भाभी की चूत का भोसड़ा बनाया

प्रेषक : दुशंत …

हैल्लो दोस्तों, आज में आपको मेरी पहली स्टोरी सुनाने जा रहा हूँ और में समझ सकता हूँ कि उन देवरो की पुकार जो अपनी मालभरी भाभीयों को देखकर सिसकियों में कई साल काट देते है। वैसे हम भी उन लोगों में से ही थे, लेकिन मैंने मौक़ा पाकर और मौका देखकर चौका मार ही दिया। खैर मेरी भाभी और भाई अलग रहते है, क्योंकि वो दोनों जॉब करते है। मेरा भाई मुझसे 7 साल बड़ा है, लेकिन हमारी दारू दोस्ती है, वो जब भी मुझे दारू के लिए बुलाता है, तो में 2 बोतल लेकर जाता हूँ और साथ में पेप्सी या कोक भाभी के लिए लेकर जाता हूँ और उनसे में बहुत मज़े लेता हूँ, भाई का हक बनता है, बनता है ना दोस्तों? तो कहानी के इस सिलसिले की शुरूआत कुछ ऐसे हुई कि हर बार की तरह भाई ने रात को दारू पीने का प्लान बनाया, तो में सारा समान लेकर उनके घर पहुँच गया। फिर जैसे ही मैंने गेट खोला तो मैंने देखा कि उनके बेडरूम की लाईट जल रही है और पर्दों के पीछे से कुछ परछाईयाँ लिपटा-झपटी कर रही है। अब भाभी की सिसकियों की आवाज़ें भी काफ़ी साफ़ थी, अब मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया था।

फिर मैंने मन में सोचा कि साला अभी बेल बजाकर उन लोगों का मज़ा क्यों खराब करूँ? में घंटे भर बाद वापस आ जाऊंगा तो मैंने सारा सामान कार में वापस डाला तो तभी मेरा मोबाईल बज उठा तो मैंने देखा कि कॉल भाई का था और अब में हैरान था। फिर मैंने फोन उठाया, तो उस तरफ से भाई की आवाज़ आई सुन सन्नी बॉस आज का प्लान कैंसिल यार, ऑफिस में काफ़ी काम है, आज तो में घर पर ही नहीं जाऊंगा, तो सॉरी कल का रखते है, चल बाए। अब मेरे तो होश ही उड़ गये थे और अब मुझे समझ में नहीं आया कि क्या करूँ? अब मेरा सर घूमने लगा था, भाभी अंदर तो है, लेकिन अपने पति के साथ नहीं, तो फिर किसके साथ? कौन हो सकता है वो? क्या मुझमें उसे सामने देख पाने की हिम्मत है? फिर में गुस्से में अंदर गया और ज़ोर-ज़ोर से गेट को खटखटाने लगा।

फिर करीब 5 मिनट के बाद भाभी ने दरवाज़ा खोला, उनकी हालत बिखरी हुई थी, क्योंकि उनको बीच में ही अपना काम रोकना पड़ा था। फिर में झट से अंदर घुसा, तो भाभी बोली कि अरे देवर जी आप, अभी कोई ख़ास काम था? शायद मेरे भाई ने मेरे आने के प्लान के बारे में उनसे कोई बात नहीं की होगी। अब मेरे माथे पर पसीना देखकर भाभी तो हैरान हो गयी थी, तो वो जाकर ठंडे पानी का गिलास ले आई, उनकी चड्डी काफ़ी गीली थी। अब मेरा शक यकीन में बदल रहा था कि तभी मैंने अंदर बेडरूम से भोलू (हमारे नौकर) को आते हुए देखा। भोलू उनके घर पर पिछले 4-5 साल से था, उसकी उम्र कोई 18-19 साल की होगी, जब उसे रखा था तो वो बच्चा सा था और अब मेरा शक यकीन में बदल चुका था। फिर मैंने भोलू को अपने पास बुलाया।

अब वो काफ़ी डरा हुआ सा था, अब वो मेरी गुस्से भरी लाल आँखों को देखकर सहम भी गया था। फिर में कुछ बोलू उससे पहले ही वो तोते की तरह सब कुछ बक गया। अब भाभी की आँखें तो जैसे फटी की फटी रह गयी थी। अब भोलू भी दीवार से चिपककर खड़ा था। फिर मैंने एक गिलास ठंडा पानी पिया और सोचा कि साला ये वक़्त सोचने का नहीं है, मौका है तो चौका लगाओं और छक्का मारकर तहलका मचाओ। अब वो दोनों ऐसे तड़प रहे थे कि में कुछ बोलूँ, लेकिन में क्या बोलू? फिर में तुरंत उठा और बोला कि जो अंदर कर रहे थे, अब मेरे सामने यहाँ करो। फिर वो दोनों हक्के बक्के रह गये, तो में चिल्लाया भोलू चोद इसे यहीं, नहीं तो फ़ैसला हो जाएगा। अब भोलू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था और अब वो हक्का बक्का सा वहीं खड़ा था। फिर में भाभी के पास गया और उनकी साड़ी में अपना एक हाथ डालकर खीँचकर भोलू पर दे मारा। अब वो दोनों काफ़ी प्यासे थे। अब भोलू का लंड पूरा खड़ा था और भाभी भी बार-बार अपनी चूत को साड़ी के ऊपर से रगड़ रही थी। अब उन्हें प्यास बुझाने के लिए तुरंत लंड चाहिए था, लेकिन वो डर के मारे काँप रही थी। सच कहूँ तो में हूँ भी काफ़ी डरावना, में 5 फुट 11 इंच लंबा हूँ, रंग सांवला, लंड एकदम काला, में कोई हीरो टाईप का नहीं हूँ, लेकिन इस शाम में इन लोगों पर भारी था।

फिर मैंने खींचकर एक थप्पड़ भोलू के कान पर दिया, तो वो दूर जा गिरा और तुरंत भाग गया। अब इस घटना को 2 साल हो गये है और भोलू ने फिर से अपना चेहरा कभी नहीं दिखाया। अब भाभी काफ़ी डरी हुई थी और काँप रही थी। फिर मैंने दरवाजा बंद कर दिया और अंदर से चिटकनी लगा दी। तो भाभी बोली कि आप क्या करने वाले हो? देखो समीर को कुछ मत बताना, में फिर कभी ऐसा नहीं करूँगी ये कहती हुई भाभी पीछे जा रही थी और में उनकी तरफ बढ़ रहा था। अब बढ़ते-बढ़ते वो बेडरूम में चली गयी थी, तो मैंने बेडरूम को अंदर से चिटकनी से लॉक कर दिया। फिर जैसे ही में उनके पास पहुँचा तो मेरे जूतों के नीचे छप-छप हुआ, अब नीचे पानी था। अब भाभी ने डर के मारे पेशाब कर दिया था। अब उनकी पेशाब के बारे में सोचते ही मेरा लंड खड़ा हो गया था।

अब में क्या करने वाला हूँ भाई लोग? क्या भाभी आज रात मेरी हो जाएगी? या सिर्फ़ उसका बदन मेरा होगा? अब भाभी के दिमाग में क्या चल रहा है? लेकिन दोस्तों पेट्रोल गाड़ी में डालते रहिएगा। अब भाभी मुझे अपनी तरफ आते हुए देखकर पीछे बढ़ती गयी, लेकिन अब वो ज़्यादा दूर नहीं थी। अब वो और नहीं बढ़ सकती थी, क्योंकि अब पीछे दीवार आ गयी थी। अब वो चिल्लाने लगी थी और बोली कि तुम क्या चाहते हो? ये ठीक नहीं है, में तुम्हारी भाभी हूँ, ये पाप है, अब में उनके करीब पहुँच चुका था। फिर मैंने एक थप्पड़ भाभी जान के सॉफ्ट-सॉफ्ट गाल पर मारा। अब मेरी आँखों में वो अपने आपको पहले ही नंगा देख चुकी थी, अब वो घबरा रही थी क्योंकि में भोलू की तरह बच्चा नहीं था।

अब मेरी आँखे काफ़ी लाल थी, अब भाभी जान का झटपटाना मेरी इच्छा को और उजागर कर रहा था। लेकिन वो शायद मेरे साथ चुदाई के लिए तैयार नहीं थी, क्योंकि में भोलू के मुक़ाबले काफ़ी बड़ा था, लेकिन अब तक में भाभी को चोदने के लिए बेकरार हो चुका था। फिर मैंने उनका हाथ पकड़कर दीवार से सटा दिया। अब वो काफ़ी झटपटा रही थी और अब में उनके हाथ ऊपर की तरफ करके उनके और करीब पहुँच गया था। अब मेरा सीना उनके बूब्स को मसल रहा था और अब मेरा लंड उनकी चूत पर टच हो रहा था, तो तभी मैंने भाभी जान के होंठो को अपने होंठो से बंद कर दिया। अब मेरी ज़ुबान उनके मुँह के थूक को महसूस कर रही थी। अब में जैसे ही उनके बदन को अपने होंठो से खाने की कोशिश कर रहा था, तो 5-6 मिनट के बाद वो गहरी साँसे लेने लगी, अब उनकी आँखें लाल थी। फिर मैंने उनके हाथ छोड़ दिए और मुस्कुराते हुए पीछे हो गया। अब वो लंबी-लंबी सांसे ले रही थी। फिर उन्होंने मुझे पीछे की तरफ धक्का दिया और बोली कि में तुम्हारे साथ ये नहीं कर सकती, मुझे छोड़ दो, जाने दो। फिर में बोला कि उस नौकर के लंड में हीरे लगे थे क्या? अब उनका पेटीकोट पूरा गीला था और उनके ब्लाउज में से उनके बूब्स बाहर आने को बेकरार थे।

अब इससे पहले की वो गिड़गिडाती मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया, तो उनका पेटीकोट सरकता हुआ नीचे गिर पड़ा। अब भाभी की जवानी सामने नंगी खड़ी थी और उनकी चड्डी तो शायद भोलू ही लेकर भाग गया था, अब में रुक नहीं सकता था। फिर मैंने अपनी पेंट और शर्ट उतार दी और अपने अंडरवियर में से मेरे मस्त लंड को आज़ाद कर दिया। अब मेरा लंड पूरा खड़ा था, लेकिन भाभी उसे अपने मुँह में लेने को तैयार नहीं थी। फिर मैंने भाभी कि परवाह किए बगैर उनको बेड पर धक्का दे डाला और उनके ऊपर चढ़ गया। उनकी चूत काफ़ी टाईट थी, लेकिन गीली होकर बिल्कुल तैयार थी। फिर मैंने उनके हाथ लॉक करके अपने लंड से एक करारा धक्का दिया। तो वो ज़ोर से चिल्लाई और गिड़गिडाने लगी सन्नी में इसे नहीं ले पाऊँगी, मेरा छेद इतना बड़ा अंदर नहीं ले पाएगा, प्लीज मुझे जाने दो, लेकिन अब तक में पागल हो चुका था।

फिर मेरे एक और धक्के से तो भाभी जान ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी। अब उनकी चूत से खून निकलने लगा था। अब वो झटपटाहट में अपनी टांगे फेंकने लगी थी, लेकिन मैंने एक और धक्का दे डाला। अब मेरा पूरा 11 इंच लम्बा लंड अंदर घुस चुका था। अब उनकी आँखें फटी की फटी रह गयी थी और अब वो ज़ोर-जोर से चिल्लाने लगी थी कमीने में मर जाउंगी, इसे निकाल दे, अरे छोड़ दे मुझे, हरामज़ादे, लेकिन में उनकी बकवास बातों की चिंता किए बगैर अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। अब वो अपने दोनों हाथों और पैरों से झटपटा रही थी, लेकिन में ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाता रहा और साथ में उनके ब्लाउज के ऊपर से उनके बूब्स को भी हल्का-हल्का काट रहा था। अब माहौल काफ़ी गर्म था, अब पूरा कमरा छप-छप की आवाज़ों से गूँज रहा था। अब भाभी अपने दातों से अपने होंठो को काट रही थी।

अब मेरे हर धक्के पर जैसे वो पूरी हिल जाती थी। फिर कोई 15 मिनट तक लगातार भाभी को चोदने के बाद में उनकी चूत में ही झड़ गया, अब मेरी साँसे काफ़ी तेज हो चुकी थी। फिर में पस्त होकर भाभी जान के बगल में गिर गया। अब वो भी गर्म साँसे ले रही थी, अब भाभी की चूत में से मेरा सफेद वीर्य और उनका लाल खून फर्श पर गिर रहा था। अब पूरी बेडशीट भी उनके खून और मेरे वीर्य से भर गयी थी। अब भाभी की चूत की खुशबू पूरे कमरे में फैल चुकी थी। फिर में उठकर बाथरूम में गया तो तभी भाभी भी अंदर आ गयी। अब वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी और साथ में सिसकियाँ भी ले रही थी। अब वो पानी से अपने बदन पर लगे वीर्य को साफ कर रही थी, लेकिन में अब भी प्यासा ही था। अब भाभी की गांड मेरे सामने चमक रही थी, उनकी गांड का छेद छोटा सा दिख रहा था। अब मेरा लंड फिर से चौका मारने के लिए तैयार हो चुका था।

फिर मैंने तुरंत भाभी की गांड में अपनी एक उंगली की तो वो चौंक गयी और पीछे मुड़कर चिल्लाने लगी अब क्या चाहिए? तुझे मेरी इज़्ज़त लूटकर चैन नहीं मिला जो मेरी गांड में उंगली कर रहा है। फिर मुझे बहुत गुस्सा आ गया तो में भाभी को खींचकर ले गया और उनको दीवार के साथ चिपका दिया। अब उनके बूब्स मेरे सीने से दब रहे थे और उनके हाथों को मैंने अपने एक हाथ से लॉक किया हुआ था। अब वो माफी माँग रही थी, लेकिन अब तक में फिर से एक पारी खेलने के लिए तैयार हो चुका था। फिर मैंने उनकी एक टाँग ऊपर उठाई और अपना लंड उनकी चूत में दे डाला। उनकी चूत काफ़ी गर्म थी और साथ में ज़ख़्मी भी थी। अब वो दर्द के मारे पागल हो चुकी थी और बोली कि कुत्ते कमीने मेरा बलात्कार मतकर साले, मुझे मार डाला कमीने, लेकिन में उनकी ताबडतोड़ चुदाई करता जा रहा था।

अब मेरे हर धक्के पर फर्श पर कुछ खून की बूंदे गिरती थी, तो उनको देखकर मेरा पागलपन चरम सीमा तक पहुँच चुका था। फिर मैंने और ज़ोर-ज़ोर से और जल्दी-जल्दी धक्के लगाने चालू कर दिए। अब भाभी की गालियाँ भी अब उनके गुस्से की बजाए उनकी मस्ती को बयान कर रही थी। अब वो इस सेक्स पोज़िशन को इन्जॉय करने लगी थी। अब वो मेरे धक्को के साथ अपनी चूत को हिला रही थी। अब उनकी आँखों की चमक देखकर मेरा जोश और दुगुना हो चुका था। फिर मैंने उनके दोनों हाथ छोड़ दिए और उन्होंने मेरा गला अपनी बाँहों के घेरे में ले लिया, तो मैंने अपने धक्के और तेज कर दिए। अब वो भी मेरे हर धक्के के साथ-साथ उछल रही थी, फिर तभी मैंने उनकी दूसरी टाँग को भी संभाल लिया। अब वो हवा में मेरे लंड पर उछल रही थी और अब में भी उनकी गांड को नीचे से सहारा देते-देते दबा रहा था, अब वो पूरी मस्त हो चुकी थी। फिर करीब 20-25 मिनट के बाद मैंने भाभी की चूत में अपना माल-मसाला छोड़ दिया और उन्हें उतारकर बेड पर सीधा लेटा दिया और खुद भी बेड पर ही गिर गया। अब भाभी की नाराजगी दूर हो चुकी ही, अब वो मेरे लंड को अभी भी सहला रही थी। अब हमारी तेज साँसे हमारी थकान को बयान कर रही थी और फिर हम दोनों ऐसे ही बेड पर सो गये ।।

धन्यवाद …

Updated: April 27, 2017 — 9:08 am

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