वोह मेरी सच्ची प्यार थी

हेल्लो दोस्तों ,मेरा नाम रंजन है .मई एक छोटी से प्राइवेट कंपनी में जॉब कर लेता हु.और मेरे घर में मेरा पापा ,मम्मी और एक बेहेन और मई रहेता हु .हमारा छोटा सा परिवार .कहानी में आगे बड़ने से पहेले बता दू की मई 28 साल की हु और मई देखने में भी सिधासाधा लड़का लगता हु और सच्चे में भी हु .कहानी दरशल मेरी एक बचपन की दोस्त जिसका नाम है रवि और उसका एक बेहेन है नाम श्रेया.श्रेया मेरी फेसबुक मे फ्रेंड थी और उससे मेरी काफी बाते होती थी पर युही बोय फ्रेंड गर्ल फ्रेंड वाली कोई बाते नहीं होती थी वोह मेरी शायरी  से बड़ी ही प्रभावित थी, होने को तो श्रेया मुझसे चार बर्ष छोटी थी लेकिन वो अब कॉलेज में थी और दिखने में इतनी ब्यूटीफुल की कोई भीश्रेया पर मर मिटे. लेकिन श्रेया तो मुझ पर मर मिटी थी, दरअसल वो स्कूल टाइम से ही मेरी फेसबुक फ्रेंड बन गयी थी और मेरे लिखे शेर और शायरी उसको काफी पसंद आते थे और जाने कब श्रेया के दिल में मैं घर कर गया. मुझे भी इसका मालूम तब चला जब श्रेया के घर में मेरी बात हो रही थी और रवि ने बताया की मेरे लिए एक लड़की का रिश्ता आया है. श्रेया ने मुझे फेस बुक पर मेसेज कर के कहा -आप शादी कर रहे हो .तो मैंने भी मज़ाक में कह दिया -तुम कहो तो ना करू.उसका जवाब आया -मैं कह रही हूँ प्लीज़ मत करो ना. हालाँकि मुझे ये सब रवि को बता देना चाहिए था लेकिन जितनी उनकी फैमिली नामचीन और रईस थी उतनी ही पुराने ख्यालों की भी थी सो कहीं श्रेया को कोई शर्मिंदगी ना उठानी पड़े इसलिए मैं चुप रहा.

अगले ही दिन श्रेया का कॉल आया और वो बोली-रंजन मैं तुमसे मिलना चाहती हूँ. मैं हैरान क्यूंकि जिस लड़की ने मुझे आप से नीचे नहीं पुकारा वो आज मेरा नाम ले रही थी और तू तडाके से बात कर रही थी, मैंने कहा-श्रेया तू भूल रही है तू किस से बात कर रही है . तो श्रेया ने कहा -मैं जानती हूँ तुम मेरी जान हो और मेरे ही रहोगे और हाँ चुपचाप मिलने आजाना और मेरे घर वालों या किसी को भी कुछ मत बताना. मैं थोड़ी देर सोचता रहा और मैंने श्रेया को फ़ोन कर के कहा तेरे कॉलेज के बाहर हूँ आजा. श्रेया आई और उसने मुझे अपनी बाइक वहीँ पार्क करने को कहा और मुझे अपनी कार में बिठा कर ले गयी. वो हाईवे पर जा रही थी और मुझे कुछ समझ नहीं आरहा था, मैं कहा “श्रेया कहाँ जा रहे हो ” तो बोली “बैठे रहो आज हम अकेले हैं और खुश हैं” फिर उसने एक पुराना सा ग़ज़लें लगा दी जो मेरी भी फेवरेट थीं.

श्रेया नए गाड़ी को कच्चे में उतार दिया जहाँ उसके पापा नए फ्लैट्स बना रहे थे, वहां पहुँच कर उसने चोव्किदर को गाड़ी की चाबी दी और कहा “सैंपल वाला फ्लैट रेडी है साहब को दिखाना है” चोकीदार ने मुस्कुरा कर दरवाज़ा खोल दिया और श्रेया मुझे सैंपल फ्लैट में ले गयी. ये फ्लैट पूरी तरह साफ़ सुथरा सजा धजा था और हर सामान ऐसे खूबसूरती से लगा हुआ था जैसे यहाँ आ कर बस रहना शुरू कर दो. श्रेया ने मुझे ड्राइंग रूम में बिठाया और बात शुरू की “देखो रंजन मैं बचपन से सिर्फ तुम्ही से प्यार करती हूँ और तुम्हारे बिना मर जाउंगी” मैंने  समझाया पर उसने मेरी एक ना सुनी और मुझ पर कूद पड़ी मैंने उसे हटाने की कोशिश भी की लेकिन श्रेया की खुशबु और उसके जिस्म की छुं से मैं पगला गया था और उसका साथ देने लगा.

श्रेया मुझे ड्राइंग रूम से बेडरूम में ले गयी और बोली-आज मैं तुम्हे अपना बना कर ही मानूंगी और तुम उस चुड़ैल की बच्ची को भूल जाओगे”. बेडरूम में जा कर श्रेया और वाइल्ड हो गयी और उसने मेरे शरीर को ऐसे चूमना शुरू किया जैसे मैंने कोई स्वर्ग से उतरा हूँ, मैं भी श्रेया की रौ में बह गया और उसके कपडे उतारने लगा. उसका वो दुधिया जिस्म वो कमाल की मुस्कान और वो सेक्सी आवाज़जो तभी निकलती थी जब वो मूड में होती थी सब कितना मदहोश कर देने वाला था. श्रेया के कपडे उरने के बाद उसका चाँद जैसा बदन मेरे आगोश में था और वो हुस्न की मलिका मेरे जिस्म से खेलने को आतुर थी, मैंने श्रेया के गुलाब की पंखुड़ियों जैसे होठों को चूमा और खूब चूसा और श्रेया भी मेरे होठों और जीभ को चूस रही थी. उसका ये सेक्सी रूप देखने लायक था.

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झे काफी मजा आ रहा था। मैं उनके बोबे दबा रहा था और होंठ चूस रहा था…फिर वो बोली- साले, केवल चूसेगा ही या खायेगा भी… ?? मैं बोला – साली, बड़ी जल्दी है तुझे… चल घोड़ी बन जा! जल्दी कर… मुझे तो तुझसे ज्यादा जल्दी है, श्रेया तूने मुझे पहेले बताया होता …वो बोली – अच्छा, ऐसी बात है तो लो… और वो घोड़ी बन गई, मैं उसे पेलने लगा।वो बोली – थोड़ा तेज नहीं चोद सकता… ?? और मैंने झटके तेज कर दिए और उसे चोदने लगा!!थोड़ा धीरे !! उई माँ… मर गई साले! थोड़ा धीरे..

मैंने कहा- अब पता चला साली, तेरी गाण्ड का तो आज मैं बुरा हाल बना कर छोड़ूंगा!वो भी कहने लगी – हाँ कुत्ते… !! और मेरा साथ देने लगी… मैं उसकी चूत जोर जोर से चोदने लगा। अब वो मजे से चुदने लगी .

अब बारी उसकी पेंटी के उतरने की थी. पहले तो मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से ही उसकी चुत को चूमा और उसके बाद एक ही झटके में उसकी पेंटी को उतार दिया. क्या मस्त चुत थी उसकी… एकदम गुलाबी और उस पर हलके – हलके रोंये… मैंने उसकी मखमली चुत को चाटना शुरू किया.. वो मजे में झूम रही थी. उसके मुह से मादक आवाज़े सिस्कारिया निकल रही थी. ये सिस्कारिया मुझे और भी ज्यादा पागल बना रही थी और मुझ में जोश भर रही थी. इन सब के  बीच श्रेया आज पहली बार कुछ बोल रही थी.

श्रेया  – रंजन मेरी जान और जोर से अहहाह अहहः अहः ऊऊओ मर गयी.. और जोर से करो ना… अहः अहः अहहाह ओअओअओअ अओअओअओअ होहोहोहोह ओह्ह्होहोहोहो.

फिर मैं अपने लंड को उसकी चुत पर सहलाने लगा और अचानक मैंने एक जोर से झटका दिया. मेरा आधा लंड एकदम से उसकी चुत में चला गया और वो चीख पड़ी. मैंने एकदम से अपने होठो को उसके होठो पर रख दिया और उसकी चीख को बीच में ही दबा दिया. उसकी चुतफट गयी थी और पूरा बेड खून से भर गया था. उसे काफी दर्द हो रहा था. मैं थोड़ा रुक गया. जब उसका दर्द कुछ कम हुआ, तो मैंने धीरे – धीरे अपना पूरा लंड उसकी चुत में डाल दिया. अब वो भी मज़े लेकर चुदवा रही थी. हम दोनों ने बहुत लम्बी चुदाई की और मैं उसकी चुत में ही झड़ गया. उस दिन हमने ३ बार चुदाई की. 

 एक घंटा से ऊपर उसे चोदता रहा… मैंने उसे अलग अलग ढंग से चोदा!! 20-25 मिनट बाद जब मेरी छूट होने को आई तो मैंने लण्ड बाहर कर उसके मुँह पर पिचकारी मारी और उसने मेरा लण्ड अपने मुँह में ले लिया और सारा वीर्य चाट गई… !!

फिर मैं उससे चिपक गया।हम दोनों एक दूसरे के साथ देर तक चिपके रहे। इतने में मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया और मैंने कहा – श्रेया , एक बार और हो जाये… ??

वो बोली – हाँ हाँ!! क्यों नहीं? नेकी और पूछ पूछ !! … आजा मेरे राजा, फाड़ दे अपनी श्रेया की चूत!!

उस दिन मैंने श्रेया को पाँच बार चोदा… नए नए स्टाइल में!!! और उसके बाद हमारे बीच सिलसिला चल पडा।उसे जब भी मौका मिलता, वो मेरे घर आ जाती या फिर मुझे मौका मिलता तो मैं उसके घर…

पर हम दोनों इसी तरह मिलते रहे 6 महीने तक ,पर उसका बाप उसका शादी दुसरे जायगा फिक्स कर दिया ,उसने भी दबाब में एके मन गया पर शादी के एक साल बाद फिर मुझसे मिला और हम दोनों जिस काम को अधुरा छोड़ गये थे उसे पूरा करने लगा .

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