो रसोई में चली गयी. जाते वक्त पीछे से उसकी जरा सी चोली में से उसकी चिकनी सांवली दमकती हुई पीठ दिख रही थी.

हमने चाय पी और फ़िर मौसी बोलीं “चलो, तुम लोग नहा धो लो, फ़िर आराम करो. शाम को ठीक से गप्पें करेंगे”हम कमरे में आये तो लीना मुझसे लिपट कर बोली “क्या मस्त माल है डार्लिंग!”

मैंने पूछा “किसकी बात कर रही हो?”

“अरे सबकी, सब एक से एक रसिया हैं. राधा तुमको कैसे देख रही थी, गौर किया? और वो रज्जू और रघू मेरी चूंचियों पर नजर जमाये थे. और तेरे मौसाजी भी बार बार मुझे ऊपर से नीचे तक घूर रहे थे पर मुझे जितना देख रहे थे उतना ही तुम पर उनकी निगाह जमी थी”

“अब तुम जान बूझ कर अपना लो कट ब्लाउज़ पहनकर अपनी चूंचियां दिखाओगी तो और क्या होगा. वैसे तुम ठीक कह रही हो, सब बड़े रसिया किस्म के लगे मुझको, पर मेरे को घूरने का क्या तुक है, पता नहीं क्या बात है”

“अरे आज शाम को ही पता चल जायेगा. मैं जरा भी टाइम वेस्ट नहीं करने वाली. और तुमको घूर रहे थे तो अचरज नहीं है, है ही मेरा सैंया ऐसा चिकना नौजवान” लीना मुस्करा कर मेरे गाल पुचकार कर बोली.

“पर वो आभा मौसी हैं ना, उनके सामने कुछ नहीं करना प्लीज़, जरा संभल कर छुपा कर सबसे …” मैंने हाथ जोड़कर कहा.

’अरे वो ही तो असली मालकिन हैं यहां की, तुमने गौर नहीं किया कैसे सब उनकी ओर देख रहे थे कि वो क्या कहती हैं. और उनकी उमर के बारे में मैं जो बोली थी वो भूल जाओ. इस उमर में भी मौसी एकदम खालिस माल हैं, यहां जो भी सब चलता होगा, वो उन्हींका किया धरा है, देख लेना, मेरी बात याद रखना”

मैं बोला “अरे ऐसा क्या देखा तुमने, मैं भी तो सुनूं. मुझे तो बस वे सीदी सादी महिला लगीं, साड़ी में पूरा बदन ढका था, सिर पर भी पल्लू ले लिया था. वैसे मैंने बहुत दिन में देखा है उनको, बचपन में एकाध बार मिला था, अब याद भी नहीं है”

“तुमको नहीं पता, मैं जब चाय के कप रखने को अंदर गयी थी तब उनका आंचल सरक गया था. तुम वो मोटे मोटे मम्मे देखते तो वहीं ढेर हो जाते. और वो राधा भी कम नहीं है, तुमको बार बार देख रही थी, लगता है तुम उसको बहुत भा गये हो, चलो, तुमको भी मजा आ जायेगा डार्लिंग” लीना मेरे लंड को सहलाते हुए बोली.

“तुमको कौन पसंद आया मेरी जान? तुमको तो सब मर्द और औरत घूर रहे थे” मैंने लीना के चूतड़ पकड़कर पूछा.

“मुझको तो सब पसंद आये, मैं तो हरेक मिठाई को चखने वाली हूं. पर हां, वो रज्जू काफ़ी मस्त मरद है, लगता है लंड भी अच्छा मतवाला होगा, रजत मौसाजी जैसा” लीना बोली.

“तुमको कैसे मालूम?”

“अरे जब मेरी चूंची को घूर रहा था तब मैंने देखा था. उसकी पैंट फ़ूल गयी थी और ऐसा लग रहा था जैसे पॉकेट में कुछ रखा हो. उसका जरूर इतना लंबा होगा कि उसके पॉकेट के पास तक पहुंचता होगा”

“मैं कुछ चक्कर चलाऊं?” मैंने उसे चूम कर कहा. लीना की मस्ती देखकर मुझे भी मजा आने लगा था. “उन सबके मस्त लंडों का इंतजाम करूं तुम्हारे लिये?”

“हां मेरे राजा, बहुत मजा आयेगा. वैसे तो मुझे लगता है कि कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ेगी, अपने आप सब शुरू हो जायेगा पर मौका मिले तो रज्जू को जरा इशारा दे कर तो देखो”
हमने नहाया और सफ़र की थकान मिटाने को कुछ देर सो लिये. मेरा मन हो रहा था लीना को चोदने का पर उसने मना कर दिया “अरे मेरे भोले सैंया, बचाकर रखो अपना जोबन, काम आयेगा, और आज ही काम आयेगा, मुझे तो हमेशा चोदते हो, अब यहां स्वाद बदल लेना”

मुझे यकीन नहीं था, कुछ करने का चांस हो तो भी एक दिन तो लगेंगे जुगाड़ को. फ़िर भी लंड को किसी तरह बिठाया और सो गया. शाम को सो कर उठा तो देखा लीना गायब थी. मैं बाहर आया. मौसी के कमरे से बातें करने की आवाज आ रही थी. मैं वहां हो लिया.

मौसी पलंग पर लेटी थीं. कह रही थीं “अब उमर हो गयी है लीना बेटी, मेरे पैर भी शाम को दुखते हैं. राधा दबा देती है, बड़ी अच्छी लड़की है, पता नहीं कहां गयी है”

“कोई बात नहीं मौसी, लाइये मैं दबा देती हूं” कहकर लीना मौसी के पैर दबाने लगी. मौसी मुझसे बोली “अरे अन्नू, मुझे लगता था कि तेरी ये बहू एकदम मुंहफ़ट होगी, शहर की लड़कियों जैसी. ये तो बड़ी सुगढ़ है, कितने प्यार से पैर दबा रही है मेरे. रुक जा बहू, मुझे अच्छा नहीं लगता, तू चार दिन के लिये आयी है और मैं तुझसे सेवा करा रही हूं”

मैंने कहा “तो क्या हुआ मौसी, आप तो मेरी मां जैसी हो, इसकी सास हो, फ़र्ज़ है इसका” मन में कहा कि मौसी, आप नहीं जानती ये क्या फ़टाका है, जरूर कोई गुल खिलाने वाली है नहीं तो ये और किसी के पैर दबाये! हां और कुछ भले ही दबा ले. फ़िर लीना की की बात याद आयी, मुझे हंसी आने लगी, मौसी भी कोई कम नहीं है, आज अच्छी जुगल बंदी होगी दोनों की.

लीना मेरी ओर देखकर बोली “तुम यहां क्या कर रहे हो, मैं मौसी की मालिश भी कर देती हूं, तुम घूम आओ बाहर. मौसाजी नहीं हैं क्या?”

मौसी बोलीं “अरे वे खेत पर होंगे रघू के साथ. तू घूम आ अन्नू. मिलें तो कहना कि खाने में देर हो जायेगी, आराम से आयें तो भी चलेगा, तू भी आना आराम से घूम घाम कर. ये राधा भी गायब है, वहां कही दिखे तो बोलना बेटे कि बजार से सामान ले आये पहले, फ़िर आकर खाना बना जाये, कोई जल्दी नहीं है. वो खेत पे घर है ना रघू का, वहीं होंगे तेरे मौसाजी शायद”

लगता था दोनों मुझे भगाने के चक्कर में थीं. मेरा माथा ठनका पर क्या करता. वैसे लीना की करतूत देखकर मुझे मजा आ रहा था, जरूर अपना जाल बिछा रही थी मेरी वो चुदक्कड़ बीबी. और मौसी भी कोई कम नहीं थी, बार बार ’बहू’ ’बहू’ करके लीना के बाल प्यार से सहला रही थी.

घर के बाहर आकर मैं थोड़ी देर रुका. फ़िर सोचा देखें तो कि लीना क्या कर रही है. अब तक तो पूरे जोश से अपने काम में लग गयी होगी वो चुदैल. मैं घर के पिछवाड़े आया. मौसी के कमरे की खिड़की बंद थी, अंदर से किसीकी आवाज आयी तो मैं ध्यान देकर सुनने लगा. लगता था मौसी और लीना बड़ी मस्ती में थीं.

“ओह …. हां बेटी …. बस ऐसे ही … अच्छा लग रहा है …. आह ….. आह ….. और जोर से दबा ना …… ले मैं चोली निकाल देती हूं …..हां … अब ठीक है”

“ऐसे कैसे चलेगा मौसी, ये ब्रा भी निकालो तब तो काम बने, ऐसे कपड़े के ऊपर से दबा कर क्या मजा आयेगा” लीना की आवाज आयी. “वैसे मौसी आप ब्रा पहनती होगी ऐसा नहीं लगा था मेरे को. गांव में तो …”

“बड़ी शैतान है री तू. मैं वैसे नहीं पहनती ब्रा पर आज पहन ली, सोचा शहर से बेटा बहू आ रहे हैं … मौसी को गंवार समझेंगे …”

“आप भी मौसी … चलिये निकालिये जल्दी”

“ले निकाल दी …. हा ऽ य … कैसा करती है री ….. आह …. अरी दूर से क्या करती है हाथ लंबा कर कर के, पास आ ना … बहू …. मेरे पास आ बेटी …. मुझे एक चुम्मा दे …. तेरे जैसी मीठी बहू मिली है मुझे …. मेरे तो भाग ही खुल गये …. आज तुझे जब से देखा है तब से …. तरस रही हूं तेरे लाड़ प्यार … करने को … और लीना बेटी जरा मुंह दिखाई तो करा दे अपनी … तू तो बड़ी होशियार निकली लीना … जरा भी वक्त नहीं लिया तूने अपनी मौसी की सेवा करने को … हा ऽ य … आह … ” मौसी सिसककर बोलीं.

लीना की आवाज आयी “अब आप जैसी मौसी हो तो वक्त जाया करने को मैं क्या मूरख हूं! और मुंह देखना है मौसी बहू का कि और कुछ देखना है? … ठहरिये मैं भी जरा ये सब निकाल देती हूं कि आप बहू को ठीक से देख सकें … ये देखिये मौसी …. पसंद आयी मैं आपको? … और लो आप कहती हैं तो पास आ गयी आप के … आ गयी आप की गोद में …अब करो लाड़ अपनी बहू के … जरा देखूं मैं आप को कितनी अच्छी लगती हूं … बड़े आग्रह से बुलाया है अपने गांव … अब देखें जरा बहू कितनी अच्छा लगती है आप को” फ़िर सन्नाटा सा छा गया, सिर्फ़ हल्की हल्की चूमा चाटी की आवाजें आने लगीं. मेरा लंड तन गया और मुझे हंसी भी आ गयी. लीना अपने काम में जुट गयी थी. मैं खेत की ओर चलने लगा. मौसाजी का खेत अच्छा बड़ा था, दूर तक फ़ैला था. दूर पर एक छोटा पक्का मकान दिख रहा था. मौसी शायद उसी मकान के बारे में कह रही थीं. मैं उसकी ओर चल दिया. वहां जाकर मैंने देखा कि दरवाजा बंद था. एक खिड़की थोड़ी खुली थी. उसमें से बातें करने की आवाजें आ रही थीं.

न जाने क्यों मुझे लगा कि दरवाजा खटखटाना या अंदर जाना ठीक नहीं होगा, कम से कम इस वक्त नहीं. मैं खिड़की के नीचे बरामदे में बैठ गया और धीरे से सिर ऊपर करके अंदर देखने लगा. फ़िर अपने आप को शाबासी दी कि दरवाजा नहीं खटखटाया.

दीपक मौसाजी पैजामा उतार के चारपाई पर बैठे थे और राधा उनका लंड चूस रही थी. रघू उनके पास खड़ा था, मौसाजी उसका खड़ा लंड मुठ्ठी में पकड़कर मुठिया रहे थे. “मस्त खड़ा है मेरी जान, और थोड़ा टमटमाने जाने दे, फ़िर और मजा देगा” वे बोले और रघू का लंड चाटने लगे. फ़िर उसको मुंह में ले लिया. रघू ने उनका सिर पकड़ा और कमर हिला हिला कर उनका मुंह चोदने लगा.

राधा मौसाजी का लंड मुंह से निकाल कर बोली “भैयाजी, देखो कितना मस्त खड़ा हो गया है, अब चोद दो मुझे” मौसाजी का लंड एकदम गोरा गोरा था और तन कर खड़ा था, ज्यादा बड़ा नहीं था पर था बड़ा खूबसूरत.

रघू बोला “भैयाजी को मत सता रानी, ठीक से चूस, और झड़ाना नहीं हरामजादी” राधा फ़िर चूसने लगी. उसने अपना लहंगा ऊपर कर दिया था और अपने हाथ से अपनी बुर खोद रही थी. मुझे उसकी काली घनी झांटें दिख रही थीं.

मौसाजी ने रघू का लंड मुंह से निकाला और बोले “अरे उसे मत डांट रघू, मैं आज चोद दूंगा उसको पहले, फ़िर गांड मारूंगा, बड़ी प्यारी बच्ची है, चूत भी अच्छी है पर गांड ज्यादा मतवाली है तेरी लुगाई की. अब तू पास आ और बैठ मेरे पास और चुम्मा दे”रघू मौसाजी के पास बैठ गया. मौसाजी उसका मुंह चूसने लगे. साथ साथ उसका लंड भी मुठियाते जाते थे. रघू ने अपना हाथ उनके चूतड़ों पर रखा और दबाने लगा. मौसाजी थोड़ा ऊपर हुए और रघू ने उनकी गांड में उंगली डाल दी. मौसाजी ऊपर नीचे होकर रघू की उंगली अपनी गांड में अंदर बाहर करने लगे और अपने हाथों में रघू का सिर पकड़कर उसकी जीभ और जोर जोर से चूसने लगे.

“चल रधिया उठ, भैयाजी की गांड चूस” रघू ने चुम्मा तोड़ कर राधा से कहा और फ़िर से मौसाजी से अपनी जीभ चुसवाने लगा. राधा उठी और बोली “खड़े हो जाओ भैयाजी, जरा अपनी गोरी गोरी गांड तो ठीक से दिखाओ”

मौसाजी और रघू एक दूसरे को चूमते हुए खड़े हो गये. राधा मौसाजी के पीछे जमीन पर बैठ गयी और उनकी गांड चाटने लगी. एक दो बार उसने मौसाजी के चूतड़ पूरे चाटे, फ़िर उनका छेद चाटने लगी. मौसाजी ने रघू को बाहों में भीच लिया और बेतहाशा चूमने लगे. दो मिनिट बाद अलग होकर बोले “अब डाल दे राजा”

“रधिया चल लेट खाट पर, फ़िर तेरे ऊपर भैयाजी लेटेंगे” रघू ने कहा.

राधा बोली “रुको ना जी, ठीक से चाटने तो दो, इतनी प्यारी गांड है भैयाजी की” और फ़िर मौसाजी के चूतड़ों के बीच मुंह डाल दिया.

मौसाजी बोले “हाय जालिम, क्या प्यार से चूसती है ये लड़की, जीभ अंदर डालती है तो मां कसम मजा आ जाता है. अब बंद कर राधा बेटी, बड़ी कुलबुला रही है”राधा उठ कर लहंगा ऊपर करके खाट पर लेट गयी. “भैया जी, आप की गांड तो लाखों में एक है, यहां गांव में किसी की नहीं होगी ऐसी, गोरी गोरी मुलायम, खोबे जैसी, मुझे तो बड़ा मजा आता है मुंह लगाकर. पर आप हमेशा टोक देते हो, अभी तो मजा आना शुरू हुआ था. किसी दिन दोपहर भर चाटूंगी आप की गांड. अब आप मरवाना बाद में, पहले मेरे को चोद दो आज ठीक से मालकिन की कसम, ऐसे बीच में सूखे सूखे ना छोड़ना हम को”

“अरी पूरा चोद दूंगा, पहले जरा अपनी जवानी का रस तो चखा दे, कितना बह रहा है देख” कहकर मौसाजी खाट पर चढ़कर राधा की बुर चूसने लगे. वो उनके सिर को अपनी चूत पर दबा कर कमर हिलाने लगी.

“क्या झांटें हैं तेरी राधा, मुंह डालता हूं तो लगता है किसी की ज़ुल्फ़ें हैं” मौसाजी मस्ती में बोले और फ़िर उसकी झांटों को चूमने लगे.

“होंगी ही भैयाजी, बाई ने दिया है, वो शैंपू से रोज धोती हूं और तेल लगाकर कंघी भी करती हूं.” राधा बड़े गर्व से बोली.

उधर रघू जाकर तेल की शीशी ले आया और अपने लंड में चुपड़ लिया. फ़िर राधा को बोला “जरा चूतड़ उठा तो” राधा ने कमर ऊपर की तो रघू उसकी गुदा में तेल लगाने लगा.

“अरे मेरी गांड में काहे लगाते हो? बाबूजी की गांड में लगाओ” राधा अपनी बुर मौसाजी के मुंह पर रगड़ते हुए बोली.

“उनकी गांड तूने तो चिकनी कर दी है ना चुदैल. ऐसे चूसती है जैसे गांड नहीं, मिठाई हो” रघू बोला.

“भैयाजी की गांड बहुत मस्त है राजा, मजा आता है चूसने में, और तुम भी तो रोज मारते हो, तुम्हारी मलाई का भी स्वाद आता है भैयाजी की गांड से” राधा इतरा कर बोली. “अब रुको थोड़ा, मेरा पानी निकलने को है” फ़िर वो अपनी टांगें मौसाजी के सिर के आस पास पकड़कर सीत्कारने लगी. “चोदो ना बाबूजी अब ….. चोद दो मां कसम तुमको …. हाय …. डालो ना अंदर भैयाजी”

“अरी दो मिनिट रुक ना, ये जो अमरित निकाल रही है अपनी बुर से वो काहे को है” कहकर मौसाजी जीभ निकाल निकाल कर राधा की पूरी बुर ऊपर से नीचे तक चाटने लगे. फ़िर खाट पर चढ़ गये और अपना लंड राधा की बुर में डालकर चोदने लगे. “ले रानी …. चुदवा ले …. और अपनी गांड को कह तैयार रहे …. अब उसी की बारी है …. रघू बेटे …. तू मस्त रख अपने सोंटे को …. बहुत मस्त खड़ा है … उसको नरम ना पड़ने दे … मेरी गांड बहुत जोर से पुकपुका रही है”रघू खड़ा खड़ा एक हाथ से अपने लंड को मस्त करने लगा और दूसरे हाथ की उंगली मौसाजी की गांड में डाल के अंदर बाहर करने लगा. “आप फ़िकर मत करो बाबूजी, आप की पूरी खोल दूंगा आज, बस आप जल्दी से इस हरामन को चोदो और तैयार हो जाओ”

मौसाजी कस कस के धक्के लगाने लगे. रघू ने अपना हाथ मौसाजी के पेट के नीचे से राधा की टांगों के बीच घुसेड़ा और उंगली से राधा के दाने को रगड़ने लगा. वो ’अं ऽ आह ऽ ….. उई ऽ …. मां ऽ ” कहती हुई कस के हाथ पैर फ़टकारने लगी और कसमसा कर झड़ गयी. फ़िर रघू पर चिल्लाने लगी “अरे काहे इतनी जल्दी झड़ा दिये मोहे …. बाबूजी मस्त चोद रहे थे …”

“तू तो घंटे भर चुदवाती रहती, बाबूजी गांड कब मारेंगे तेरी? चल ओंधी हो जा” रघू ने राधा को फ़टकार लगायी. वो पलट कर पेट के बल खाट पर सो गयी. “डालो बाबूजी, फ़ाड़ दो साली की गांड” रघू बोला.

मौसाजी तैश में थे, तुरंत अपना लंड राधा के चूतड़ों के बीच आधा गाड़ दिया.

“धीरे भैयाजी, दुखता है ना” राधा सीत्कार कर बोली.

रघू ने गाली दी “चुप साली हरामजादी, नखरा मत कर, रोज मरवाती है फ़िर भी नाटक करती है”

“बहुत टाइट और मस्त है मेरी जान, न जाने क्या करती है कि मरवा मरवा कर भी गांड टाइट रहती है तेरी” मौसाजी बोले और फ़िर एक झटके में पूरा लंड उन सांवले चूतड़ों के बीच उतार दिया.

“बाबूजी …. हा ऽ य …. आप का बहुत बेरहम है ….मुझे चीर देता है …. लगता है दो टुकड़े कर देगा …” राधा कसमसा गयी. फ़िर रघु को बोली “अरे ओ मेरे चोदू सैंया … आज बाबूजी की फ़ाड़ दे मेरी कसम …. तेरी बीबी की गांड रोज फ़ुकला करते हैं … आज इनको जरा मजा चखा दे”

मौसाजी मस्त होकर बोले “आ जा रघू बेटे … मार ले मेरी …. मां कसम आज बहुत कसक रही है”

“क्यों नहीं …. आज घर में नयी जवान जोड़ी आयी है ना … बहू भांजे की” राधा ने ताना मारा. रघू ने मौसाजी के चूतड़ चौड़े किये और अपना लंड धीरे धीरे उनके बीच उतारने लगा.

“आह … मजा आ गया …. ऐसे ही …. डाल दे पूरा मेरे राजा …. और पेल मेरे शेर” मौसाजी मस्ती में चहकने लगे.

“बाबूजी आज पूरा चोद दूंगा आप को … धीरज रखो …. ये लंड आप के ही लिये तो उठता है …. आप की खातिर मैं इस राधा को भी नहीं चोदता ….. आह … ये लो … अब सुकून आया?” रघू ने जड़ तक लंड मौसाजी के चूतड़ों के बीच गाड़कर पूछा.

“आहाहा … मजा आ गया …. वो बदमाश रज्जू भी होता तो और मजा आता …. कहां मर गया वो चोदू” दीपक मौसाजी कमर हिला हिला कर रघू का लंड पिलवाते हुए बोले.

“आपही ने तो भेजा उसको बजार. अभी होता तो आपके मुंह में लंड पेल देता बाबूजी, आप का मुंह ऐसे खाली नहीं रहता.” राधा बोली.

“भैयाजी, वैसे तो रज्जू बहूरानी को घूर रहा था दोपहर को, बहूरानी ने रिझा लिया है उसको” रघू बोला.

“हां लीना भाभी की चूंचियां देखीं होंगी ना उसने! तुमने नहीं देखा जी, क्या मस्त दिख रही थीं ब्लाउज़ के ऊपर से. मेरा तो मन मुंह मारने को हो रहा था” राधा पड़ी पड़ी गांड मरवाते हुए बोली.

“अरी ओ रधिया, मौसी से पूछे बिना कुछ लीना भाभी के साथ नहीं करना. मुंह मारना है तो मौसी के बदन में मार जैसे रोज करती है” रघू बोला, वो अब घचाघच दीपक मौसाजी को चोद रहा था.

“बाबूजी, आप चुप चुप क्यों हो, बहूरानी अच्छी नहीं लगी क्या” राधा बोली.

“अरे जरूर लगी होगी. पर अनिल भैया ज्यादा पसंद आये होंगे भैयाजी को, है ना भैयाजी?” रघू बोला.

मौसाजी कुछ कहते इसके पहले मैं वहां से चल दिया. मेरी इच्छा तो थी कि रुक कर सब कुछ देखूं पर मेरा लंड ऐसे सनसना रहा था कि रुकता तो जरूर मुठ्ठ मार लेता या अंदर जा कर उनमें शामिल हो जाता जो बिना लीना की अनुमति के मैं नहीं करना चाहता था. और रज्जू आ रहा था, दूर से खेत में दिख रहा था, उसकी नीली शर्ट से मैंने पहचान लिया. वो देख लेता तो फ़ालतू पचड़ा हो जाता. इसलिये बेमन से मैंने धीरे से खिड़की बंद की और चल दिया. रज्जू पास आया तो मुझे देखकर रुक गया और नमस्ते की.

मैंने पूछा “कैसे हो रज्जू? घर जा रहे हो लगता है?”

“हां भैयाजी. आप अकेले ही आये घूमने, भाभीजी को नहीं लाये?” उसने पूछा.

“वो मौसी के साथ है, मैं अकेला ही घूम आया. लगता है मौसाजी तुम्हारे घर पर ही हैं, रघू और राधा के साथ बातें कर रहे थे” मैंने कहा.

रज्जू कुछ नहीं बोला. नीचे देखने लगा.

“वैसे मैं अंदर नहीं गया, बस खिड़की से उनकी बातें सुनीं. तुम्हारा जिक्र कर रहे थे मौसाजी, बोले तुम भी होते तो अच्छा होता” मैंने मुस्करा कर कहा.

रज्जू मेरी ओर कनखियों से देख कर मुस्करा कर बोला “हां अनिल भैया, मौसाजी को बड़ी फ़िकर रहती है हम सब की. हम तीनों मिलकर उनकी सेवा करते हैं जैसी हो सकती है, आज मैं नहीं था तो नाराज हो गये होंगे. मैं जा कर देखता हूं”

“रज्जू, भई तुम्हारी लीना भाभी को खेत में घूमना है, पहली बार गांव आई है, उसको घुमा लाना कभी. गांव को हमेशा याद करे ऐसी खुश होनी चाहिये तेरी लीना भाभी” मैंने कहा.

“हां अनिल भैया, भाभी को तो ठीक से पूरा घुमा दूंगा. आप नहीं चलोगे घूमने? हम तो आप को भी घुमा देंगे आप का मन हो तो” रज्जू ने पूछा.

“हां, देखूंगा. मौसी से जरा पूछ लूं कि क्या प्रोग्राम है. पहले लीना को तो घुमा, ठीक से घुमाया तो मैं भी घूम लूंगा” मैंने उसकी ओर देखा और बोला.

रज्जू मुस्कराकर अच्छा बोला और अपने घर की ओर चल दिया. मैं गांव में घूमने निकल गया. सोचा घर पर लीना और मौसी का तो अभी चल रहा होगा, क्यों फ़ालतू डिस्टर्ब करूं. दो घंटे बाद वापस आया तो राधा खाना बना रही थी. मौसी और लीना बैठक में सोफ़े पर पास पास बैठी थीं. लगता है काफ़ी चूमा चाटी चल रही थी, क्योंकि जब मैं एक दो बार खांस कर बैठक में दाखिल हुआ तो दोनों एक दूसरे से सटी बैठी थीं और मुस्कराती हुई देख रही थीं. लीना का आंचल ढला हुआ था. ब्लाउज़ के दो बटन खुले थे. मुझे देख कर मौसी संभल कर बैठ गयीं. लीना बोली “अनिल, मौसी तो मुझे काम ही नहीं करने देतीं. यहीं बिठा कर रखा है. बड़ा प्यार करती हैं मुझे” फ़िर अपना आंचल बड़ी शोखी से ठीक करने लगी.

मौसी बोली “अरे शाम को कितना काम करवाया तुझसे, इतनी सेवा की तूने मेरी. अनिल, तेरी ये बहू सच में बड़ी अच्छी है. कुछ घंटे में ही दिल जीत लिया मेरा. तू कहां हो आया?”

“मौसी खेत वाले घर पर गया था. मौसाजी काम में थे, रघू और राधा के साथ. इसलिये रुका नहीं, चला आया.”

“अरे तू भी उनकी मदद कर देता. रज्जू नहीं था क्या” मौसीने पूछा.

“वैसे उन तीनों का काम ठीक ठाक चल रहा था इसलिये बस बाहर से देखकर चला आया मौसी. बाद में घर को जाते वक्त दिखा था रज्जू. बोल रहा था कि मौसाजी राह देख रहे होंगे”

“मुझे लगा कि तू भी उनसे गपशप में भिड़ गाया होगा” मौसी शैतानी से मुस्कराकर कर बोलीं. मुझे यकीन हो गया कि उनको पता था कि वहां क्या चलता है और मुझे जान बूझ कर देखने को भेजा था.

“करने वाला था मौसी, फ़िर सोचा कि वे काम में हैं, मैं भी अभी यहां बिलकुल नया हूं, इसलिये थोड़ी देर बगीचा देखा और चला आया” मैंने बात बना दी.

“हां, ये राधा भी देरी से आयी आज. खाने में इसलिये देर हो गयी, खैर अब खाना खाकर सो जाना, तुम लोग थके होगे लंबे सफ़र से”

मौसाजी वापस आये तो मौसी उनके कमरे में चली गयीं. मैंने मौका देख कर लीना को सब बता दिया जो जो देखा था. सुनकर लीना अपनी टांगें आपस में घिसने लगी. “अब आयेगा मजा अनिल. ये सब महा चोदू लोग हैं. मौसी के साथ मैंने क्या मस्ती की आज शाम को मालूम है? बड़ी चालू हैं वो, तुम्हारे जाने के बाद एक मिनिट वेस्ट नहीं किया, सीधा मुझे ले लिया”कैसी हैं मौसी? मजा आया” मैंने पूछा.

“अरे माल है माल, खालिस गांव का माल. पर मुझे ज्यादा चखने का मौका ही नहीं दिया मौसीने, बस एक बार मुंह मारने दिया, फ़िर मेरी चखने के पीछे पड गयीं. कहती थीं कि क्या गरम जवानी है तेरी लीना, पहले मुझे मन भर के चख लेने दे”

तभी राधा खाने पर बुलाये आयी. हमने खाना खाया. राधा परोस रही थी. परोसते परोसते बार बार उसका आंचल गिर जाता. उसकी चोली में से उसके मचलते हुए छोटे छोटे पर सख्त मम्मे और उनकी घुंडियां दिख रही थीं. मुझे देख कर हंस देती और कभी अपनी जीभ अपने होंठों पर फ़ेरने लगती. लीना ने भी देखा पर बस मेरी ओर देखकर आंख मार दी कि लो, माल तैयार है तुम्हारे लिये.

खाने के बाद में राधा साफ़ सफ़ायी करके वहीं गुटियाती रही. शायद जाना नहीं चाहती थी.

“राधा तू अब जा. कल आना. और वो रघू और रज्जू को बोल दे कि आज कोई काम नहीं है, आराम करें. कल बहुत काम है. बोल देना कि मालकिन ने कहा है, समझी ना? कहना सो जायें जल्दी आज रात को, तू भी आराम कर लेना, कल जरूरत पड़ेगी. समझ रही है ना मैं क्या कह रही हूं?” मौसी ने डांट कर पूछा.

राधा थोड़ी निराश दिखी. वह शायद रहना चाहती थी. फ़िर मौसी ने उसके कान में धीरे से कुछ कहा तो उसका चेहरा खिल उठा. काम खतम कर के वह चल दी.

कुछ देर हम गपशप करते रहे, फ़िर दस बजे हम सब सोने चले गये. मौसी ने ही कहा कि गांव में सब जल्दी सोते हैं. हमारा कमरा मौसी के कमरे से लगा था. बीच में दरवाजा भी था, गांव के घरों जैसा. मेरा लंड कस के खड़ा था, कमरे में घुसते ही मैं लीना पर चढ़ गया. पर उसने चोदने नहीं दिया, बोली “अरे रुको ना, जरा सबर रखो. क्या इसी लिये मुझे यहां लाये हो अकेले चोदने को? फ़िर बंबई और यहां क्या फरक हुआ?”

“अरे धीरे बोलो रानी, वहां मौसी सुन लेगी” मैंने कहा.

“इसीलिये तो बोल रही हूं. मौसाजी मौसी वहां और हम यहां, कुछ जमता नहीं अनिल” लीना शोखी से आवाज चढ़ा कर बोली, फ़िर मुझे आंख मार कर चुप हो गयी.

मौसी और मौसाजी के बात करने की आवाज आ रही थी.

“क्योंजी, खेत के घर पे मजा कर के आये हो लगता है तभी सोने की फिराक में हो. और यहां मेरी आग कौन बुझायेगा?” मौसी बोलीं.

“अरे आभा रानी, तेरी आग कभी बुझी है जो अब बुझ जायेगी? चल आजा, टांगें खोल के लेट जा, चूस देता हूं. तेरा रस चखने को तो मैं हमेशा तैयार रहता हूं, मेरे को तो तू बचपन से चखाती आयी है” मौसाजी बोले. एक दो मिनिट बस चूमा चाटी की आवाज आ रही थी. फ़िर मौसी तुनक कर बोलीं “अरे ठीक से चूसो ना मेरे सैंया ….. तुम तो बस राधा की चूसते हो ठीक से, वो जवान लड़की है, मैं तो अब बुढ्ढी हो गयी हूं ना …. पहले तो भाभी करके कैसे पीछे पड़े रहते थे … स्कूल से आते ही मुंह लगा देते थे … हाय …. आह … हां ये हुई ना बात …और थोड़ा मुंह में लो …हां अब ठीक है”

“अरे नहीं मेरी रानी, बूढ़ी होगी तेरी सास, तेरी चूत तो एकदम जवान है, बहुत मजेदार है मां कसम, और ये मोटे मोटे चूतड़ तेरे, हाय मजा आ जाता है.” मौसाजी की आवाज आयी. “चल, तेरी गांड मार दूं? मस्त मारूंगा”

“अरे तुम तो बस गांड के पीछे लगे रहते हो, मेरी बुर का तो खयाल ही नहीं रहता तुमको.” मौसी हुमक कर बोली. “अरे तेरी बुर के दीवाने भी तो हैं, वो रज्जू और रघू तो पुजारी हैं इसके. इसीलिये तो रखा है उनको. और वो राधा भी तो मरती है तेरे पे, उससे चुसवाती हो वो अलग”

“तो जैसे तुमको तो कुछ लेना देना ही नहीं है रघू और रज्जू से. आज शाम को क्या कर आये, मैं भी तो सुनूं जरा. वैसे आज तुमको नहीं डांटूंगी. आज शाम को तो मेरे को भी मजा आ गया. लीना बिटिया ने क्या चूसी थी मेरी …. इतना पानी निकाला था ….”

“अच्छा, शुरू हो गया तुम्हारा? चलो अच्छा हुआ. मैं वोही सोच रहा था, बड़ी सुंदर कन्या है. और वो अनिल भी कम नहीं है” मौसाजी बोले. “तेरे तो वारे न्यारे हैं अब”

“और तुम्हारे नहीं हैं? मुझसे नहीं छुपा सकते तुम. वैसे बाजू वाले कमरे में ही हैं दोनों. अब तक तो दो बार चोद चुके होंगे, आखिर जवान हैं” मौसी जोर से बोलीं जैसे जानबूझकर हमें सुनाना चाहती हों.

लीना सुन रही थी. मेरी ओर देख कर हंसी और जोर से बोली बोली “अनिल …. अभी मत चोदो राजा …. रुक जाओ … ऐसे ही चूसते रहो ….. मौसी की याद आ रही है … मौसी की बहुत प्यारी चूत है …. सच ….. तुम देखो तो दीवाने हो जाओगे”

मैंने जोर से कहा “मौसाजी का लंड भी जोरदार होगा रानी …. तभी मौसी इतनी खुश लगती हैं”

“अरे … ऐसा मत कहो अनिल …. मेरी चूत कुलबुलाने लगती है … वो चोद रहे होंगे मौसी को ….अकेले अकेले …. अरे मौसी को थोड़ा तो खयाल … करना था अपनी बहू का … यहां अकेले में वो कैसे तड़प रही होगी ….” लीना शैतानी से और जोर की आवाज में बोली.

दो मिनिट की चुप्पी के बाद मौसी अपने कमरे से चिल्लाई “अनिल ओ अनिल … लीना बेटी … वहां क्या कर रहे हो अकेले, आ जाओ इधर अपने मौसाजी मौसी के पास”लीना तो राह ही देख रही थी. मेरा हाथ पकड़ा और मौसी के कमरे में घुस गयी “लो मौसी, मैं यही सोच रही थी कि आपने अब तक बुलाया क्यों नहीं”

मौसी नंगी होकर टांगें फ़ैलाकर बिस्तर पर सिरहाने से टिक कर बैठी थीं और मौसाजी उनके सामने झुक कर उनकी बुर चाट रहे थे. अच्छी गोरी मोटी मोटी टांगें थीं मौसी की और मस्त पिलपिली लटकती हुई चूंचियां.

मौसी बोलीं “अरी तुझे बुलाने की क्या जरूरत है, तू खुद चली आती. वैसे मेरे को इस अनिल के बारे में पता नहीं था, सोच रही थी कि ये क्या सोचेगा कि मौसी इतनी चालू निकली”

“अरे मौसी, ये तो कब से आप पे आस लगाये बैठा है. आने के बाद मुझे बोल रहा था कि मौसी के मम्मे तो देखो, लगता है पपीते हैं पपीते, रस भरे. शाम को मैंने बताया कि मैंने कैसे आपकी सेवा की तो नाराज होकर बोला कि अकेले अकेले मौसी का माल चख लिया, मुझे भी चखा देतीं”

मौसी मेरी ओर देख कर बोलीं “तो अब आ जा बेटे, बहुत सारा माल है तेरी मौसी के पास. तुझे नहीं दूंगी तो किसे दूंगी! सुनो जी, तुम हटो अब और अनिल को चखने दो”

“हां मौसाजी, आप तो रोज पाते हो ये प्रसाद. आज मेरी और अनिल की बारी है” लीना पलंग पर चढ़ गयी और मौसी के मम्मे दबाते हुई उनके चुम्मे लेने लगी. मौसाजी हट गये और बोले “आओ अनिल, तुम भी पा लो मौसी का प्रसाद. मैं तो कब से पा रहा हूं” वे अब लीना के नंगे गदराये बदन को देख रहे थे. “वैसे तेरी बहू भी मस्त है अनिल, एकदम अप्सरा है अप्सरा. मैं तो देख कर ही खलास हो गया था, कि क्या सुंदर बहू पायी है अनिल ने. तेरे पिछले जनम के पुण्य होंगे बेटे, जैसे मेरे हैं, मुझे भी तो अपनी भाभी मिल गयी थी बचपन से”

“अरे तो ऐसे दूर से क्या देख रहे हो? पास आओ और स्वाद लो, बहू मना थोड़े करेगी. क्यों लीना बेटी?” मौसी लीना के मम्मे दबाते हुए बोलीं.

“हां मौसाजी, आइये ना, आप का तो हक है, आखिर आप की बहू हूं. ये लीजिये” कहकर लीना ने टांगें पसार दीं. मौसाजी टूट पड़े और उसकी बुर में मुंह डाल कर चाटने लगे. मैं मौसी की टांगों में घुस गया और उनकी बुर का स्वाद लेने लगा.

मौसाजी लपालप लीना की बुर चाट रहे थे. फ़िर उंगली से उसकी चूत खोलकर जीभ अंदर डाल दी. लीना बोली “मौसाजी शौकीन लगते हैं मौसी, देखो कैसे मेरी बुर में अंदर तक जीभ से टटोल रहे हैं”

“अरे तेरे जोबन को पूरा चखना चाहते हैं. ऐसा जोबन सबके नसीब में नहीं होता. और तेरा ये अनिल भी कम नहीं है, ये तो पूरा मुंह अंदर डालने की कोशिश कर रहा है.” मौसी मेरे सिर को पकड़कर अपनी चूत में दबाकर बोलीं.

“ठीक ही तो कर रहा है मौसी, इतना गाढ़ा जायकेदार बुर का रस सब को थोड़े मिलता है” लीना बोली फ़िर सिर झुकाकर मौसी की चूंची चूसने लगी. मैंने और मौसाजी ने खूब देर तक दोनों औरतों का रस निकाला. आखिर मौसी ने मुझे पकड़कर अपने ऊपर खींचा और बोलीं “बस कर अनिल बेटे, कितना चूसेगा! अब जरा चोद, कब से मरी जा रही हूं तेरा ये मस्त लंड लेने को. देख कैसा तन कर खड़ा है. लीना, तेरे को तो बहुत मजा देता होगा अनिल का ये लंड, देख कितना जानदार है”

“हां मौसी, जम के चोदता है मुझे, मैंने भी डांट डपट कर रखा है इसे, मुझे तसल्ली दिये बिना झड़ जाये ये बिसात नहीं इसकी”

मैंने मौसी की बुर में लंड डाल दिया और चोदने लगा. चूत ढीली थी पर एकदम तपती हुई मखमली म्यान थी. उधर मौसाजी लीना की बुर चूसते हुए उसकी गांड में उंगली करने की कोशिश रहे थे.

लीना उनका हाथ झटक कर बोली “ये क्या करते हो मौसाजी, चोदना हो तो ऐसे आओ ऊपर, गांड के पीछे क्यों पड़े हो”

“लीना रानी, क्या गांड है तेरी … एकदम फ़र्स्ट क्लास … मारने दे ना” मौसाजी मचल कर बोले.

“गांड तो नहीं मरवाऊंगी मैं मौसाजी, हां चोद लो ना, देखो कैसा मस्त खड़ा है आपका लंड. वैसे मेरे खयाल से और जोर से खड़ा होता होगा, इतना मस्त है, बहुत दमखम वाला लगता है पर आज लगता है थोड़ा दम कम है उसमें” लीना बोली.

“अरे बेटी, मैंने इनको कहा था कि जरा सबर रखो, बहू आने वाली है, उसके लिये अपनी मस्ती बचा कर रखो पर ये मेरा देवर … वैसे अब मेरा आदमी है महा चोदू, सुनता थोड़े ही है, मस्ती करके आया होगा शाम को. कोई बात नहीं, तू कल देख लेना कैसा तन कर खड़ा होता है.” मौसी बोलीं फ़िर मेरा चुम्मा लेने लगीं. मैं उनकी जीभ चूसने लगा.

मौसाजी लीना पर चढ़ गये और उसकी चूंचियां दबाने लगे. “वाह … क्या मम्मे हैं तेरे लीना …. ठोस कड़ा माल है …. अनिल दबाता नहीं क्या …. मैं होता तो मसल मसल कर पिलपिला कर देता तेरी मौसी की कसम, उसके भी कच्चे आम जैसे थे, अब देखो कैसे पपीते बना दिये मैंने”

लीना को मस्ती चढ़ी थी, उसने खुद ही दीपक मौसाजी का लंड चूत में लगा दिया और बोली “अब डाल दो जल्दी मौसाजी, आप की बहू बहुत बेताब है आपका लाड़ प्यार पाने को” और कस के उनको बाहों में जकड़ कर चूमने लगी.

मौसाजी ने एक झटके में लंड गाड़ दिया और चोदने लगे. “बहुत मस्त चूत है तेरी लीना …. गांड भी मतवाली होगी ….. आज तो तूने नहीं मारने दी …. पर मारूंगा जरूर … आह …. मेरी रानी …. मेरा लाड़ो … क्या जवानी है तेरी”लीना बोली “अनिल ….बहुत मस्त चोद रहे हैं मौसाजी … धक्का मारते हैं तो अंदर पेट तक जाता है लंड … तुम मौसी को ठीक से चोदो …. कल से प्यासी है उनकी बुर …. और उनके मुंह की चासनी बहुत चख ली …. जरा मम्मे को मुंह में लेकर देखो … एकदम डबल रोटी है”

मैंने कहा “पर मौसाजी तो रोज चोदते होंगे मौसी को …. उनकी बुर को प्यासा नहीं रखते होंगे” फ़िर मैंने सिर झुकाकर मौसी का एक मोटा खजूर सा निपल मुंह में ले लिया”

“अरे तेरे मौसाजी तो गांड के पीछे ज्यादा रहते हैं … गांड मारने को हमेशा तैयार रहता है ये बदमाश देवर मेरा, पर है बड़ा चोदू … तभी तो शादी कर ली मैंने इससे …. चोदने को बोलो तो ना नुकुर करता है … अरे अनिल बेटे … ऐसे क्या जरा सा निपल मुंह में ले कर चूस रहे हो … पूरा मम्मा मुंह में ले लो अपने … तूने कभी ऐसा माल नहीं मुंह में लिया होगा” कहकर मौसी ने आधे से ज्यादा चूंची मेरे मुंह में ठूंस दी”

“झूट मत बोलो भाभी …. मेरा मतलब है आभा रानी … तुम को रोज चोदता हूं मैं …. अब तुम्हारी गांड इतनी मोटी ताजी है तो मैं क्या करूं … किसी का भी मन होगा मारने को और जब तुम्हारा देवर था मैं तब कितने प्यार से रिझाती थीं मेरे को गांड दिखा दिखा कर” मौसाजी हचक हचक कर लीना को चोदते हुए बोले.

इसी तरह गप्पें लड़ाते हुए हमने दोनों चुदैलों को मन भर के चोदा. दोनों दो तीन बार झड़ीं. आखिर मैं और मौसाजी भी झड़ गये और वहीं मौसी और लीना के बदन पर पड़े पड़े सुस्ताने लगे.

पांच मिनिट के आराम के बाद मौसी बोलीं “मजा आ गया अनिल बेटे … लीना … तू चुदी या नहीं ठीक से? इनका कोई भरोसा नहीं, आज कल तेरे मौसाजी गांड ज्यादा मारते हैं, लगता है कहीं चोदने की कला भूल न जायें”

लीना बोली “हां मौसी … बहुत प्यार से चोदा मौसाजी ने ….वैसे मेरा मन कभी नहीं भरता … अनिल जानता है …. मैं तो यहां हूं तब तक दिन रात चुदवाऊंगी … मौसाजी आप लंड को तैयार रखो अपने … उसको कहना बहू की खातिर में कमी नहीं आनी चाहिये”

मौसाजी बोले “लीना बेटी … तू फ़िकर मत कर … यहां लंडों की कोई कमी नहीं है … कल से देख … तुझे खुश कर दूंगा … इतना चुदेगी कि तेरी चूत एकदम ठंडी हो जायेगी””अब तुम दोनों हटो और मुझे और लीना को जरा प्यार मुहब्बत करने दो” मौसी मुझे अपने बदन से ढकेलते हुए बोलीं. उधर मौसाजी लीना पर से उतरे और उधर मौसी उससे लिपट गयीं. लीना पर उलटी ओर से चढ़ कर उन्होंने अपनी चूत लीना के मुंह में दे दी और खुद लीना की टांगें फ़ैलाकर उसकी बुर चाटने लगीं.

“मौसी ये क्या कर रही हैं? अभी मन नहीं भरा क्या अनिल से चूत चुसवाकर?” लीना बोली.

“बेटी, ये अलग स्वाद है, ले कर देख, चुदी बुर चाटने का मजा ही और होता है. तू भी जानती है, नाटक कर रही है” मौसी बोलीं.

“हां मौसी …. मैंने बहुत बार किया है …. मैं तो मजाक कर रही थी …. जाना पहचाना स्वाद लग गया है आप की बुर में …. मेरे अनिल डार्लिंग का” लीना चटखारे ले कर बोली.

मैं और मौसाजी बाजू में बैठकर दोनों औरतों के कारनामे देखने लगे. मौसी का मोटा शरीर लीना के जवान तन से लिपटा था, लीना की सुडौल कसी हुई जांघें मौसी के सिर को पकड़े थीं और मौसी की मोटी मोटी थुलथुली टांगें लीना के सिर को कस के जकड़े थीं. दोनों लपालप चाट रही थीं जैसी कब की भूखी हों.

मेरा लंड सिर उठाने लगा. मौसाजी मेरे लंड को देखने लगे “अनिल … तुझमें तो काफ़ी जोश है लगता है … इतनी जल्दी सिर उठाने लगा तेरा ये मूसल”

“मौसाजी, जब ऐसी चुदैल मतवाली औरतें आपस में ऐसे करम कर रही हों तो किसीका भी खड़ा हो जायेगा.” कहकर मैं लंड हाथ में लेकर मुठियाने लगा.

मौसी लीना की चूत से मुंह निकाल कर चिल्लाई “अरे सुनते हो, ये क्या तमाशा है? तुमको शोभा देता है क्या? यहां हम सास बहू इतने मजे कर रहे हैं और उधर तुम्हारा भतीजा सूखा सूखा बैठा है. जरा उसकी मदद करो. तुम लोग भी आपस में कुछ करो, हमसे जरा सीखो”

मौसाजी मेरे पास सरके और मेरा लंड हाथ में ले लिया. “एकदम मस्त है तेरा लौड़ा अनिल. लीना को मजा आता होगा. गांड भी मारते हो क्या उसकी?” “बस कभी कभी मौसाजी, वैसे बड़ी जालिम है, हाथ भी नहीं लगाने देती…. हां …. अच्छा लग रहा है मौसाजी … मस्त कर रहे हैं आप” मैं ऊपर नीचे होकर मौसाजी की मुठ्ठी में लंड को पेलते हुए बोला.

“अच्छा लगा ना? फ़िर थोड़ा और मस्त कर देता हूं तुझे, देख” कहकर मौसाजी झुके और मेरा सुपाड़ा मुंह में लेकर चूसने लगे. मैं ऊपर नीचे होने लगा “आह … ओह… मौसाजी ….. क्या बात है …. ऐसा तो लीना भी नहीं चूसती”

मौसी बोलीं “अब देखो कितना खुश है अनिल. यही तो मैं तुमसे कह रही थी कि अनिल का खयाल रखो. अनिल बेटे, तेरे मौसाजी बड़े शौकीन हैं इस चीज के”

लीना मौसी की चूत में से मुंह उठा कर चिल्लायी “अनिल … मौसाजी तुमको इतना सुख दे रहे हैं और तुम वैसे ही बैठे हो. जरा उनकी भी सेवा करो.”

मैं बोला “हां मौसाजी, बात तो ठीक है. मुझे भी मौका दीजिये”

मौसाजी लेटते हुए बोले “ठीक है अनिल, यहां मेरे बाजू में आ जाओ”

मैं मौसाजी के बाजू में उलटा लेट गया और उनका आधा खड़ा लंड हथेली में लेकर सहलाने लगा. फ़िर जीभ से उसको ऊपर से नीचे तक चाटने लगा. मौसाजी बोले “आह … बहुत अच्छे अनिल … ऐसा ही कर” और फ़िर मेरा लंड पूरा निगल कर चूसने लगे. मैंने भी उनका लंड मुंह में ले लिया और जीभ रगड़ रगड़ कर चूसने लगा. मौसाजी ने मेरे चूतड़ पकड़े और सहलाने लगे. फ़िर मेरा गुदा रगड़ने लगे. मैंने उनके चूतड़ दबाये, बड़े मुलायम और चिकने चूतड़ थे. फ़िर गांड में उंगली डाल दी, आराम से अंदर चली गयी, मैंन सोचा बहुत अच्छे मौसाजी, मरवा मरवा कर अच्छी खुलवा ली है आपने अपनी गांड.

मौसाजी और कस के मेरा लंड चूसने लगे और मेरी गांड में अपनी उंगली डाल दी. हम दोनों एक दूसरे की गांड में उंगली करते हुए लंड चूसने लगे.

“मौसी देखो क्या प्यार दुलार चल रहा है मौसा भतीजे में” लीना बोली.

“चलो अच्छा हुआ, मैं भी कहूं कि यहां सास बहू में जब संभोग चल रहा है तो ये लोग क्यों ऐसे बैठे हैं. अब देखना कैसे लंड खड़े होते हैं दोनों के” मौसी लीना के मम्मे दबाते हुए बोलीं. “मौसी, चलो मजा आ गया, मैं तो अब और चुदवाऊंगी” लीना बोली. मौसी बोलीं “मैं तो बस चूत चुसवाऊंगी बहू, वो भी तुझसे. तू बहुत प्यार से चूसती है”

“आ जाओ, कौन आता है मेरी चूत चोदने?” लीना बोली तो मौसाजी तपाक से उठ बैठे. “मैं आता हूं लीना रानी, तू गांड तो मारने नहीं देगी आज, फ़िर तेरी चूत ही सही, बड़ी मस्त टाइट है”

लीना नीचे लेट गयी. मौसी उसके मुंह पर बैठ कर अपनी बुर चुसवाने लगीं. मौसाजी लीना पर चढ़ बैठे और चोदने लगे. काफ़ी जोश में थे, मेरे लंड चूसने से उनको मजा आ गया था और लंड में काफ़ी जान आ गयी थी. चोदते चोदते वे आभा मौसी से चूमा चाटी कर लेते या झुक कर उनके मम्मे चूसने लगते, मौसी लगातार आगे पीछे होकर अपनी बुर लीना के मुंह पर घिस रही थीं.

“अब मैं क्या करूं? किसको चोदूं? वैसे मेरा भी मन हो रहा है किसीकी गांड मारने का, लीना तो मारने नहीं देगी. मौसी आप जरा ऐसी सरक लें तो …” मैंने कहा. मौसी तपाक से बोलीं “आज नहीं बेटे, ये तेरे मौसाजी रोज मारते हैं मेरी, आज नहीं मरवाऊंगी, आज मेरी गांड को आराम कर लेने दो”

मौसाजी मुड़ कर बोले “अनिल, अगर सच में गांड मारने का मूड है तेरा तो तू मेरी मार ले”

“मौसाजी, आप को चलेगा? मुझे अजब सा लगता है कि आप की गांड मारूं” मैंने पूछा.

“चलेगा क्या दौड़ेगा! इतना मस्त लंड है तेरा, मेरी तो गांड कब से कुलबुला रही है लेने को. लीना कह ना अनिल से कि मेरी मार ले, तेरा कहना नहीं टालेगा” मौसाजी ने लीना से गुहार की.

लीना कमर उचका उचका कर चुदवाते हुए बोली “अरे मान जाओ ना, तुम भी तो शौकीन हो गांड के. और मौसाजी की भी कम नहीं है, मस्त है. देखा ना कैसी गोरी गोल मटोल गांड है”
“मैं कहां मना कर रहा हूं? मेरा तो खुद मन हो रहा है” मैंने कहा “मैं तो इसलिये कह रहा था कि तुम लोगों को अटपटा न लगे. वैसे मौसाजी की गांड है मतवाली, मस्त गुदाज चूतड़ हैं. मारने में मजा आयेगा” कहकर मैंने वहां पड़ी तेल की शीशी खोल कर तेल लेकर मौसाजी के छेद में लगाया और उनपर चढ़ गया. “लीना रानी, जरा खोल मौसाजी की गांड, फ़िर डालूंगा अंदर”

“ये लो” कहकर लीना ने मौसाजी के चूतड़ पकड़कर फ़ैलाये और मैंने सुपाड़ा उनके छल्ले के पार कर दिया.

“आह … मजा आ गया … क्या खड़ा है तेरा अनिल … लोहे की सलाख जैसा … तेरे सुपाड़े ने तो चौड़ी कर दी मेरी अच्छे से” मौसाजी बोले. “अभी तो कुछ नहीं हुआ मौसाजी, अब देखो” कहकर मैंने लंड पूरा पेल दिया. सट से वो उनकी गांड में उतर गया.

“हां … ओह ….. क्या माल है तेरा अनिल ….. आज तसल्ली मिलेगी मेरी गांड को ….. बहुत तकलीफ़ देती है साली …. अब मार अनिल … जम के मार” कहते हुए उन्होंने गांड सिकोड़ कर लंड को पकड़ लिया और कमर हिला कर मरवाने की कोशिश करने लगे.

“आप तो लीना को चोदो मौसाजी, फ़िकर मत करो, मैं पूरी मार दूंगा आप की. आप लीना का खयाल रखो, कस के कूटो उसकी बुर को, उसको मजा आना चाहिये. आपको मजा मैं दूंगा. वैसे बहुत अच्छा लग रहा है आप की गांड मार कर, वाकई बड़ी गरम है आप की गांड” कहकर मैं उनकी पीठ पर लेट गया और उनको पकड़कर घचाघच गांड मारने लगा. मौसाजी ने भी लीना को चोदना शुरू कर दिया.

मौसी थोड़ा उठ कर मौसाजी की ओर पीठ करके फ़िर से लीना के मुंह पर बैठ गयीं और झुक कर लीना के मुंह पर चूत रगड़ कर अपने चूतड़ हिलाते हुए बोलीं “लो, अब तुम भी मुंह मार लो, तुमको अच्छी लगती है ना मेरी गांड, फ़िर चूसो, उसको मना नहीं करूंगी मैं”

मौसाजी ने मौसी की गांड को मुंह लगा दिया. हम सब अब उछल उछल कर घचाघच चुदाई करने लगे. मैं धक्के लगाता हुआ बोला “वाह मौसाजी …. इतनी मस्त गांड बहुत दिनों में नहीं मारी …. आप तो छुपे रुस्तम निकले ….. अब तो रोज मारूंगा कम से कम एक बार ….. नहीं तो मन नहीं भरेगा”

“अर तू जितनी चाहे उतनी मार …. तुझे जब चाहिये मैं दूंगा अपनी …. और अगर तू शौकीन है इस बात का … तो बहुत मजा आयेगा तुझे हमारे यहां…. बस देखता जा …. मां कसम क्या गांड मारता है तू, मजा आ गया…. अब और मार … जोर से मार …. घंटा भर चोद मेरी गांड ….” मौसाजी हांफ़ते हुए बोले.

“नहीं मौसाजी … मैं नहीं मार पाऊंगा … इतनी देर…. याने इतनी प्यारी गांड है आपकी …. मैं तो झड़ने वाला …… ओह … आह …आह” कहता हुआ मैं जल्दी ही झड़ गया. मौसाजी झड़े नहीं थे, वे हचक हचक कर चोदते रहे. लीना दो बार झड़ गयी थी. बोली “मौसाजी, अब रुको, लंड बाहर निकालो”

“क्यों मेरी जान, मजा नहीं आया, मुझे ठीक से चोदने तो दे, बड़ा मजा आ रहा है”

“अरे अनिल ने इतनी ठुकाई की आपकी, उसको तो थोड़ा इनाम दो, अपना लंड चुसवा दो उसको, आप की गांड का स्वाद तो ले चुका है, अब आपकी मलाई खिला दो” लीना बोली.

मौसाजी झट से उठे और मेरा सिर अपनी गोद में लेकर अपना लंड मेरे मुंह में डालने लगे. लीना उठ कर उनके पीछे आयी और बोली “जरा लेटो मौसाजी, ठीक से चुसवाओ अनिल को, और अपनी गांड मेरी ओर करो””तू क्या करेगी रे उसका? खेलेगी” मौसाजी ने पूछा और फ़िर मेरे मुंह में लंड डाल दिया. लंड तन कर खड़ा था और रसीले गन्ने जैसा लग रहा था. मैं चूसने लगा.

“नहीं मौसाजी, चूसूंगी, आप जैसी गांड तो औरतों को भी नसीब नहीं होती. अब जरा अपने चूतड खोल कर रखो और मुझे जीभ डालने दो.” लीना उनके पीछे लेटते हुए बोली.

मैंने मौसाजी की कमर पकड़कर लंड पूरा मुंह में ले लिया और चूसने लगा. मौसाजी धीरे धीरे कमर हिला हिला कर मेरे मुंह को चोदने लगे. जब लीना ने डांट लगायी तो हिलना बंद करके उन्होंने अपने चूतड़ पकड़कर फ़ैलाये और बोले “लो चूस लो बहू, तेरे को भी माल चखा दूं, वैसे माल भी मस्त होगा, तेरे मर्द का ही है”

लीना मुंह लगा कर मौसाजी की गांड चूसने लगी. मैं भी सोचने लगा कि कुछ बात तो है मौसाजी की गांड में जो औरतें भी चाटने को मचल उठती हैं. आज राधा भी कितना मन लगाकर चूस रही थी. तब तक मौसी भी मैदान में आ गयीं और झट से लीना की बुर से मुंह लगा दिया. मैं सरक कर किसी तरह मौसी की बुर तक पहुंच गया और उन्होंने टांगें उठाकर मेरा सिर अपनी जांघों में दबा लिया.

आखिर फ़िर से एक बार झड़कर और एक दूसरे के गुप्तांगों से रस पीकर हम लोग लुढ़क गये. नींद लगते लगते मौसी बोलीं “बड़े प्यारे बच्चे हैं … सुना तुमने … कल जरा ठीक से व्यवस्था करो बहू के लिये … मेरे यहां से प्यासी वापस न जाये … मैं अनिल को देख लूंगी राधा के साथ … समझे ?”

“हां भाग्यवान, समझ गया … अब सोने दे … कल सब ठीक कर दूंगा” मौसाजी बोले और खर्राटे भरने लगे.

दूसरे दिन सब देरी से उठे. मैं तो बारा बजे उठा. नहाया धोया. राधा ने खाना तैयार रखा था. हमसब ने खाया. रघू और रज्जू भी आये थे, खाना खाकर बाहर बैठे थे.

मौसी बोलीं. “चलो अब, आज खेत वाले घर में चलते हैं. आज बहू को ये लोग खेत घुमायेंगे”

“ये लोग याने कौन मौसी?” मैंने पूछा.

मौसी मेरी ओर देखकर बोलीं. “तेरे मौसाजी, रज्जू और रघू. ये अकेले जाने वाले थे, मैंने रोक दिया. मैंने कहा कि राधा और मैं भी चलेंगे, तेरे साथ पीछे पीछे”

“तो मौसी मैं तैयार होकर आती हूं” लीना बोली और अंदर चलने लगी.

“अरे रुक, ऐसे ही ठीक है, खेत में कौन देखता है तुझे” मौसी बोलती रह गयीं पर लीना कमरे में चली गयी. मैं भी पीछे पीछे हो लिया. लीना कपड़े बदल रही थी. उसके काली वाली लेस की ब्रा और पैंटी पहनी और फ़िर एकदम तंग स्लीवलेस ब्लाउज़ और साड़ी. क्या चुदैल लग रही थी. मुझे आंख मार कर हंस दी. ’आज दिखाती हूं इन तीनों को, सुनो, कुछ भी हो जाये, तुम बीच में न पड़ना””अरे रानी, तेरा ये रूप देखेंगे तो तीनों तुझे रेप कर डालेंगे” मैंने उसकी चूंची दबा कर कहा.

“यही तो मैं चाहती हूं, आज रेप कराने का, जम के चुदने का मूड है, तुम फ़िकर मत करो, इनको तो मैं ऐसे निचोड़ूंगी कि चल भी नहीं पायेंगे” लीना बोली. आइने में देख कर उसने बाल ठीक किये और ऊंची ऐड़ी के सैंडल पहन लिये. बाहर आकर बोली “चलो मौसी”

“अरे तू खेत में जा रही है या सिनेमा देखने? खेत में क्या चल पायेगी ये सैंडल पहनकर” मौसी बोली.

“मैं तो शिकार पे जा रही हूं मौसी, तीन तीन खरगोश मारने हैं, और ये सैंडल वाली चाल से ही तो खरगोश खुद आयेंगे अपना शिकार करवाने” और मौसी से लिपट कर हंसने लगी.

मौसी बोली “क्या बदमाश छोकरी है, अनिल, बहुत चुदैल और छिनाल है तेरी बहू” और लीना को प्यार से चूम लिया.

हम निकल पड़े. आगे आगे रज्जू, रघू और मौसाजी के साथ लीना चल रही थी. मैं पीछे पीछे राधा के साथ आ रहा था. मौसी कुछ पीछे चल रही थीं.

लीना जानबूझकर अपने सैंडल की ऊंची एड़ियां उठा उठा कर मटक मटक कर कमर लचका लचकाकर चल रही थी. बीच में रुक जाती, और आंचल गिरा देती, फ़िर झुक कर खेत में से एकाध बाली चुन लेती, उसके मम्मे ब्लाउज़ में से दिखने लगते.

जल्दी ही तीनों के लंड खड़े हो गये. पैंट में तंबू बन गया. देख कर लीना शोखी से हंसी और फ़िर चलने लगी. रघू खेत में कुछ दिखाने के बहाने लीना के पास गया और बात करते करते धीरे से लीना की चूंची दबा दी. लीना पलटकर कुछ बोली और फ़िर रघू के कान पकड़ लिये. उससे कुछ कहा, रघू कान पकड़कर उठक बैठक लगाने लगा. मौसाजी और रज्जू हंस रहे थे. फ़िर लीना आगे चलने लगी और तीनों उसके पीछे चल दिये.

राधा मेरे साथ चल रही थी. बीच में चीख मार कर बैठ गयी. मैंने पूछा तो बोली “भैया, कांटा लग गया”

मैं बोला “निकाल देता हूं, चल बैठ” राधा ने पैर आगे किया और उसके बहाने लहंगा ऊपर कर दिया. उसकी सांवली चिकनी टांगें और बालों से भरी बुर दिखने लगी. मेरा भी लंड खड़ा हो गया. कांटा वांटा कुछ नहीं था, मैंने उसका पैर पकड़ कर कहा “तेरे खेत में फ़ल बड़े रसीले हैं राधा, देख ठीक से चल, नहीं तो बड़ा वाला कांटा लग जायेगा या कोई तोता तेरे फ़लों पर चोंच मारने लगेगा” और मैंने अपना तंबू उसको दिखाया. वो मुस्करा कर बोली “बड़ा मस्त कांटा है भैया, मेरे अंग में घुस जाये तो मजा आ जायेगा. और तोता आये तो उसको ऐसी रसीली लाल बिही चखाऊंगी कि खुश हो जायेगा”

मैंने उसकी चूंची दबा कर कहा “आज दिखाता हूं तुझको, चल तो मेरे साथ. वैसे तोता तेरे को आज जरूर काटेगा, माल बहुत अच्छा है तेरे यहां”

मौसी अब तक हमारे करीब आ गयी थीं. बोलीं “अरे चलो ना, कांटा बाद में निकाल देना, देखो इनका भी खेत घूमना हो गया लगता है, अब घर में जा रहे हैं, मुझे लगा कि और घूमेंगे. ये तो खरगोश का शिकार करने वाली थी ना?”

मैंने कहा “मौसी, आप को तो अब अंदाजा हो गया होगा लीना कैसी है. उसी को अब जल्दी होगी अंदर जाने की. और शिकार के लिये खरगोश भी मिल गये हैं उसको, लगता है एकदम तैयार हैं”

“चलो मालकिन, हम भी चलते हैं. शिकार तो अब अंदर ही होगा घर के” राधा बोली.

“कितने कमरे हैं राधा उधर?” मैंने पूछा.

“फ़िकर मत करो भैया, दो तीन कमरे हैं, अपन अलग कमरे में चलेंगे” राधा बोली और आगे आगे चलने लगी. मैं मौसी के साथ चलने लगा. उनकी कमर में हाथ डालकर उनके चूतड़ दबा दिये. बोला “मौसी ये जो शिकार होगा, बड़ा मस्त होगा, हमको भी दिखना चाहिये”

“फ़िकर मत कर अनिल बेटे, हम भी देखेंगे. और साथ में मैं भी जरा देखूं कि तू राधा को कैसे अपना कांटा चुभाता है, बड़ी तेज छोरी है, मस्त माल है” मौसी बोलीं.

“आप से बढ़ कर नहीं मौसी. आपका माल मीठा भी है और खूब ज्यादा भी है, पेट भरने को अच्छा है” मैंने उनकी चूंची दबा कर कहा.

“चल चापलूसी मत कर, वैसे ये तेरी बहू कैसे इन तीनों से निपटती है, मुझे भी देखना है अनिल” मौसी बोलीं.
हम पांच मिनिट बाद घर तक पहूंचे. लीना और वे तीनों पहले ही अंदर जा चुके थे. राधा हमें पिछले दरवाजे से ले गयी. दूसरा कमरा था. वहां भी खाट थी और बिस्तर बिछा था. सामने छोटा सा झरोखा था, उसके किवाड खुले थे. अंदर से आवाज आ रही थी. हम तीनों ने अपने कपड़े उतारे और लिपट कर खाट पर बैठकर झरोखे से देखने लगे. लीना कमरे के बीच खड़ी थी, आंचल ढला हुआ था. तीनों नजर गड़ाकर उसको देख रहे थे. रघू बोला “बहू रानी, अब तो हमको मौका दो आपकी सेवा करने का”

“बड़ा आया सेवा करने वाला. पहले देखूं तो सेवा के लायक क्या है तुम्हारे पास. अब तीनों अपने कपड़े उतारो, जल्दी करो” लीना ने हुक्म दिया. मौसाजी और रज्जू और रघू ने फ़टाफ़ट कपड़े उतार दिये. तीनों मस्ती में थे, लंड तनकर लीना को सलामी दे रहे थे.

“अब लाइन से खड़े हो जाओ. और हाथ लंड से अलग, खबरदार” लीना ने डांट लगायी. “अब मैं इन्स्पेक्शन करूंगी कि शिकार के लिये जो बंदूकें हैं वो ठीक है या नहीं”

फ़िर लीना ने कपड़े उतारना शुरू किये. धीरे धीरे साड़ी उतारी और फ़िर पेटीकोट. फ़िर अपना ब्लाउज़ निकाला.

इधर राधा मुझसे लिपट गयी और मेरे कपड़े उतारने लगी. मौसी ने उसकी चोली और लहंगा निकाला और नंगा कर दिया. फ़िर मौसी ने भी कपड़े उतार दिये.

“कितना मस्त लंड है भैया आप का” कहकर राधा नीचे बैठने लगी तो मैंने पकड़कर गोद में बिठा लिया. “इतनी भी क्या जल्दी है राधा रानी, जरा हमको भी तो अपना जोबन चखाओ” फ़िर मैं उसके वो कड़े आमों जैसे मम्मे दबाता हुआ उसका मुंह चूसने लगा. राधा ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी, क्या लंभी जीभ थी उसकी, मेरे गले तक उतर गयी. उसको चूसता हुआ मैं दूसरे कमरे में देखने लगा. मौसी मेरे लंड को पकड़कर हमसे चिपट कर बैठी थीं.

लीना अब सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी. ऊंची ऐड़ी के सैंडल से एकदम चालू रसीले माल सी लग रही थी. तीनों उसका अधनंगा बदन देख कर आहें भर रहे थे. रज्जू का हाथ अपने लंड पर गया तो लीना डांट कर बोली “खबरदार … मैं न कहूं तब तक कोई हिलेगा भी नहीं अपनी जगह से” रज्जू ने पट से हाथ हटा लिया.

लीना लचकते हुए अपनी हाइ हील से टक टक करके चल कर मौसाजी के पास आयी. उनका लंड पकड़कर दबाया “आज देखो कैसा शान से तन कर खड़ा है मौसाजी. अब देखना ये है कि कितनी देर ये टिकता है मैदान में” उनके सामने नीचे बैठकर उसने लंड को चूमा और चूसने लगी. मौसाजी का बदन थरथरा उठा पर वे चुप खड़े रहे. “अच्छा है, काफ़ी रसीला है. अब तुमको देखें रघू” कहकर वो रघू के पास गयी और उसका लंड लेके मुठियाने लगी. रघू सिहर उठा पर चुप खड़ा रहा. लीना उसकी आंखों में देख कर मुस्करा रही थी. उसके बाद लीना रघू के सामने नीचे पैठ गयी और लंड चूसने लगी. बार बार ऊपर देखती जाती. रघू आखिर में बोल पड़ा “बहू रानी, ऐसे न तरसाओ, झड़ जायेगा”

“झड़ जायेगा तो भगा दूंगी. मौसाजी को कहूंगी कि नौकरी पर से निकाल दें. क्या मतलब का हुआ ऐसा लंड जो जल्दी झड़ जाये” लीना बोली और चूसने लगी. बेचारे रघू की हालत खराब थी. किसी तरह ’सी’ ’सी’ करता हुआ वो खड़ा रहा. मेरे खयाल से झड़ने को आ गया था पर लीना ने ऐन मौके पर मुंह से निकाल दिया. “हां ठीक है, खेलने लायक है”

अब वो रज्जू के पास आयी. रज्जू का लंड वो बड़े इंटरेस्ट से देख रही थी. रज्जू का सच में बड़ा था, अच्छा मोटा और लंबा, सुपाड़ा भी पाव भर के आलू जैसा था. उसकी तो लीना सीधे मुठ्ठ मारने लगी. हथेली में लेकर आगे पीछे करती जाती और रज्जू की आंखों में देखकर मुस्कराती जाती. “मजा आ रहा है रज्जू?”

रज्जू कुछ न बोला, सीधे खड़ा रहा, बड़ा सधा हुआ जवान था. लीना पांच मिनिट मुठ्ठ मारती रही पर रज्जू तन कर खड़ा रहा. आखिर लीना ने उसको छोड़ा और झुक कर उसके लंड का चुम्मा लिया “शाबास, बड़ा जानदार है” फ़िर मौसाजी की ओर मुड़ कर बोली. “मौसाजी, ये तो तोप है तोप, शिकार की धज्जियां उड़ाने की ताकत है इसमें”

वह फ़िर से मुड़ कर लचक लचक कर चूतड़ हिलाती हुई टॉक टॉक करके कमरे के बीच जाकर खड़ी हो गयी. तीनों आंखें फ़ाड़ फ़ाड़ कर उसके बदन को देख रहे थे.

“देखो, अब तुमको अपना जोबन ठीक से दिखाती हूं. वैसे ही खड़े रहो सब, मौसाजी आप बैठ जाओ खाट पर” कहकर लीना अपनी ब्रा के हुक खोलने लगी. हुक खोल कर उसने ब्रा आधी निकाली, उसकी आधी चूंचियां दिखने लगीं. रघू और रज्जू ’उफ़’ करने लगे. उनका हाथ अपने लंड पर जाते जाते रह गया. फ़िर लीना ने ब्रा वैसी ही रहने दी, और अपनी पैंटी के इलास्टिक में उंगलियां डाल कर जांघों पर उतार दी. उसकी गोरी गोरी काले बालों से भरी बुर दिखने लगी. लीना ने सामने देखा और मुस्कराकर अपनी कमर आगे करके टांगें फ़ैलायीं और उंगली से चूत खोल कर दिखाई “देखो, ऐसा माल कहीं देखा है”

रघू से अब नहीं रहा गया. वह अपने लंड को मुठ्ठी में लेकर हिलाने लगा. रज्जू और मौसाजी भी अपने लंड को पुचकराने लगे.

लीना ने पैंटी फ़िर पहन ली और चिल्ला कर बोली “मैंने क्या कहा था, हाथ अलग! तुम नहीं मानते ना, चलो खेल खतम, मैं जाती हूं, मेरी साड़ी किधर है” वो जान बूझकर गुस्से का नाटक कर रही थी, ये मैं पहचान गया.

रघू बोला “माफ़ कर दो बहू रानी, पर ऐसे मत तरसाओ”

रज्जू सीधा लीना के पास गया और उसके मम्मे दबाने लगा “अब नखरे मत करो बहू रानी, आ जाओ मैदान में”

लीना गुस्से से चिल्लाई “मेरे मम्मे दबाने की हिम्मत कैसे हुई तुमको, चलो दूर हटो, मैं अब यहां एक पल भी नहीं रुकूंगी”

रज्जू ने रघू को इशारा किया और वो भी आकर लीना से चिपक गया. लीना के बदन को दबाते हुए वो लीना की ब्रा और पैंटी उतारने में लग गया “ऐसे कैसे जाओगी बहू रानी, मालकिन ने कहा था कि खेत घुमा लाना, अभी तो जरा भी नहीं घूमी आप”

लीना चिल्लाती रही पर दोनों ने एक न सुनी और उसे नंगा कर दिया. रज्जू लीना के मम्मे दबाते हुए उसके निपल चूसने लगा और रघू उसके सामने बैठ कर उसकी टांगों में घुस कर जीभ से चाटने लगा.
लीना छूटने की कोशिश करती रही, चिलायी “देखो, ठीक नहीं होगा, मैं चिल्ला दूंगी”

“अब यहां कौन आयेगा आप को बचाने को? अब नाटक न करो बहू रानी और ठीक से चुदवा लो, देखो, कल से हमारे लंड सलामी में खड़े हैं आपकी” रज्जू ने अपना लंड लीना के हाथ में देकर कहा.

लीना मौसाजी की ओर देखकर बोली “मौसाजी, आप क्यों चुप बैठे हो, कुछ कहते क्यों नहीं? आप के सामने आप की बहू की इज्जत से ये खिलवाड़ कर रहे हैं”मौसाजी भी लंड पकड़कर खड़े हो गये और पास आकर बोले “हां लीना रानी, बात तो ठीक है. चलो रे रघू और रज्जू, कुछ तो इज्जत करो बहू रानी की, गांव बड़े शौक से आई है चुदवाने को और तुम लोग भोंदू जैसे बस लंड पकड़कर बैठे हो. अब चोद डालो बहू रानी को, अब तक ऐसे ही खड़े हो, अब तक मैं होता तो बुर में लंड डाल कर चोद रहा होता. इतनी मस्त बहू रानी है हमारी और यहां चुदवाने को बड़ी आशा से आई है, और तुम लोग हो कि बुध्धू जैसे खड़े हो, बहू कैसे खुद कहेगी कि आओ, मुझे चोद डालो. चलो बहू को खाट पर ले आओ”

तीनों मिलकर लीना को जबरदस्ती उठाकर खाट पेर ले आये और पटक दिया. लीना हाथ पैर पटक रही थी और झूट मूट गुस्से का नाटक कर रही थी “चलो छोड़ो मुझे, कैसे जानवर हो, औरतों से ऐसे पेश आया जाता है?”

किसी ने उसकी बकबक पर ध्यान नहीं दिया. तीनों मिलकर लीना के बदन को सहलाने और चूमने लगे. रघू ने उसकी बुर में उंगली की और चाटकर बोला “चू रही है बहू रानी भैयाजी, मस्ती में है, क्या स्वाद है” और उसकी बुर पर टूट पड़ा और चूसने लगा. रज्जू लीना के मम्मे दबाने में जुट गया और मौसाजी ने अपने होंठों में लीना के होंठ पकड लिये.

मौसी जोर से अपनी बुर में उंगली करते हुए बोली “अब ये तीनों मिलकर कचूमर निकालेंगे इस छोकरी का. अनिल, तू कुछ कहता नहीं?”

“अब मैं क्या कहूं मौसी, वो खुद निपट लेगी, वो क्या सुनती है मेरी कोई बात? राधा, अब जल्दी आ और मुझे अपनी बुर चुसवा, देख कैसे टपक रही है. क्या महक आ रही है, महक ऐसी है तो स्वाद क्या होगा मेरी रधिया रानी, बस आ जा और चखा दे अब” राधा की बुर में उंगली करके चाटकर मैं बोला.

राधा मेरे सामने खड़ी हो गयी और टांगें पसार कर कमर आगे कर दी. “लो भैयाजी, मैं तो कब से तैयार बैठी हूं. सबकी पसंद का माल है मेरा, आप मालकिन और भैयाजी से पूछ लो.” मौसी भी मेरा लंड पकड़कर अपनी जांघ पर रगड़ते हुए बोलीं. “चल जल्दी कर अनिल, राधा तो खास मेरी प्यारी है, बड़ी चटपटी लड़की है.”

मैंने मुंह डाल दिया. मौसी मुझपर चढ़ बैठीं और मेरी गोद में बैठकर लंड घुसेड़ लिया. फ़िर ऊपर नीचे होकर चुदवाने लगीं. हम फ़िर से दूसरे कमरे में देखने लगे.

वहां अब रज्जू लीना की बुर चूस रहा था. रघू मम्मों को दबाते हुए लीना की एक चूंची आधी मुंह में भरके चूस रहा था. मौसाजी लीना की गांड सहला रहे थे. बोले “चलो रे जल्दी जल्दी चूसो बहू का शहद, मन भर के पी लो, फ़िर चुदाई शुरू हो जायेगी तो असली स्वाद नहीं आयेगा.”

रज्जू मुंह उठा कर बोला “आप नहीं चूसेंगे भैयाजी, बड़ा खालिस माल है”

“कल रात काफ़ी चूसा है मैंने, और बाद में भी चूसूंगा, अब तो यहीं है गांव के घर में, बच के कहां जायेगी, चीखेगी चिल्लायेगी तो कौन सुनने वाला है यहां मीलों तक!” और लीना की गांड में उंगली डाल दी.

लीना बिथर गयी और फ़िर हाथ पैर झटकने लगी “अरे मैंने कहा था ना गांड को हाथ मत लगाना. चलो, छोड़ो सालो, नामुरादो, अकेली लड़की पर जबरदस्ती करते हो”

“तू तो लड़की कहां है बहू, अच्छी खासी छिनाल चुदैल है अनिल की मौसी जैसी, अब देखना तुझे इतना चोदेंगे कि तेरी ये गरमागरम चूत पूरी ठंडी हो जायेगी.”

लीना फ़िर चिल्लाने लगी. मौसाजी बोले “रज्जू, तेरा हो गया तो इसकी मुंह बंद कर दे अपने लंड से, साली बहुत पटर पटर कर रही है. और तू रघू, चल चढ़ जा और चोद डाल फ़टाफ़ट”

रज्जू उठ कर खड़ा हो गया और लीना के गालों पर लंड रगड़ता हुआ बोलो “अब मुंह खोलो बहू रानी, देखो क्या मस्त गन्ना है”

“मैं नहीं खोलूंगी, जो करना है कर ले हरामजादे” लीना बोली और मुंह बंद कर लिया. फ़िर उठने की कोशिश करने लगी. नाटक अच्छा कर रही थी, असल में अब वो बहुत गरम हो गयी थी. बुर से इतना पानी टपक रहा था कि जांघें भी गीली हो गयी थीं. मौसाजी बोले “मत खोलो, हमें तो आता है मुंह खुलवाना” और लीना के गालों को पिचका दिया. उसका मुंह खुल गया. रज्जू ने तुरंत सुपाड़ा अंदर ठूंस दिया और लीना के सिर को पकड़कर आधा लंड पेल दिया. “आह, क्या मस्त मुंह है बहू रानी का, बड़ा मुलायम है भैयाजी.” लीना अब गों गों कर रही थी.

“पूरा पेल ना, आधे में क्यों रुक गया” लीना के मम्मे दबाकर मौसाजी बोले.

“दम घुट न जाये, गले के नीचे चला चायेगा” रज्जू ने सफ़ाई दी.

“अरे तू नहीं जानता इसकी चुदासी को, आराम से गटक लेगी, तू पेल” मौसाजी ने हूल दी. रज्जू ने लीना का सिर पकड़कर कस के अपने पेट पर दबाया और पूरा लौड़ा हलक के नीचे उतार दिया. फ़िर खड़े खड़े लीना का मुंह चोदने लगा.

“शाबास, रघू चल अब तू चोद डाल” मौसाजी बोले.

“भैयाजी, पैर हिलाती है बहू रानी, डालने नहीं देती” रघू ने कहा.

“ठहर मैं देखता हूं” कहकर मौसाजी ने रज्जू से कहा “जरा हाथ पकड़के रख इसके” रज्जू ने लीना के हाथ पकड़ लिये. मौसाजी ने कस के लीना की टांगें पकड़कर फ़ैलायीं और बोले “पेल दे जल्दी”

रघू ने फ़च्च से लंड पूरा जड़ तक गाड़ दिया. फ़िर चोदने लगा “आह … मस्त गरमागरम गीली चूत है भैयाजी, मजा आ गया”

“मजा तो इसको भी आ गया होगा, बस नाटक कर रही है” मौसाजी बोले और फ़िर से लीना की गांड के पीछे पड़ गये. उसके चूतड़ मसलने और चूमने लगे.

रज्जू हंस के बोला “मस्त चीज है भैयाजी, आप के शौक की है”

“हां, कल बोला तो मुकर गयी, अब देखता हूं कैसे मना करती है. पर क्या गांड है छोकरी की, खा जाने का जी करता है” कहकर मौसाजी ने लीना के चूतड़ फ़ैलाकर गांड खोली और मुंह लगा दिया. इधर मौसी थक कर रुक गयी थीं. एक बार झड़ चुकी थीं पर मस्ती उतरी नहीं थी. राधा मेरे मुंह में पानी छोड़ चुकी थी. बोली “मालकिन, चुदवा लिया ना, अब मुझे चोदने दो”

“रुक ना, अनिल को तो पूछ. क्यों रे अनिल पसंद आया मेरी नौकरानी का शहद?” मौसी मेरे लंड को चूत से पकड़कर बोलीं.

“एकदम खालिस घी है मौसी, इतना पिया पर पेट नहीं भरा. वैसे अब अगर ये चुदवाना चाहती है तो कर लेने दो, मेरा लंड तो है ही तुम दोनों की सेवा के लिये” मैंने मौसी के मम्मे चूमते हुए कहा.

“मालकिन, भैया का कितना मस्त खड़ा है देखो ना, आप अब उतरो और मुझे चोदने दो” राधा ने तकरार की. मौसी की लाड़ली नौकरानी थी, वो क्या मना करतीं उसको. “चल आ जा. पर ये बता, केले वेले हैं कि नहीं घर में?”

“कल ही तो लायी थी मालकिन, अंदर पड़े हैं”

मौसी उठ कर अंदर चाल दीं. “तुम लोग चोदो, मैं अपना इंतजाम करके आती हूं.”

राधा मुझे खाट पे लिटा के मुझपर चढ़ बैठी और मेरी लंड गप्प से अपनी बुर में खोंस लिया, बड़ी जल्दी में थी. मैं आह भरकर बोला “हाय … क्या गरम भट्टी है राधा और कितने प्यार से पकड़ी है मेरे लंड को … अरी ऐसे न कर, झड़ जाऊंगा” मैंने कहा, राधा मेरे लंड को गाय के थन जैसी दुह रही थी.

“डरो मत अनिल भैया, ऐसे जल्दी थोड़े छोड़ूंगी तुमको, इतनी देर बाद पकड़ में आये हो, अब तो सता सता कर चोदूंगी. मालकिन बेचारी थक गयीं, मैं होती तो घंटे भर तक चोदती”

“वैसे मौसी केले लेने क्यों गयी है? अच्छा समझा, शौकीन लगती हैं केले की” मैंने कहा.

मौसी दो तीन बड़े केले लेकर आयीं “और क्या अनिल बेटे, तेरे मौसाजी चोदते कम हैं और गांड ज्यादा मारते हैं. फ़िर चूत बेचारी क्या करे. और थोड़ा नाश्ते का भी इंतजाम हो जायेगा तुम्हारे”

मुझे भूख लगने लगी थी. हाथ बढ़ा कर एक केला लेने लगा तो मौसी ने रोक दिया “अरे रुक, ऐसे मत खा, ऐसे क्या मजा आयेगा! जरा तैयार करने दे तेरे लिये ठीक से” हंसकर बोलीं और केला छील कर बुर में घुसेड़ लिया. फ़िर अंदर बाहर करने लगीं “तुम लोग चोदो, मेरी चिंता मत करो. वो लीना को तो देखो, क्या चुद रही है वो लड़की! आज सब मुराद मिल गयी है लगता है उसको”

राधा ने मेरे पीछे एक बड़ा मूढा रख दिया और मैं उससे टिककर बैठ गया. राधा और मैं चोदते चोदते फ़िर से दूसरे कमरे में देखने लगे. रघू और रज्जू दोनों अब लीना के साथ खाट पर लेटे थे. लीना को करवट पर लिटाकर रज्जू ने उसका सिर अपने पेट पर दबा रखा था और कमर आगे पीछे करके मजे से उसका मुंह चोद रहा था. उधर रघू बाजू में लेट कर लीना के पैर उठाकर पकड़े था और मस्त सधे हुए अंदाज में उसकी बुर में लंड पेल रहा था. लीना शायद काफ़ी मस्ती में थी क्योंकि नखरे छोड़ कर वो भी कमर उछाल उछाल कर चुदवा रही थी और रज्जू की कमर में हाथ डालकर उसका पूरा लंड मुंह में लेकर चूस रही थी.

मौसाजी कमरे में नहीं थे. थोड़ी देर बाद वे वापस कमरे में आये. हाथ में एक स्टील का डिब्बा था. राधा हंस कर बोली “मख्खन ले कर आये हैं भैयाजी, खास चुदाई करने वाले हैं लगता है”

मौसाजी लीना के पीछे बैठे और अपने लंड में मख्खन चुपड़ने लगे. उनका अब मस्त तन कर खड़ा था. फ़िर उन्होंने उंगली पर एक लौंदा लिया और लीना के गुदा में चुपड़ने लगे.

लीना बिचक गयी. पीछे देखने की कोशिश करने लगी. रघू और रज्जू ने तुरंत उसके हाथ पैर पकड़े और उसका हिलना डुलना बंद कर दिया.

“बिचक गयी मेरी बहू रानी, पर अब क्या फ़ायदा. प्यार से नहीं मरवाती तो ऐसे ही जबरदस्ती मारनी पड़ेगी” मौसाजी हंसे और लीना की गांड में गहरे उंगली करने लगे.

“अब डाल दो भैयाजी. मां कसम बहुत मजा आयेगा तीनों ओर से बहू रानी को चोदने में” रज्जू बोला.

“उसको पकड़े रह, मैं अभी डालता हूं” कहकर मौसाजी ने लीना के गुदा पर अपना सुपाड़ा रखा और पेलने लगे. मेरी लीना रानी के गोरे गोरे चूतड़ चौड़े होने लगे और फ़च्च से मौसाजी का सुपाड़ा उसके छल्ले के पार हो गया. लीना हाथ पैर मारने की कोशिश करने लगी पर तीनों उसको ऐसे दबोचे हुए थे जैसे तीन शेर एक हिरन पर टूट पड़े हों.

“अरे अरे बेचारी की हालत कर देंगे तीनों. क्यों रे अनिल, तू जा ना और कह ना उनको कि बहू की ऐसी दुर्गत ना करें” मौसी मस्ती में जोर जोर से केला अपनी बुर में अंदर बाहर करते हुए बोलीं. उनकी गीली बुर से अब ’फ़च्च’ ’फ़च्च’ ’फ़च्च’ की आवाज आ रही थी. “ये तीनों मिलकर उसके हर छेद का भोसड़ा बना देंगे”

राधा मुझको पकड़कर बोली “मैं न जाने दूंगी मालकिन. अभी तो मजा आ रहा है भैया को चोदने का” वो अब उछ उछल कर मुझको चोद रही थी. मैं उसके मम्मे पकड़कर बोला “अब चुदवाने दो मौसी, लीना का जो होगा देखा जायेगा. बड़ी शेखी बघार रही थी, अब जरा खुद देख ले कि गांव की चुदाई कैसी होती है”

वहा मौसाजी का लंड अब तक लीना के चूतड़ों के बीच पूरा गड़ चुका था और वे उसकी कमर पकड़कर गांड मार रहे थे. अगले आधे घंटे तक तीनों ने मिलकर लीना को खूब चोदा, एक मिनिट की राहत नहीं दी. लीना ने कुछ देर हाथ पैर मारने की कोशिश की, फ़िर उसका बदन लस्त पड़ गया और पड़ी पड़ी चुदवाती रही. बीच में उसकी नजर मुझसे मिली तो मुझे आंख मार दी. बड़ा मजा आ रहा था उसको पर नाटक अब भी कर रही थी. रघू और रज्जू थोड़ी देर में झड़ गये और हांफ़ते हुए खाट पर पड गये. मौसाजी अब भी लीना की गांड मार रहे थे “हो गया इतनी जल्दी? अरे नालायको, मजा लेना भी नहीं आता ठीक से, ये परी हाथ लगी है तो घंटे भर तो चोदते, और बहू क्या सोचेगी, बेचारी घंटों चुदने की आस लगाये बैठी होगी, और तुम लोग दस मिनिट में टें बोल गये सालो!”

रज्जू बोला “रहा नहीं गया भैयाजी, क्या चीज है ये, लंड में बहुत गरमी चढ़ाती है”

रघू बोला “अभी तो एक बार चोदा है भैयाजी, हम तो दिन भर चोदेंगे”

रज्जू बोला “भैयाजी, बहू रानी चूस रही है, मेरा सब माल निगल रही है”

“तो क्या हुआ, गांव का असली माल है तेरे लंड का, छोड़ेगी थोड़े” मौसाजी बोले. “तेरे को क्या लगा?”

“नहीं भैयाजी, नाटक इतना किया तो मुझको लगा कि थूक देगी. पर ये तो चटखारे ले लेकर खा रही है”

मौसाजी बोले “चलो, हो गया ना? अब तुम लोग हटो और मुझे ठीक से मारने दो.”

रघू और रज्जू बाजू में हटे तो मौसाजी लीना को ओंधे पटककर चढ़ गये और हचक हचक कर उसके मम्मे दबाते हुए गांड चोदने लगे. लीना मुंह छूटते ही कराह कर बोली “बस बस, अब नहीं मौसाजी, दरद होता है”

“ऐसे कैसे छोड़ दें बहू, कल मुझको इतना तरसाया, आज भी हम को रिझा रिझा के फ़िर नखरे किये, अब तो मैं दिन भर मारूंगा तेरी” मौसाजी बोले और पूरे जोर से गांड मारते रहे. रघू और रज्जू फ़िर से जुट गये. रघू मौसाजी के होंठ चूमने लगा और उनकी गांड में उंगली करने लगा. रज्जू लीना के बदन पर जहां मौका मिले हाथ चलाने लगा.

मौसाजी के झड़ने के बाद रघू ने उनका लंड चूसा और रज्जू लीना की गांड से मुंह लगा कर लेट गया. मौसाजी का लंड चूसने के बाद रघू ने लीना की चूत में मुंह डाल दिया. लीना उन दोनों को दूर ढकेलने की कोशिश करते हुए उठने लगी तो तीनों ने फ़िर उसे पलंग पर पटक दिया. “अभी कहां जाती हो बहू रानी, ये देखो, हमारी बंदूक फ़िर तैयार है शिकार के लिये” रज्जू ने उसको अपना लंड दिखाया. “भैयाजी, अब मैं गांड मारूंगा लीना बहू की”

“अरे नहीं, आज गांड बस मैं मारूंगा. तुम दोनों तो पूरी खोल दोगे बहू की गांड. अभी तो हफ़्ते भर मजा लेना है, जरा दो तीन दिन और टाइट रहने दो. तुम दोनों बारी बारी से चोदो इसको और अपना लंड चुसवाओ. पेट भर कर मलाई खिलाओ, खालिस गांव की मलाई का मजा तो मिले बहू को. शाम तक इतना चोद देंगे कि चल भी नहीं पायेगा हमारी प्यारी बहू”

तीनों फ़िर शुरू हो गये. लीना बोलने लगी “अरे बहुत हो गया रे गांडुओं. ऐसा बर्ताव करते हैं बहू बेटी के साथ? कहां तुमको थोड़ा जोबन दिखाया और तुम लोग पीछे पड़ गये मेरी गांड के? चलो भोसड़ीवालो, अब मत …” रघू ने लीना के मुंह में लंड घुसेड़कर उसकी बोलती बंद कर दी और रज्जू उसको चोदने लगा. मौसाजी ने कुछ देर मजा देखा और फ़िर से लीना की गांड में लंड डालकर शुरू हो गये. उधर राधा मुझे मस्त चोद रही थी. दो बार झड़ भी गयी थी. मौसी भी आराम कर रही थीं, वो केला उनकी बुर में पूरा घुस कर गायब हो गया था.

लीना की गांड की धुनाई देखकर मैं बोला “चलो राधा रानी, बहुत हो गया. अब मैं गांड मारूंगा तुम्हारी”

“भैया बस एक बार और चोद लेने दो, बड़ा मजा आ रहा है. कसम से आप के लंड का जवाब नहीं, आधे घंटे से खड़ा है” राधा बोली.

“पर अब और नहीं रुक सकता राधा. चलो आ जाओ नीचे. और मौसी आप भी तैयार हो जाओ, आज आपकी भी गांड मारूंगा. कसम से जब से देखी है कल रात में, बहुत मन हो रहा है मारने का. वो तो कल मौसाजी की सेवा में जुट गया बाद में नहीं तो आप की जरूर मारता” मैं बोला.

“पहले राधा की मार लो, फ़िर भी जोश बाकी रहे तो मेरी मार लेना. वैसे कल तूने बहुत अच्छा चोदा बेटे, और भी चोदा कर, ज्यादा मेरी गांड के पीछे मत पड़ा कर, तेरे मौसाजी हैं उस काम के लिये. अभी तो मुझे केले में मजा आ रहा है, बहुत दिन हो गये ऐसे बड़े बड़े केले मिले हैं मुठ्ठ मारने को” मौसी ने पसरकर उंगली बुर में अंदर डाली और केला बाहर निकालने लगीं. वो टूट गया और एक टुकड़ा बाहर आ गया.

मौसी ने टुकड़ा मेरे मुंह में दे दिया और बोलीं “ले खा ले अनिल बेटे, स्वाद आयेगा मौसी के प्यार का. मैं दूसरा छील लेती हूं”

राधा चिल्लाई “मालकिन, हमको नहीं दोगी ये पकवान?”

“अरे तू तो हमेशा चखती है. आज अनिल को मजा करने दे. अनिल बेटे, अभी ये टुकड़ा खा ले, बाद में पूरा माल खिला दूंगी” मौसी ने दूसरा केला अंदर डाला और शुरू हो गयी. फ़िर बोली “अनिल, ये राधा तो दिन भर चोदती रहेगी तुझे, इसकी तो तसल्ली ही नहीं होती. तू गांड मार ले, इसके कहने पे मत जा”

मैंने राधा को जबरदस्ती अपने लंड पर से उतारा और ओंधा लिटा दिया. राधा छूटने की कोशिश करने लगी “भैया, मेरी गांड मत मारो, आज चुदाने का मौका मिला है, मुझे और चोद दो ना. तुमको चोदने से मतलब है, चूत या गांड से आपको क्या फरक पड़ता है? छोड़ो ना भैया, आप को मेरी कसम”

मौसी ने अपनी उंगली अपनी चूत से निकाली और राधा के गुदा में चुपड़ दी. “डाल दे अब. मैं पकड़ के रखती हूं इसको. इसकी मत सुन, ये तो बहुत चपड़ चपड़ करती है दिन भर” मौसी ने अपनी मोटी मोटी टांगें उठाकर राधाकी पीठ पर रखीं और उसे दबा कर रखा. मैंने राधा के सांवले चूतड़ों को पकड़कर चौड़ा किया और लंड डाल दिया, आराम से लंड पूरा सप्प से चला गया.

“अच्छी मुलायम है मौसी. लगता है काफ़ी ठुकी हुई है” मैंने गांड में लंड पेलना शुरू करते हुए कहा. “आखिर तीन तीन लंड हैं यहां, सबसे रोज मरवाती होगी ये छोकरी””अरे नहीं, इसकी गांड तो बस तेरे मौसाजी मारते हैं. बड़ा शौक है गांडों का, रघू और रज्जू को सख्त हिदायत दी हुई है कि राधा की गांड को कोई छुए भी नहीं. गांड क्या, वो तो उन दोनों को ठीक से राधा को चोदने भी नहीं देते”

“हां भैयाजी, बड़ी प्यासी रह जाती है मेरी बुर. तभी तो आप चोद रहे थे तो बड़ा सुकून मिल रहा था. अब आप भी मेरी गांड के पीछे पड़ गये.” राधाने शिकायत की.

“फ़िकर मत करो रानी, अभी तो कई दिन पड़े हैं. मैं तेरे को और मौसी को जितना कहो चोद दूंगा. अभी मारने दे मस्ती से. डर मत, झड़ूंगा नहीं तेरी गांड में” मैं हचक हचक कर उस नौकरानी की गांड मारते हुए बोला. “और ये मम्मे तो देख, कैसे कड़क सेब हैं सब. इनको कोई दबाता नहीं क्या?” कहकर गांड मारते मारते मैं राधा की चूंचियां मसलने लगा.

“धीरे भैयाजी, आप को मेरी कसम. पिलपिली न करो ऐसे” राधा कराह कर बोली.

“तू दबा अनिल, इसकी मत सुन. इसके मम्मे कोई नहीं दबाता, ये किसी को दबाने नहीं देती. मैं कहती हूं इसको कि दबवा ले, जरा नरम नरम और बड़े करवा ले, आखिर जब बच्चा पैदा करेगी तो दूध तो ठीक से भरे” मौसी कस के अपनी बुर में केला अंदर बाहर करते हुए बोली. “आह … आह … हां …. अरे मेरी रानी … रधिया बिटिया …. कई दिन हो गये रधिया री इतनी मस्त मुठ्ठ मारे हुए” और मौसी झड़ कर ढेर हो गयीं.
मैंने दूसरे कमरे में देखा. रघू पलंग पर लेटा था और लीना उसके ऊपर कोहनियों और घुटनों के बल झुक कर जमी थी. रघू का लंड लीना की बुर में था और वो नीचे से कमर हिला हिला कर उसको चोद रहा था. रज्जू सिरहाने खड़ा हो कर लीना के मुंह में लंड पेल रहा था. लीना के सिर को उसने कस के अपने पेट पर दबा रखा था और आगे पीछे होकर उसका मुंह चोद रहा था. मौसाजी खड़े खड़े राधा की गांड मार रहे थे. लीना का पूरा बदन हिल रहा था. वो आंखें बंद करके चुपचाप चुदवा रही थी. मौसाजी दोनों नौकरों को हिदायत दे रहे थे “रघू, अब झड़ना नहीं बहू की चूत में. समझा ना? झड़ना सिर्फ़ उसके मुंह में. लोटा भर मलाई खिलानी है उसको आज”

“भैयाजी, बस एक बार, एक बार तो मार लेने दो बहू रानी की गांड. मन कसकता है भैयाजी, इतनी मस्त गोरी गोरी मतवाली गांड है. बस एक बार …” रज्जू मिन्नत करते हुए बोला.

“आज नहीं, तू ढीली कर देगा. बाद में एक कोरी गांड दिलवा दूंगा, तुझे भी और रघू को भी. और देखो, बहू को हफ़्ते भर जम के चोदना है, यहां से जायेगी तो अपनी पूरी प्यास बुझा कर जायेगी लीना बेटी. बोलेगी कि मान गये, गांव में जो चुदाई हुई उससे दिल बाग बाग हो गया, समझे ना?”

“हां भैयाजी, हम पूरा चोद देंगे लीना भाभी को. पर अनिल भैया नाराज ना हो जायें … आखिर उनकी लुगाई है … कहेंगे कि मेरी जोरू को पूरा ढीला कर दिया बुढिया रंडी की तरह … और वो रधिया भी नखरे करेगी भैयाजी, आप भी बहू रानी के पीछे पड़ोगे तो वो किससे चुदवायेगी?” रघू धक्के लगाता हुआ बोला. “अरे अनिल कुछ नहीं कहेगा. लीना की खुशी में उसकी खुशी है. रही रधिया की बात, अनिल भैया चोद देंगे उसको, आखिर गांव का ऐसा माल उसको कहां मिलेगा. तुम लोग बस लीना बिटिया के सब छेद पूरे चोद दो” मौसाजी लंड पेलते हुए बोले.

“फ़ुकला हो जायेगी बहू की चूत और गांड भैयाजी. हाथ भी चला जायेगा” रज्जू मस्ती में बोला.

“परवा नहीं. उसको ठीक करने के नुस्खे हैं कई, चलो अब बातें मत करो, कम से कम दो बार और चोदना है आज शाम तक इस घर की बहू रानी को” मौसाजी लंड पेलते हुए बोले.

“बहूरानी की तो आज खूब ठुकाई कर रहे हैं ये तीनों नासपीटे भैयाजी. उनको कुछ बोलो नहीं तो लीना दीदी का कचूमर निकाल देंगे आज.” राधा मुझको बोली.

“उसकी फ़िकर मत कर राधा रानी. तू नहीं जानती मेरी बीवी को. ऐसे दस मर्द और खड़े कर दो तो उनको भी झेल लेगी.” मैं बोला.

“ठीक कहता है अनिल. आखिर हमारे घर की बहू है, चुदाई में अव्वल नंबर, हमारा नाम रोशन करेगी” मौसी अपनी बुर सहलाते हुए बोलीं. दो चार बार झड़ कर तृप्त हो गयी थीं.

“मौसी, आप ऐसे मत लेटो, मेरे सामने आकर लेटो. जरा हम दोनों आप का प्रसाद तो चख लें” राधा मौसी की टांग पकड़कर बोली. मौसी खिसक कर हमारे सामने खटिया पर लेट गयीं. राधा ने तुरंत मुंह डाल दिया.

“अरी सब मत खाना, अनिल को भी दे” मौसी बोलीं.

राधा ने अब तक आधा केला मौसी की बुर से निकाल लिया था और स्वाद ले लेकर खा रही थी. मौसी की बात पर उसने सिर बाजू में किया और मैंने भी भोग लगाना शुरू कर दिया. “बहुत मस्त है मौसी, मजा आ गया”

“अरे ये तो हमेशा का है हमारे यहां. तेरे मौसाजी को ज्यादा शौक नहीं है पर जब भी रघू रज्जू आते हैं तो अक्सर उनको खिला देती हूं. लीना नहीं चखाती क्या तुझको?”

“मौसी, उसको भी सिखा देना. बड़ा मस्त पकवान है. वैसे मौसी, आप वो बच्चे वाली क्या बात कर रही थीं? राधा को बच्चा होने वाला है क्या?” मैंने पूछा.
“अरे नहीं, वो गोलियां लेती है ना. पर अब मैं बंद करने वाली हूं. नौ महने में बच्चा हो जायेगा. दूध की बड़ी जरूरत है हमको. तेरे मौसाजी ही बोल रहे थे कि भाभी, अब जरा खालिस दूध का इंतजाम करो. और लीना भी मुझको पूछ रही थी सुबह. कह रही थी कि गांव में इतना बड़ा मकान है, खेत हैं नौकर चाकर हैं तो दूध का इंतजाम क्यों नहीं है? पहले मैं चकरा गयी, दस भैंसे बंधी हैं तो ये दूध का क्या कह रही है! फ़िर समझ में आया. मैंने पूछा कि चखना है क्या तो हंसने लगी बदमाश. उसको मैंने कहा कि अगली बार आयेगी तो राधा का दूध चखाऊंगी. और इसीलिये मैं कह रही थी कि जम के मसलो इस छोकरी के मम्मे, तब तो ज्यादा दूध निकलेगा इसका. कई दिन हो गये ऐसा दूध पिये. जब विमला बाई थी तो वो आकर सब को पिला जाती थी. मस्त दूध था उसका, पर वो साल भर पहले दूसरे गांव चली गयी अपने भाई के यहां. उसका मर्द यहां नहीं है ना. कह रही थी कि भाई बुला रहा है, उनका अच्छा खासा लफ़ड़ा चलता है, भाई, भाभी और विमला बाई की खूब जमती है. वैसे विमला बाई इस महने आयेगी, पर अभी तक खबर नहीं आयी”मैंने सप्प से राधा की गांड में से लंड खींचा और बोला “अब मौसी जी, आप आओ. गांड मरवाओ तब मुझे होगी शान्ति”

मौसी ओंधी लेट गयीं. मैंने उनके मोटे मोटे चूतड़ों पर दो चार चपत लगायीं “वाह, क्या गांड है मौसी, डनलोपिलो के गद्दे हैं, अचरज नहीं कि मौसाजी बस आपकी गांड के दीवाने हैं”

“अरे खेल मत इनसे, जल्दी मार और छुट्टी कर. फ़िर चोद दे जरा ठीक से राधा को, मेरी खास नौकरानी है, उसके सुख का खयाल रखना मेरा फ़र्ज़ है.” मौसी चूतड़ हिलाकर बोलीं.

मैंने लंड पेलते हुए पूछा “क्यों मौसी, आप नहीं चुदवायेंगी?”

“मैं तो रात को चुदवा लूंगी अनिल बेटे, इस रधिया की प्यास बुझा. और ज्यादा चपर चपर मत कर, देखती हूं कि कितना दम है तुझमें, बिना झड़े मेरी गांड मार कर दिखा जरा”

“लो मौसी, ये लो” कहकर मैं मौसी की गांड मारने लगा. राधा मस्ती से फ़नफ़ना रही थी, टांगें फ़ैलाकर मौसी के सामने बैठ गयी और मौसी का सिर अपनी जांघों में जकड़ लिया. खुद मुझे चूमने लगी.

मौसी की गांड लाजवाब थी. एकदम मोटी ताजी. और फ़िर मौसी अपनी गांड सिकोड़ सिकोड़ कर मेरे लंड को दुहने लगीं. मुझसे न रहा गया और मैं हचक हचक के मौसी की मारने लगा. दो मिनिट में मेरा लंड झड़ गया.

“लो … झड़ गये भैया. अब मुझे कौन चोदेगा? मौसी … देखो ना भैया ने क्या किया” राधा गुस्से में बोली.

मौसी हंस के बोली “चला था मेरी गांड मारने. क्यों रे अनिल?”

मैं हांफ़ते हुए बोला “माफ़ कर दो मौसी, आप जीतीं मैं हारा, आप जैसी गांड हमेशा नसीब नहीं होती इसलिये रहा नहीं गया”

“दिल छोटा न कर बेटे. अभी तो हफ़्ता भर है ना तू यहां? और दे दूंगी तेरे को बाद में. अब यहां आ और मेरी बुर चूस. मेरी रज चखेगा तो जल्द ही तेरा लंड खड़ा हो जायेगा. ओ रधिया, तू जरा अनिल भैया के लंड को मस्त कर”

मैं लेटा मौसी की चूत चाट रहा था तब बाजू के कमरे से आवाजें आयी. “अब छोड़ दो … मौसाजी …. बहुत हो गया … गांड दुख रही है …. चूत भी कसमसा रही है … गला दुख रहा है … कितने अंदर तक लंड पेलते हो तुम लोग … चलो छोड़ो अब … मेरे बदन का चप्पा चप्पा पिस गया है … ” ये लीना की आवाज थी.
“अभी तो बस दो बार चुदी हो बहू. एक बार और चुदवा लो. चलो फ़र्श पर चलते हैं, वहां मजा आयेगा तेरे को, यहां खटिया पर बहुत हो गया, ओ रघू, वो दरी बिछा दे नीचे. ऐसे … अब लीना को एक एक करके ठीक से चोदो.” मौसाजी की आवाज आयी.

“भैयाजी, गांड ….” रघू की आवाज आयी.

“गांड कल फ़िर से मारेंगे, पर आज चोदो जरूर और घंटे भर. मैंने दो बार मारी है इसकी, बहुत मजा आया पर अब लंड खड़ा नहीं हो रहा है, मैं रात को फ़िर से चोद लूंगा बहू को, पर तुम दोनों अब फ़िर से चोदो इसको”

जल्दी ही फ़च फ़च की आवाज आने लगी. रघू बोला “भैयाजी, बड़ा मजा आता है जमीन पर, बहू रानी का मुलायम बदन एकदम मखमल की गद्दी जैसा है””इसीलिये तो बोला तुम लोगों को कि फ़र्श पर चोदो. फ़र्श पर जोरदार धक्के लगते हैं, चुदैल औरतों की कमर तोड़ चुदाई कर सकते हैं. हमारी बहू रानी की भी चोद चोद कर कमर टेढ़ी कर दो. कल मैं फ़र्श पर लिटा कर इसकी गांड मारूंगा, इसके बदन की गद्दी का लुत्फ़ उठाना है मुझको.

लीना कराह रही थी “अरे दुखता है रे … मत चोदो …. बदन मसल डाला मेरा तुम लोगों ने …. तुमको तो मेरे बदन की गद्दी मिल गयी पर …. मेरी हड्डी पसली एक हो रही है”

“रज्जू उसका मुंह बंद कर, बहुत बोल रही है.” मौसाजी की आवाज आयी. फ़िर शांति छा गयी, अब सिर्फ़ ’फ़च’ ’फ़च’ ’सप’ ’सप’ की आवाज आ रही थी.

लीना की होती चुदाई की कल्पना से मेरा लंड सिर उठाने लगा. जल्दी ही काफ़ी कड़ा हो गया. “चल राधा, चोद ले अब इसको. खुद ही चढ़ के चोद ले, ये चोदेगा तो फ़िर जल्दी से झड़ जायेगा” कहकर मुझे लिटा कर मौसी मेरे मुंह पर चूत जमा कर बैठ गयीं. राधा मुझपर चढ़ कर चोदने लगी.

एक घंटे बाद राधा और मौसी ने मुझे छोड़ा. पिछले घंटे में मुझे लिटा कर रखा था इसलिये लीना के साथ क्या हो रहा था, मुझे दिख नहीं रहा था. बस आवाजें सुन रहा था. चोदने की आवाज लगातार आ रही थी. लीना की आवाज बस बीच बीच में आती जब उसका मुंह वो लोग छोड़ते. वो बस कराहती और बोलती “बहुत हो गया …. अब छोड़ो … तुम्हारे पैर पड़ती हूं … मार डालोगे क्या …. चलो खेल खेल में मजाक बहुत हो गया ….” पर फ़िर उसका मुंह कोई बंद कर देता.

मैं झड़ा और दस मिनिट पड़ा रहा. फ़िर उठकर हम कपड़े पहनने लगे. तब मैंने बाजू के कमरे में देखा. लीना जमीन पर चुपचाप पड़ी थी. मौसाजी उसकी बुर से मुंह लगा कर चूस रहे थे, लगता था वहां काफ़ी माल था, रघू और रज्जू ने निकाला हुआ. लीना की बुर चुद चुद कर लाल हो गयी थी, पपोटे फ़ूल गये थे. रघू और रज्जू बारी बारी से उसकी गांड चूस रहे थे. लीना का बदन भी लाल गुलाबी हो गया था. खास कर मम्मे तो ऐसे हो गये थे जैसे टमाटर. पूरे गोरे अंग पर दबाने और मसलने के निशान पड़ गये थे. चूतड़ों ने भी मौसाजी के इतने धक्के झेले थे कि वे भी लाल हो गये थे. जब मैं मौसी और राधा उस कमरे में गये तो रघू लीना को ब्रा पहना रहा था. लगता था ब्रा पहनाने में उसको मजा आ रहा था, वो बार बार लीना के मम्मे दबाने लगता. लीना आंखें बंद करके चुपचाप गुड़िया सी पड़ी थी.

“भैयाजी, बड़ी मस्त ब्रा है बहू की, साली क्या फ़िट बैठती है बहूरानी की चूंची पर” रघू बोला फ़िर मौसाजी से पूछा “भैयाजी, अब बंद करना है क्या सच में?”

रज्जू जो पैंटी पहना रहा था, बार बार लीना की जांघों को चूम लेता “हां भैयाजी, एक घंटे आराम करते हैं, फ़िर और चोदेंगे लीना भाभी को. मन नहीं भरा, क्या जन्नत की परी है बहू रानी”

“चलो हटो अब, बहुत हो गया. बहू को इतना मसला कुचला, अब भी मन नहीं भरा तुम्हारा? चलो अब आराम करने दो उसको घर जा कर. चलो हटो, मैं साड़ी पहना देती हूं” मौसी ने सबको हटाया और साड़ी पहनाने लगीं. लीना अबतक आंखें बंद करके ऐसी पड़ी थी कि बेहोश हो, आंखें खोल कर किलकिला करके मेरे को देखा और आंख मार कर मुंह बना दिया कि लो, मौसी क्यों बीच में आ गयीं, मैं तो और मजा लेती.

जब हम घर को निकले तो मैं काफ़ी थक गया था. लंड और गोटियां दुख रही थीं. पर मन में मस्ती छाई हुई थी. रज्जू ने लीना को कंधे पर लिया हुआ था जैसे गेहूं की बोरी हो. उसकी आंखें बंद थीं. रघू और मौसाजी पीछे चल रहे थे.

“कचूमर निकाल दिया मेरी बहू का, क्यों रे बदमाशों?” मौसी बोलीं.

“अरे नहीं मालकिन, बहू रानी तो अब भी तैयार थी, हम लोगों के ही लंड अब नहीं खड़े होते” रज्जू बोला.

“पर वो तो चिल्ला रही थी कि छोड़ दो” मौसी बोली.

“अरे बड़ी बदमाश है तेरी बहू. जानबूझकर इनको उकसा रही थी. जरा देखो, हंस रही है चुपचाप” मौसाजी बोले. लीना के चेहरे पर मुस्कान थी. आंखें खोल कर मेरी ओर देखा और आंख मार दी.

’अरे तो इसको उठा कर क्यों चल रहे हो?” मौसी ने पूछा.

“चुदा चुदा कर थक गयी है लीना बिटिया. चल तो लेगी पर खुद ही बोली कि मुझे उठा कर ले चलो सो रज्जू ने उठा लिया. एकदम निछावर हो गया है बहू पर, लाड़ में उठा लिया”

“हां अनिल भैया, आप की लुगायी जैसी औरत नहीं देखी आज तक. क्या चुदवाती है. मैं तो अब भाभी का गुलाम हो गया, उनकी खूब सेवा करूंगा, जैसे चाहेंगीं, मैं चोदूंगा” रज्जू बोला.

“और मैं भी. भैया, अब मुझे उठाने दो भाभी को” रघू बोला. दोनों बारी बारी से लीना को उठा कर घर पे ले आये. उस रात हमने आराम किया. सब काफ़ी थक गये थे. मौसी बोलीं “आज सुस्ता लो, कल से दिन भर चुदाई होगी. कोई पीछे नहीं हटेगा, अपनी अपनी चूतें और लंड का खयाल रखो और उनको मस्त रखो” मौसी बोलीं. “लीना बेटी, तू कल आराम कर, आज जरा ज्यादा ही मस्ती कर ली तूने”

“अरे नहीं मौसी, यहां आराम करने थोड़े आई हूं! और ये ऐसे नहीं छोड़ूंगी इन दोनों बदमाशों को” उसका इशारा रघू और रज्जू की ओर था. “और मौसाजी भी सस्ते छू जायेंगे. ये तीनों रोज दोपहर चार घंट मेरे लिये रिज़र्व हैं. इनको इतना चोदूंगी कि इन तीनों के लंड नुन्नी बन कर रह जायेंगे” लीना मस्ती में लरज कर बोली.

अगला हफ़्ता ऐसे बीत गया कि पता ही नहीं चला. सुबह हम देर से उठते थे. नहा धो कर खाना खाकर लीना मौसाजी के साथ खेत के घर में चली जाती थी जहां रघू और रज्जू उसकी राह देखते थे. मैं राधा और मौसी घर में रह जाते थे. दिन भर मस्ती चलती थी. दोनों लंड की ऐसी भूखी थीं कि बस बारी बारी से मुझसे चुदवातीं. बीच बीच में खूब खातिरदारी करतीं, हर दो घंटे में बदाम दूध देतीं.

लीना जब शाम को आती थी तो उसका चेहरा देखते बनता था. चेहरे पर एकदम शैतानी झलकती थी और एक सुकून सा रहता था कि क्या मजा आया. ऐसी दिखती थी जैसे मलाई खाकर बिल्ली दिखती है. उसकी हालत किसी छोटे बच्चे सी थी जिसे मनचाहे खिलौने मिल जायें तो खेल खेल कर थक जाये फ़िर भी खेलता रहता है. इतना चुदवाती थी लीना कि उससे चला भी नहीं जाता था. मैंने एक बार कहा भी कि रानी, जरा सम्हाल के, इस तरह से अपनी चूत और गांड की धज्जियां मत उड़वाओ तो मुझे टोक देती “तुम्हे क्यों परेशानी हो रही है मेरे सैंया जब मैं खुश हूं? परेशान मत हो, आराम करने को तो बहुत समय मिलेगा जब हम वापस जायेंगे. तब चूत और गांड फ़िर टाइट कर लूंगी दस दिन में. तब तक इन तीनों लंडों का मजा तो ले लूं. और वो रघू और रज्जू के लंड तो बेमिसाल हैं.” रघू रज्जू और मौसाजी उसके आगे पीछे ऐसे घूमते जैसे उसके गुलाम हों और वो मलिका.

रात को सब इतने थक जाते कि सो जाते. पहली रात को मौसाजी के साथ मिलकर हमने जो मस्ती की थी उसकी याद मुझे आती थी. मौसी और राधा की बुर और गांड से मुझे बहुत सुख मिलता था पर कभी कभी मौसाजी की गांड की याद आती थी, कितना मजा आया था उस रात उनकी मारने में. क्या गोरी चिकनी गरमा गरम गांड थी मौसाजी की. मैं सोचता था कि जाने के पहले कम से कम एक बार तो मौसाजी की फिर से मारूंगा.

हफ़्ते भर ये चुदाई चली. जब हमें जाने को दो दिन बचे तो उस रात मौसी ने खुद ही रोक लगा दी. “चलो, बहुत हो गया, अब सब लोग आज और कल आराम करो.”

लीना पैर पटककर बोली “मौसी, ऐसे मत करो, अब दो दिन में हम चले जायेंगे, तब तक और मजा कर लेने दो”

“बेटी, तेरी चूत तो हरदम प्यासी रहती है पर इन मर्दों को देखो, इनके अब जोर से खड़े भी नहीं होते. तूने तो इनको पूरा निचोड़ लिया है. इन्हें आराम कर लेने दो. इनके लंडों में ताकत आ जायेगी. परसों एक खास प्रोग्राम करेंगे, तुम्हारे जाने के पहले””ठीक है मौसी” लीना के दिमाग में बात घुस गयी, शायद सच में रघू और रज्जू के लंड अब झड़ झड़ कर मुरझाने को आ गये थे “इनको आराम करने दो, पर आप की और राधा की बुर तो अभी भी ताजी है. मैं आप के साथ खेलूंगी अब. आप दोनों के साथ ठीक से वक्त नहीं निकाला मैंने, जाने के पहले अब इनको मैं मन भर के चखना चाहती हूं”

“धीरज रख बहू, सब हो जायेगा. पर आज तू भी आराम कर” मौसी लीना का चुम्मा लेकर बोलीं.
उस दिन भर हम लोग बस सोये, और कुछ नहीं किया. रघू और रज्जू को भी मौसाजी ने छुट्टी दे दी. राधा बस खाना बनाने आयी और चली गयी.

दूसरे दिन सुबह मौसी ने लीना को बुलाया. लीना वापस आयी तो बहुत खुश थी.

मैंने पूछा. “खुश लग रही हो डार्लिंग. कोई खुशखबर? उपवास खतम हो गया है लगता है. मौसी ने बुलाया है क्या?”

लीना बोली “एक खुशखबर और एक बुरी खबर है. बुरी खबर ये कि उपवास आज दिन भर चलेगा.”

मैंने कहा “अरे रे …. मेरा लंड अब फ़िर से मस्त टनटना रहा है. दोपहर को जरा मौज मस्ती करते. फ़िर खुशखबरी क्या है?”

“मौसी ने रात के खाने के बाद सबको उनके कमरे में बुलाया है. कपड़े उतार के. बड़ी मूड में हैं. कहती हैं कि उपवास के बाद आज दावत होगी रात को. आज मजा आयेगा देखना राजा.”

मैं और लीना रात को कपड़े उतार के जब मौसी के कमरे में गये तो देखा कि सब वहां जमा थे और पूरे नंगे थे. आज पलंग बाजू में कर दिया गया था और पूरे फ़र्श पर गद्दियां बिछी थीं. मौसी और राधा लिपट कर बैठी थीं. मौसाजी रज्जू और रघू के बीच बैठे थे और अपने दोनों हाथों में उनके लंड ले कर मुठिया रहे थे.

“ये तो पूरा जमघट लगा है मौसी. कोई खास बात है क्या?” मैंने पूछा.

“आज एक खास खेल होने वाला है. ट्रेन ट्रेन का” मौसी मुस्कराती हुई बोलीं.

“कैसा खेल मौसी? ट्रेन ट्रेन खेल कैसा होता है?” लीना ने पूछा.

“अरे ट्रेन में लेडीज़ और जेंट कंपार्टमेंट अलग अलग होते हैं ना. आज हम लोग भी अलग अलग रहेंगे. मर्द अलग और औरतें अलग. एक कंपार्टमेंट से दूसरे कंपार्टमेंट में जाना मना है आज””ये क्या मौसी? लंड अलग और चूत अलग? मुझे और लंड चाहिये” लीना पैर पटककर बोली

“मेरी चुदैल बहू रानी, तू जरूर हमारा नाम रोशन करेगी” मौसी ने लीना का हाथ पकड़कर कहा “अरी हफ़्ते भर तो लंड ही लंड लिये हैं तूने. और बाद में और ले लेना, फ़िर से जल्दी गांव आ जा, अनिल को छुट्टी न हो तो खुद अकेली आ जाना और इस बार महने भर रहना. तू कहेगी तो एक दो और मस्त लंड तेरे लिये जमा करके रखूंगी, रघू और रज्जू के एक दो चचेरे भाई हैं, बड़े मस्त जवान लौंडे हैं. आज ये खेल देख ले, तेरे मौसाजी का बहुत मन है ये खेलने का”

“पर मौसी, मुझको भी देखना है ना, अनिल कैसे ये वाला खेल खेलता है” लीना शोखी से बोली.

“अरी फ़िकर क्यों करती है, सब दिखेगा. तू मैं और राधा यहां इस तरफ़, लेडीज़ कंपार्टमेंट. और तेरे मौसाजी, रज्जू रघू और अनिल यहां दूसरी तरफ़, जेंट कंपार्टमेंट, दोनों कंपार्टमेंट यहीं इस कमरे में बनेंगे. तेरे मौसाजी तो हमेशा खेलते हैं. आज और मजा आयेगा, अनिल जो है. चल आ जा लीना बेटी” लीना का हाथ पकड़कर मौसी ने उसको पास बिठा लिया. राधा तो लीना के पीछे चिपटकर उसके मम्मे दबाने लगाने लगी थी.

“वहां से दिखेगा बेटी, फ़िकर मत कर. और अनिल को कुछ करने की जरूरत नहीं है, ये तीनों उसको सिखा देंगे”
“आओ अनिल. यहां बैठो” मौसाजी बोले. मैं उनके पास जाकर बैठने लगा तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़कर अपनी गोद में बिठा लिया. “वहां नहीं यहां बैठो बेटे. हम तो कब से तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं, क्यों भाभी, खेल शुरू करें?”

“हां करो ना, जान पहचान बढ़ा लो. वैसे मैंने विमला बाई को भी बुलाया है. बड़े दिन हो गये उससे मिले. कल अचानक आ गयी तो मैंने कहा कि आज रात को आ जाओ, हमारी बहू से भी जानपहचान बढ़ा लो. बस आती होगी.”

तभी बाहर से किसी औरत की आवाज आयी “मौसी, आप कहां हो?”

मौसी चिल्ला कर बोलीं. “हम यहां है मेरे कमरे में. तुम भी आ जाओ, और तैयार होकर आना विमला. खेल शुरू ही होने वाला है. बस तुम्हारा ही इंतजार था. मेरे कमरे में कपड़े निकाल के रख दे”

मैं मौसाजी की गोद में बैठ गया. उनका लंड मेरी पीठ से सटा था. “लो रघू और रज्जू, आखिर अनिल आ गया हमारे साथ. लो अब इसे ठीक से प्यार करो. तुम लोग कब से पीछे लगे थे मेरे कि अनिल भैया से ठीक से जान पहचान करा दो हमारी, अब देखें कैसी सेवा करते हो उसकी, इसकी बीवी को तो तुमने खुश कर दिया, अब इसकी खुशी पर ध्यान दो”

मुझे थोड़ा अजीब लग रहा था. मैं बोला “अरे ऐसी कोई बात नहीं है मौसाजी, आप चाहो तो अभी भी लीना को इस कंपार्टमेंट में बुला लो”

“भाभी को तो हम फ़िर से अगली बार ले ही लेंगे अनिल भैया, अभी तुम तो आओ ऐसे” रज्जू बोला. “क्या गोरे चिट्टे हैं अनिल भैया. बड़े मस्त दिखते हैं” रघू बोला और मेरे सामने नीचे बैठ गया. मेरा लंड हाथ में लेकर बोला “और ये लंड तो देख रज्जू, एकदम रसीला गन्ना है” फ़िर उसको चूमने और चाटने लगा.

मौसाजी मेरे निपल मसलते हुए मेरी गर्दन प्यार से चूम रहे थे. रज्जू मेरी जांघों पर हाथ फ़िरा रहा था “अनिल भैया का बदन तो खोबा है खोबा भैयाजी. और इनके होंठ कितने खूबसूरत हैं! बिलकुल लीना बहूरानी जैसे ही हैं. चुम्मा लेने को मन करता है भैयाजी”

मौसाजी पीछे से मेरे बालों में सिर छुपा कर मेरी गर्दन को चूमते हुए बोले “तो ले ले ना, अनिल क्या मना कर रहा है”

रज्जू ने तुरंत मेरे होंठों पर होंठ रख दिये और मेरे पेट और जांघों को सहलाने लगा. उसका हट्टा कट्टा बदन मेरे बदन से लगा हुआ था. मैं चार पांच मिनिट बस बैठा रहा, सोचा कर लेने दो इन लोगों को उनके मन की. पर फ़िर मन में मस्ती छाने लगी. सामने मौसी और राधा जैसे लीना को पकड़कर आगे पीछे से लगी हुई थीं, देख देख कर और मस्ती चढ़ रही थी. मैंने रज्जूका लंड हाथ में ले लिया और अपनी जीभ उसके मुंह में डाल दी. रज्जू उसको चूसने लगा. उसका लंड मेरी हथेली में थिरक रहा था.

उधर रघू अब मेरा लंड मुंह में लिये था. बड़े प्यार से सुपाड़ा मुंह में लेकर उसको लड्डू जैसे गपागप चूस रहा था. रज्जू ने चुम्मा तोड़ा और मौसाजी को बोला. “भैयाजी, अनिल भैया को नीचे सुला दो तो जरा हम ठीक से उनके बदन को देख लें”

मौसाजी ने मुझे लिटा दिया और तीनों मुझसे लिपट गये. कोई मेरी जांघों को चूमता तो कोई लंड मुंह में लेता. कोई मेरे होंठ चूमता तो कोई मेरे चूतड़ सहलाने लगता. जब किसीने मेरे चूतड़ फ़ैलाकर मेरा गुदा चूसना शुरू कर दिया तो मैं मस्ती से झूम उठा.

“मां कसम क्या गांड है अनिल भैया की. एकदम माल है” मेरे पीछे से रज्जू की आवाज आयी. फ़िर उसने मुंह मेरी गांड से लगा दिया.

“मैंने बोला था ना कि कल तुझे एक मस्त गांड दूंगा. ले हो गयी तसल्ली” मौसाजी मेरे मुंह पर अपना लंड रगड़ते हुए बोले.

“अभी कहां भैयाजी, तसल्ली तो तब मिलेगी जब मैं इस खूबसूरत गांड में लंड डालकर चोदूंगा.” रज्जू बोला.

“हां हां चोद लेना, पर बाद में. पहले मैं खेलूंगा. याने तुम लोगों से खिलवाऊंगा. आज बड़े दिन बाद तीन लंड एक साथ मिले हैं. आज मैं मजा करूंगा, तीनों लंड एक साथ लूंगा. अनिल बेटे, तेरे को कोई परेशानी तो नहीं है?” मैं कुछ बोल नहीं पाया क्योंकि मौसाजी का लंड मेरे मुंह में था. उधर एक लंबी सी जीभ मेरी गांड में घुस कर मुझे गुदगुदी कर रही थी.

मौसी बोलीं “अरे नहीं, अनिल को क्या परेशानी होगी. अनिल बेटे, जब से तू आया है, तेरे मौसाजी आस लगाये बैठे हैं. एक साथ तीन लंड लेना चाहते हैं. पहले ही कहने वाले थे पर बहू को देखकर मुंह में पानी आ गया, बोले, पहले तीन चार दिन बहू के बदन से खेलूंगा, उसको खुश करूंगा और फ़िर खुद की प्यास बुझाऊंगा. आज इनको खुश कर दो बेटे. सुनते हो रघू और रज्जू. आज पहले भैयाजी की कस के सेवा करो और फ़िर बाद में अनिल की. अनिल यहां से प्यासा नहीं जाना चाहिये. चूतें तो बहुत मिलती हैं उसको, उसकी खुद की बीवी इतनी मतवाली है पर ऐसे तीन तीन लंड उसने कभी नहीं लिये होंगे” तभी दरवाजा खुला और एक औरत अंदर आयी. वह भी एकदम नंगी थी सिर्फ़ ब्रा पहने हुए थी. उमर पैंतीस के करीब होगी. गले में सोने की बड़ी माला थी, कान में झूमर और कलाइयों पर चूड़ियां. बड़ी बिंदी लगाये हुए थी, मांग में सिंदूर भरा था. ब्रा में कसी चूंचियां मोटी मोटी थीं, और बदन अच्छा खाया पिया हुआ था. पेट के नीचे घने बाल थे.

“आओ विमला, बड़ी देर लगा दी, कब से राह देख रहे थे तुम्हारी. और इस बार बहुत दिन बाद गांव आयी हो, छह महने से ज्यादा हो गये.”

“देर हो गयी इसीलिये तो कपड़े उतार कर ही आयी मौसी. मेरा मतलब है बुर खोल कर आयी हूं जिसको प्यास लगी हो वो चूस ले” विमला बाई बोलीं.

मौसाजी बोले “बुर खुली है बड़ी अच्छी बात है विमला बाई पर फ़िर मम्मे क्यों नहीं खोले?”

मौसी झल्ला कर बोलीं “अब तुम क्यों औरतों के बीच बोल रहे हो? आज तुम बस लंडों की सोचो. विमला के दूध आता है सो ब्रा बांध के आयी है कि छलक न जाये, मैंने ही कहा था कि आकर हमारे यहां जो खूबसूरत मेहमान आये हैं उनको चखा जाना”

“कहां है बहू रानी? अच्छा ये है. बड़ी प्यारी है, ये तो कल जा रही होगी, आप लोगों ने इसकी खातिरदारी की या नहीं?” विमला बाई बोली. फ़िर लीना के पास बैठ गयी. लीना को गोद में खींचा और चूमने लगी.

मौसी बोलीं “ये भी कोई पूछने की बात है! बहू पहली बार हमारे यहां आई है, अब हमसे जितना हो सकता था उतनी हमने सेवा की बहू रानी की. तीनों को काम पर लगा दिया, ये तेरे दीपक भैया, रघू और रज्जू. और अनिल का जिम्मा हमने ले लिया, मैंने और राधा ने खूब चासनी चखाई है इसको”
“बड़ी प्यारी लड़की है मौसी. एकदम मतवाली है. अभी रहती हफ़्ते भर तो अच्छा होता” विमला बाई बोलीं और फ़िर लीना के मुंह से मुंह लगा दिया.

लीना को भी विमला बाई जच गयी थी, कस के उनको चूम रही थी. फ़िर ब्रा के कप को पकड़कर बोली “मैं तो साल में दो तीन बार आऊंगी मौसी. विमला मौसी, इसको निकालो तो जरा आप का माल चखूं, आप की चूंचियों के जलवे अलग ही दिखते हैं”

“अरे अभी नहीं बहू” विमला बाई बोलीं. “बाद में चख लेना, खास तेरे ही लिये ये भरी छाती लाई हूं. चखना है तो पहले उसे चखो” कहकर विमला बाईने टांगें फैलायीं और लीना का मुंह उनमें दबा लिया. आभा मौसी विमला बाई के मुंह का चुम्मा लेते हुए बोली “बस मेरी बहू को खुश कर दो आज विमला, बाद में तेरे को जो चाहिये मैं दे दूंगी.”

“अनिल बेटे आ जा अब, मेरे बदन से लग जा, तू ही बोले, तेरे को मेरा क्या चाहिये? किस छेद में डालेगा लंड?” मौसाजी मुझसे चिपटते हुए बोले “रज्जू और रघू बचे छेदों में डाल देंगे””मैं तो गांड मारूंगा मौसाजी, उस दिन एक बार मारी थी वो मुलायम मखमली छेद अब तक मन में है मेरे. वैसे आप रघू और रज्जू से मराते हो तो उनके लंड के हिसाब से मेरा तो कुछ नहीं है” मैं दीपक मौसा का चुम्मा लेकर बोला.

“आ जा मेरे लाल, जल्दी मार ले अपने मौसा की, ये गांड भी तेरे लंड को देखकर देख कैसे पुक पुक करती है. रघू और रज्जू के लंड तो मस्त हैं ही पर खास भांजे के लंड से मरवाने में जो मजा है, वो मैं ही जानता हूं. अरे रज्जू, जरा गांड चिकनी करो बेटे” मौसाजी ओंधे लेटते हुए बोले. रज्जू ने तुरंत उसमें तेल लगाया और रघू ने मेरे लंड को तेल चुपड़ा. तेल लगाते लगाते दोनों मेरे मुंह को एक एक करके चूस रहे थे.

मैंने कहा “अरे क्या बात है, बड़ा लाड़ आ रहा है? उस दिन बहू रानी का हर छेद चूसा, मन नहीं भरा क्या जो मेरा मुंह ऐसे चूस रहे हो दोनों मिलकर?”

“नहीं भैया, वो बात अलग है और आप की बात अलग है, हम तो आप के बदन का भी रस चूस कर रहेंगे. पर पहले भैयाजी को ठंडा कर दें, फ़िर आप देखना कि आज कैसे आपका रस निकालते हैं” रज्जू बोला और मेरा निपल मसलने लगा.

मौसाजी पड़े पड़े चिल्लाये “अरे मारो ना मेरी गांड मेरे भांजे राजा, देखो कैसे दुख दे रही है मेरे को”

मैंने मौसाजी की गांड में लंड डाल दिया और मारने लगा. “आह … आह … अब सुकून मिला थोड़ा …. रघू … अपना लंड दे जल्दी मेरे मुंह में …”

उस रात हम मर्दों की वो चुदाई हुई जो मुझे अब तक याद है. मौसाजी की मैंने खूब देर मारी, रज्जू ने उनसे लंड चुसवाया और रघू उनका लंड अपनी गांड में लेकर पड़ा रहा. उसके बाद जितनी दे हो सकता था, बिना झड़े हम छेद बदल बदल कर मौसाजी के पूरे बदन को हर छेद में चोदते रहे.

उधर मौसी और विमला बाई मिलकर लीना के पीछे पड़ी थीं, उसके बदन को गूंध रही थीं और उसे अपनी बुर चुसवा रही थीं. आखिर विमला बाईने अपनी ब्रा निकाली और लीना को दूध पिलाया. लीना ऐसे पी रही थी जैसे छोटी बच्ची हो, विमला बाईकी छाती पकड़कर दबा दबा कर चूस रही थी, छोड़ने को ही तैयार नहीं थी.

“छाती पूरी खाली न कर बेटी, आधा पी और फ़िर दूसरी चूंची पी ले” विमला बाई लीना के मुंह से अपनी चूंची निकालने की कोशिश करते हुए बोली.

लीना ने जवाब नहीं दिया और कस के विमला बाई की चूंची और जोर से चूसने लगी. “अरे खुद ही सब पी जायेगी क्या? तेरे मर्द को नहीं पिलाना है? वो भी तो मेहमान है” विमला बाई बोली.

“मुझको मत भूलना विमला बाई. मैंने क्या गुनाह किया है?” दीपक मौसा मेरा लंड मुंह से निकाल कर बोले.

“अरे तुमको तो बाद में भी पिला दूंगी दीपक भैया, मैं अभी हूं दो चार दिन. पर ये दोनों तो चले जायेंगे ना, जरा इनको भी गांव के दूध का स्वाद तो पता चले. अरे रधिया, तू क्या बैठे बैठे अपनी बुर खोद रही है? चल इधर आ और मेरी बुर चूस. दूध और बनता है इससे”

“बाई मैं मालकिन की चूत चाट रही थी” रधिया उठकर बोली.

“मौसी, आप इधर आओ ऐसे, मेरे को दो अपनी बुर. मुझे चखे भी बहुत दिन हो गये. रधिया चल जल्दी मेरी टांगों में सिर कर अपना”

चारों औरतें आपस में लिपट गयीं और चूसने और चाटने की आवाज कमरे में गूंजने लगी.

घंटे भर हम सब जुटे रहे. अधिकतर देर मैंने मौसाजी की गांड मारी थी, एक बार उनका लंड मुंह में लिया था और झड़ा कर उनका गाढ़ा वीर्य चूस डाला था. तब रज्जू उनकी गांड की धुनाई कर रहा था.
“भैयाजी और मारूं क्या?” रज्जू बोला.

“नहीं बस रहने दे, काफ़ी हो गया. आज तीन लंड लेकर एकदम तसल्ली मिल गयी. अब तुम लोग मेरी बाद में मार लेना. अब अनिल को जरा चोदो. इसकी गांड देखो और मजा लो. मैंने कहा था ना कि एक कोरी गांड दिलवाऊंगा सो वो ये रही. मजे करो दोनों मिल कर”

“आप नहीं मारेंगे क्या भैयाजी?” रघू ने फूछा.

“बिलकुल मारूंगा. लीना बेटी की इतनी मारी है तो अनिल की भी मारूंगा. बेटे और बहू दोनों को चोदने का मौका मुझे मिला है वो नहीं छोड़ूंगा. पर पहले तुम लोग मार लो”

दोनों मिलकर मेरे पीछे लग गये, पहले दस मिनिट तो बस मुझे पट लिटाकर दोनों मेरी गांड को बस चूमते और चूसते रहे. “वाकई खूबसूरत गांड है भैयाजी, बहू रानी की तो मस्त है ही, अनिल भैया की भी कम नहीं है” रज्जू बोला. फ़िर मेरी गांड में तेल लगाने लगा.

मौसाजी ने मेरे नीचे घुस कर मेरा लंड मुंह में ले लिया और मुझे अपने ऊपर सुला लिया. रघू मेरे सामने बैठ गया और अपना लंड मेरे मुंह में दे दिया, बड़ा मतवाला लंड था, सांवला सा और एकदम सख्त. रज्जू मेरे ऊपर चढ़ गया और अगले ही पल मेरे चूतड़ अलग हुए और रज्जू का मोटा लंड अंदर धंसने लगा. मैंने ’गं’ गं’ किया तो लीना बोली “मजा आ रहा है मेरे सैंया को. जरा ठीक से मारना रज्जू, ठीक से चोदोगे तो अगली बार जब गांव आऊंगी तो मेरी गांड तुमको दूंगी”रज्जू लंड पेलता हुआ बोला “एकदम ठीक से लूंगा अनिल भैया की. क्या सकरी और कोरी गांड है तुम्हारे सैंया की बहूजी. मजा आ गया, डालने में ही इतना मजा आ रहा है तो मारने में तो और आयेगा” एक धक्के के साथ आखिर उसने अपना पूरा लौड़ा मेरी गांड में जड़ तक उतार दिया. मैं सिहर उठा तो मौसाजी बोले “मजा आया ना रज्जू बेटे? बहू रानी की जो खिदमत की है हफ़्ते भर, अब उसका यह इनाम पा ले”

रज्जू मेरे ऊपर लेट कर मेरी मारने लगा “मस्त कसी गांड है भैयाजी. लाखों में एक है”

“तो आज मार मार कर फुकला कर दो. और रघू, अनिल को अपनी मलाई चखाओ ठीक से. लंड का स्वाद याद रहना चाहिये मेरे भतीजे को”

अगले दो घंटे लगातार मुझे चोदा गया. दो बार रघू ने मेरी मारी और दो बार रज्जू ने. एक एक बार मुझे अपना वीर्य भी चखाया. मौसाजी तो जैसे मेरा लंड निचोड़ने को ही बैठे थे. बार बार मुझे झड़ाते और मेरा वीर्य निगल लेते. आखिर में तो मेरा गोटियां दुखने लगीं पर वे तीनों मुझे चोदते रहे. मैंने एक दो बार उठने की कोशिश की तो लीना ने ही उनको और उकसाया “मौसाजी .. अनिल को भागने मत दो .. और चोदो … नहीं तो मैं अब कभी नहीं आऊंगी दोबारा”

आभा मौसी ने भी हां में हां मिलाई. “इतना चोदो मेरे भांजे को नींद में भी यहां के सपने आयें उसको”

बीच में मुझे विमला बाई ने अपना दूध पिलाया. बस उतनी देर मेरी गांड को कुछ राहत मिली. उस मीठे दूध में ऐसा स्वाद था कि लंड फ़िर से तैयार हो गया.

चूंचियां खाली करके विमला बाई वापस लीना के पास गयीं और फ़िर तीनों औरतें मिल कर लीना पर चढ़ बैठीं. उनके बदन के नीचे लीना का बदन दिख भी नहीं रहा था, बस एक बार इतना जरूर दिखा मुझे कि विमला बाई अपनी चूंची से लीना को चोद रही थीं. मुझे पहली बार ध्यान में आया कि उनकी चूंचियां तोतापरी आमों जैसी नुकीली थीं और आधी चूंची वे लीना की बुर में पेल देती थीं.

सुनह होने तक सब थक कर चूर हो गये थे. बस एक घंटे सोये और फ़िर हमारे निकलने का टाइम हो गया.

जाते वक्त लीना ने सबका एक एक करके चुम्मा लिया और बोली “अब आप सब हमारे घर भी आइये बंबई में. एक एक करके आइये या साथ में, पर आइये जरूर. मैं और अनिल आपकी आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे”

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Updated: September 8, 2017 — 11:31 am

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